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समाधान परक पत्रकारिता समय की मांगः प्रो.के.जी.सुरेश

· पांच लेखकों को मिला ‘स्वस्थ भारत मीडिया सम्मान-2019’

· स्वस्थ भारत डॉट इन के पांच वर्ष पूर्ण होने पर हुआ आयोजन

· स्वस्थ भारत मीडिया, दिल्ली पत्रकार संघ एवं स्वस्थ भारत (न्यास) का संयुक्त आयोजन

नई दिल्ली।दिल्ली पत्रकार संघ के अध्यक्ष मनोहर सिंह एवं आईआईएमसी के पूर्व महानिदेशक वरिष्ठ पत्रकार प्रो. के.जी.सुरेश ने देश के पांच युवाओं को नई दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में ‘स्वस्थ भारत मीडिया सम्मान-2019’ से सम्मानित किया। सम्मानित होने वाले युवाओं में मीडिया प्राध्यापक डॉ. रामशंकर, वरिष्ठ पत्रकार विनीत उत्पल, शोधार्थी कमल किशोर उपाध्याय, लेखक डॉ. उत्सव कुमार सिंह और प्राध्यापक प्रभांशु ओझा शामिल हैं. यह सम्मान स्वास्थ्य समाचार एवं विचारों का राष्ट्रीय मंच ‘स्वस्थ भारत डॉट इन’ के पांच वर्ष पूर्ण होने के मौके पर स्वास्थ्य संबंधी विषयों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत ‘स्वस्थ भारत मीडिया’ एवं ‘स्वस्थ भारत (न्यास)’ ने प्रदान किया. इस मौके पर ‘स्वास्थ्य पत्रकारिता दशा एवं दिशा’ विषय पर एक राष्ट्रीय परिसंवाद का भी आयोजन किया गया. इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार प्रो. अनिल निगम, डॉ. प्रमोद कुमार, दिल्ली जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अमलेश राजू, वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी, रवि शंकर, डॉ. ममता ठाकुर, डॉ अभिलाषा द्विवेदी, डॉ. आनंदवर्धन, डॉ आलोक रंजन पांडेय. सुबोध कुमार, जलज कुमार, आशुतोष कुमार सिंह, प्रियंका एवं धीप्रज्ञ द्विवेदी उपस्थित थे।

 

अपने अध्यक्षीय संबोधन में दिल्ली पत्रकार संघ के अध्यक्ष मनोहर सिंह ने स्वस्थ भारत डॉट इन के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर स्वस्थ भारत मीडिया की मेहनत को रेखांकित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य पत्रकारिता को मजबूत बनाने की आज सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में डीजेए स्वस्थ भारत मीडिया के साथ मिलकर पत्रकारों को स्वास्थ्य रिपोर्टिंग पर वर्कशॉप आयोजित करायेगा। उन्होंने कहा कि देश को स्वास्थ्य संबंधी विषयों के बारे में सूचित एवं शिक्षित करना बहुत जरूरी है। उन्होंने इस परिसंवाद में भाग ले रहे सभी वक्ताओं की बातों को रेखांकित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य पत्रकारिता के क्षेत्र में अभी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है।

 

इस मौके पर आईआईएमसी के पूर्व महानिदेशक प्रो. के.जी सुरेश ने कहा कि अभी तक हम समस्या केन्द्रित पत्रकारिता करते रहे हैं जबकि जरूरत इस बात की है कि हम समाधान केन्द्रित पत्रकारिता करें। स्वास्थ्य की शोध-परक रिपोर्टिंग पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य एवं शिक्षा के पर लिखने वाले पत्रकार को पत्रकारिता के साथ-साथ एक्टिविज्म भी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य रिपोर्टिंग पर प्रशिक्षण की जरूरत है। उन्होंने तमाम उदाहरणों के माध्यम से यह समझाने की कोशिश की कि किस तरह से पश्चिम से आए किसी शोध पत्र की अनुशंसाओं को हम हू बहूं छाप देते हैं। जबकि कई बार बाजार के दबाव में भ्रामक एवं बाजार को लाभ पहुंचाने के लिए भी कुछ खबरों को बढ़ावा दिया जाता है। स्वस्थ भारत मीडिया के कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि विगत पांच वर्षों में स्वस्थ भारत डॉट इन ने स्वास्थ्य पत्रकारिता एवं एक्टिविजम का सार्थक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का धर्म है सूचित करना, शिक्षित करना और साथ में प्रेरित करना।

 

वरिष्ठ पत्रकार डॉ प्रमोद कुमार ने न्यूज रूम में पत्रकारों की सेहत पर किए गए अपने शोध का जिक्र करते हुए कहा कि पत्रकार गंभीर तनाव में काम कर रहे हैं। बदलती तकनीक और मीडिया के बदलते प्रतिमानों के परिणाम स्वरूप न तो काम के घंटे तय है और न ही समय पर वेतन मिल पा रहा है और न ही रोजगार की सुरक्षा है। उन्होंने कहा कि 85 फीसद से अधिक पत्रकार ठेके पर काम कर रहे हैं और अधिकतर पत्रकार किसी न किसी बीमांरी की चपेट में हैं। उन्होंने कहा कि यदि पिछले 10 साल के दौरान पत्रकारों की मौतों की गहराई से जांच की जाए तो उनकी मौत का असली कारण न्यूज रूम में पनप रहा तनाव ही मिलेगा। उन्होंने मीडिया संस्थानों और पत्रकार संगठनों को आगाह किया कि यदि पत्रकारों में पनप रहे इन तनावों को कम करने के लिए कारगर कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में यह मीडिया के समक्ष एक गंभीर चुनौती पेश करेगा। न्यूयार्क टाइम्स, बिजनेस इनसाइडर, हफीमगटन पोस्ट एवं फोर्ब्स मीडिया संस्थानों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इन संस्थानों ने पत्रकारों का तनाव कम करने के लिए सार्थक प्रयास किए हैं और इसका उन्हे सार्थक परिणाम भी मिले है।

 

वरिष्ठ पत्रकार प्रो. अनिल निगम ने कहा कि भारत में स्वास्थ्य के क्षेत्र में पत्रकारिता की अनंत संभावनाएं हैं, स्वास्थ्य के क्षेत्र में संजीदगी के साथ इससे जुड़ी समस्याओं और मुद्दों को उठाया जाना चाहिए. सरकार द्वारा चलाए जा रहे स्वास्थ्य विषयक जनोपयोगी योजनाओं के बारे में लोगों को ठीक से सूचित किए जाने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य संबंधी तमाम योजनाएं चला रही है। लेकिन अंतिम जन तक उसकी सूचना सही समय पर नहीं पहुंच पाती है। इस दिशा में भी पत्रकारों को काम करना चाहिए।

इसके पूर्व विषय प्रवेश कराते हुए वरिष्ठ पत्रकार रवि शंकर ने कहा कि आज पत्रकारिता का अर्थ केवल राजनीतिक पत्रकारिता से समझा जाता है। इससे स्वास्थ्य जैसे जीवन के महत्त्वपूर्ण आयाम उपेक्षित हो जाते हैं। देखा जाए तो आज स्वास्थ्य का विषय भी राजनीति से ही संचालित हो रहा है। इसलिए राजनीतिक पत्रकारों को भी स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों की सही समझ होना आवश्यक है। केवल रिपोर्टिंग करना ही पत्रकारिता नहीं होती। उदाहरण के लिए यदि कोई शोध निष्कर्ष यह बताए कि घी खाना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है, तो इसकी रिपोर्ट मात्र लिखने वाला रिपोर्टर होगा, पत्रकार नहीं। पत्रकार को इसकी तह तक जाना चाहिए। इसलिए एक पत्रकार के लिए व्यापक अध्ययन आवश्यक है। चूंकि अपने देश में स्वास्थ्य और चिकित्सा विज्ञान की एक लंबी परंपरा रही है, इसलिए स्वास्थ्य पत्रकार के लिए व्यापक अध्ययन तो आवश्यक है ही, साथ ही उसे देश की स्वास्थ्य पंरपरा की भी गंभीर जानकारी होनी चाहिए। उदाहरण के लिए देश में हड्डी वैद्यों की जो परंपरा है, वह आज के चिकित्सा विज्ञान से कहीं उन्नत है, परंतु स्वास्थ्य पत्रकारों को इसकी जानकारी नहीं होती। कैंसर और एड्स जैसे लाइलाज रोगों को ठीक करने वाले वैद्यों के बारे में भी पत्रकारों को कोई जानकारी नहीं होती। इसके अलावा आयुर्वेद के विज्ञान से भी वे परिचित नहीं हैं। ऐसे में कोई पाश्चात्य शोध कितना विश्वसनीय है, इसे जानना उनके लिए कठिन हो जाता है।

 

स्वस्थ भारत (न्यास) के चेयरमैन एवं स्वस्थ भारत डॉट इन के संपादक आशुतोष कुमार सिंह ने सभी सम्मानित मीडियाकर्मियों एवं शोधार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान उन लेखकों, मीडियाकर्मियों या शोधार्थियों को दिया गया है, जिन्होंने सेहत विषयक शोध लेख, आलेख या पुस्तक लिखे हैं और गंभीरता से काम किया है. ‘स्वस्थ भारत डॉट इन’ के पांच वर्ष के उपलक्ष्य में पांच व्यक्तियों को सम्मानित किया गया है लेकिन अगले वर्ष से सिर्फ तीन व्यक्तियों को सम्मानित किया जायेगा. इस वर्ष सम्मान के पात्रों का चयन तीन सदस्यीय निर्णायक मंडल द्वारा किया गया जिनमें वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी, दिल्ली पत्रकार संघ के पूर्व महासचिव डॉ. प्रमोद कुमार और भारतीय सूचना सेवा के वरिष्ठ अधिकारी ऋतेश पाठक शामिल थे.

स्वस्थ भारत मीडिया की सीइओ प्रियंका सिंह ने बताया कि ‘स्वस्थ भारत’ का मुख्य उद्देश्य देश में स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर जागरूकता लाना है. इसके लिए स्वस्थ भारत मीडिया विभिन्न तरह गतिविधियों के माध्यम से जनसमान्य के बीच पहुंचने का प्रयास कर रहा है और मुख्यतः संचार के माध्यम से इन विषयों की समझ आम नागरिकों में विकसित करने की कोशिश कर रहा है।

 

स्वस्थ भारत मीडिया के इस महाआयोजन में दिल्ली पत्रकार संघ एवं स्वस्थ भारत (न्यास) सहआयोजक के रूप में रहे जबकि इस आयोजन में मस्कट हेल्थकेयर, ब्रेन बिहेवियर रिसर्च फाउंडेशन ऑफ़ इण्डिया (बीबीआरएफआई), वैदेही फाउंडेशन, कॉसमॉस अस्पताल, ज्ञानबिंदु शैक्षणिक संस्थान का संस्थागत सहयोग प्राप्त हुआ। मीडिया सहयोगी के रूप में युगवार्ता साप्ताहिक, बियोंड हेडलाइंस और डायलॉग इण्डिया का साथ मिला। कार्यक्रम का मंच संचालन वरिष्ठ शिक्षाविद संजय कुमार तिवारी ने किया।

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