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विधि क्षेत्र में बढ़ाएँ हिन्दी का उपयोग

भोपाल। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरी नाथ त्रिपाठी ने कहा कि विधि क्षेत्र में हिन्दी का उपयोग निरंतर बढ़ रहा है, जो सुखद संकेत है। सशक्त इच्छा शक्ति से विधि के क्षेत्र में हिन्दी के उपयोग को और अधिक बढ़ाया जाए। श्री त्रिपाठी आज यहाँ 10वें विश्व हिन्दी सम्मेलन में ‘विधि क्षेत्र में हिन्दी और भारतीय भाषाएँ’ विषय पर समान्तर सत्र को संबोधित कर रहे थे।

श्री त्रिपाठी ने कहा कि केन्द्र सरकार में राजभाषा विभाग भी कार्यरत है। इसे और सक्रिय बनाते हुए हिन्दी के प्रयोग को बढ़ाने में सफलता अवश्य मिलेगी। श्री त्रिपाठी ने कहा कि सरल हिन्दी को लोकप्रिय बनाने के प्रयास भी किये जायें। भाषा को क्लिष्ट बनाने से अनेक लोग हिन्दी से दूर भी हो जाते हैं। जहाँ तक बोलचाल की हिन्दी का प्रश्न है वह अपने सरल स्वरूप में ही लोकप्रिय हुई है। हिन्दी के विकास के लिये सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए।

छत्तीसगढ़ के न्यायमूर्ति श्री शम्भूनाथ श्रीवास्तव ने कहा कि इंग्लेण्ड में भी 1930 तक अदालती फैसले फ्रेंच भाषा में हुआ करते थे। इस संबंध में संशोधन के बाद अंग्रेजी में फैसले लिये जाने लगे। हमारे देश में भी अदालतों द्वारा हिन्दी में फैसले लेने की व्यवस्था पूरी तरह लागू हो सकती है। विधि क्षेत्र में हिन्दी का उपयोग निरंतर बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित अनेक राज्य में न्यायालयों द्वारा हिन्दी में निर्णय लिये जा रहे हैं।

सत्र में श्री प्रदीप कुमार द्वारा बताया गया कि मध्यप्रदेश में 18 सितम्बर 1971 में अनुच्छेद 348 (2) में राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति की अनुमति से न्याय क्षेत्र में अंग्रेजी की अनिवार्यता को समाप्त करवाकर हिन्दी का प्रयोग प्रारम्भ करवाया जा चुका है। मध्यप्रदेश में अनेक अन्य राज्य की तुलना में उच्च न्यायालय में हिन्दी में याचिका दायर करने और निर्णय हिन्दी में दिये जाने का कार्य अधिक हो रहा है। यही नहीं मध्यप्रदेश में अधीनस्थ न्यायालयों में भी हिन्दी का प्रयोग बढ़ा है। सत्र में बताया गया कि कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश आदि राज्यों में अंग्रेजी के साथ ही कन्नड़, तमिल, तेलुगू भाषाओं में न्यायालयों में फैसले लेने के साथ अन्य कार्य भी हिन्दी में हो रहे हैं।
हिन्दी में हस्ताक्षर पर कानूनी अड़चन नहीं

सत्र में बताया गया कि कोई भी व्यक्ति बिना किसी कानूनी कार्यवाही के अपने हस्ताक्षर परिवर्तित कर सकता है। अंग्रेजी के स्थान पर हिन्दी में खाता प्रारम्भ करने के लिए बैंक एवं अन्य संस्थानों को आवश्यक प्रपत्र में जानकारी देनी होती है। इस अवसर पर वक्ताओं द्वारा विभिन्न राज्यों में हिन्दी में विधि की पढ़ाई के लिए की गई व्यवस्था की भी जानकारी दी गई। इस सत्र में श्री दयाशंकर मिश्र, फिल्म निर्माण से जुड़ी बीबीसी की पूर्व उदघोषक और कार्यक्रम प्रस्तुतकर्ता सुश्री रमा पाण्डे, श्री अजय मिश्र, मध्यप्रदेश के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्री वर्धन ने भी हिस्सा लिया।

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