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अनिल को टक्कर देने टीवी के मैदान में आएँगे मुकेश अंबानी

भारत के सबसे अमीर मुकेश अंबानी केबल टीवी के धंधे में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। इससे ये अनुमान लगाया जा रहा है कि क्या वो अपने भाई अनिल अंबानी से फिर भिड़ेंगे जो पहले से ही इस धंधे में है। जानकारों के मुताबिक मुकेश अंबानी के इस इंडस्ट्री में उतरने पर पूरी इंडस्ट्री हिल जाएगी।

मुकेश अंबानी फिलहाल ऑयल और गैस कंपनी रिलायंस के मालिक है। अब वो सीधे ग्राहकों को टारगेट कर रहे हैं। आने वाले कुछ दिनों में 4जी सेवा लॉन्च करने की तैयारी में है। इस पर 1 लाख करोड़ से ज्यादा निवेश हो चुके हैं।

टीवी पर कब्जे की तैयारी

इकॉनामिक टाईम्स ने खबर दी है कि अब मुकेश अंबानी की करीब 13 हजार करोड़ खर्च कर लोगों के टीवी पर कब्जा करने की योजना है। मामले की जानकारी रखने वाले 2 लोगों ने ये खुलासा किया है। वो इस बिखरे हुए सेक्टर में निवेश कर अपने पांव जमाना चाहते हैं। रिलायंस ने इस योजना पर कोई भी जवाब देने से इंकार कर दिया।

भारत में घरेलू मनोरंजन बहुत लोकप्रिय है। इसमें छोटे केबल ऑपरेटर केबल के जरिए ग्राहकों को जोड़े रखे हुए हैं।

छोटे ऑपरेटरों से डील

अंबानी की टीवी यूनिट आक्रामक तरीके से इस सेक्टर में उतरे हुए सैंकड़ो छोटे केबल ऑपरेटरों से डील कर रही है। वो अपने कंपीटिटर को भी नहीं छोड़ रहे हैं। इस सेक्टर में फिलहाल हेथवे केबल, डेन नेटवर्क और सिटी केबल संगठित तौर पर काम कर रहे हैं। रिलायंस के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 6 महीने में करीब 10 ग्राहकों तक पहुंचने का लक्ष्य है।

मध्यम अवधि में करीब 50 लाख और 3 साल में 2 करोड़ घरों तक पहुंचने का लक्ष्य है।

टीवी के साथ बहुत कुछ फिलहाल सिर्फ 2 करोड़ घरों में ब्रॉडबैंड या कोई दूसरा इंटरनेट कनेक्शन है। इससे ये संकेत मिलता है कि 130 करोड़ के देश में फिलहाल बहुत स्कोप है। देश में ऑप्टिकल फाइबर के जरिए सिर्फ 1 लाख 70 हजार ग्राहक ही जुड़े हैं। डेन सेटेलाइट नेटवर्क के एमडी राजीव गावी के मुताबिक एक बार कंपनी अंतिम ग्राहक तक पहुंच जाए इसके बाद वो बड़ी खिलाड़ी बन सकती है।

रिलायंस के अधिकारी के मुताबिक वो सैंकड़ो चैनल के साथ, वीडियो ऑन डिमांड, इंटरनेट, लैंडलाइन फोन के साथ घर की निगरानी की सेवा भी देगी। कंपनी नेटफ्लिक्स का देसी वर्जन जियो प्ले की भी सेवा देगी।

क्या ये दरार का संकेत है

अंबानी का लक्ष्य है कि फिलहाल केबल और सेटेलाइट की दुनिया में जो सबसे बड़ा खिलाड़ी है उसे छोटा कर दिया जाए। 2010 तक टेलीकॉम सेक्टर में अनिल अंबानी की कंपनी रिलांयस कम्युनिकेशन की थोड़ी बहुत पहुंच थी। लेकिन कंपनी को आगे बढ़ाने के चक्कर में कंपनी पर 5 अरब डॉलर का कर्ज हो गया। दोनों भाई एक दशक पहले ही अलग हो चुके हैं।

मुकेश अंबानी ने ऑयल और गैस को चुना तो अनिल अंबानी ने रिलायंस कम्युनिकेशन को जो खुद मुकेश अंबानी चला रहे थे। 2010 में दोनों भाईयों ने समझौता किया और आपस में कंपीटिशन न करने शर्त को हटा दिया। कुछ ही हफ्तों में मुकेश अंबानी ने नीलामी में पूरे भारत में ब्रॉडबैंड का लाइसेंस हासिल कर लिया।

इस कंपनी का नाम रिलायंस जियो रखा गया। ये कुछ ही हफ्तों में 4जी सेवा लॉन्च करने वाली है।

आर कॉम ने सिस्टेमा को खरीदा

एनालिस्टों के मुताबिक रिलायंस जियो के डर से अनिल अंबानी की कंपनी आर कॉम ने रूस की सिस्टेमा को खरीदने की डील की। पिछले सात साल में टेलीकॉम सेक्टर में इतनी बड़ी डील हुई। कंपनी की अब एयरसेल खरीदने की बातचीत भी चल रही है ताकि देश में दूसरी सबसे बड़ी मोबाइल कंपनी बनाई जा सके। रिलायंस कम्युनिकेशन ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया।

कुछ क्षेत्रों में सहयोग भी दोनों कंपनियां कुछ क्षेत्रों में आपस में सहयोग भी कर रही हैं। रिलायंस कम्युनिकेशस के पास देश में 1 लाख 40 किलोमीटर का फाइबर ऑप्टिक केबल नेटवर्क है। इसका उपयोग रिलायंस जियो करेगा। जियो के पास खुद का ढाई लाख किलोमीटर का ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क है।

रिलायंस अगर टीवी के क्षेत्र में उतरती है तो वो आर कॉम के टॉवर और केबल का उपयोग करेगी। जनवरी में दोनों कंपनियों ने 4जी सेवा के लिए आर कॉम के 800 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के उपयोग के लिए करार किया है। इससे कंपनी को कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन एनालिस्ट की माने तो टेलीकॉम सेक्टर में मुकेश अंबानी के उतरने की आंच सबको लगेगी। इसमें आर कॉम भी शामिल है।

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