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  • ये हैं मोदीजी के डॉ.नगेंद्र

    ये हैं मोदीजी के डॉ.नगेंद्र

    डॉ. नगेंद्र उन लोगों में से हैं जिनके आगे तमाम उदाहरण फीके पड़ जाते हैं। डॉ. नगेंद्र अपना उदाहरण खुद हैं उनकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती। डॉ. नगेंद्र एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने अपने जीवन का एक-एक क्षण मानवता की सेवा में समर्पित कर दिया है। योग और ध्यान के माध्यम से डॉ. नगेंद्र ने ऐसी चमत्कारिक चिकित्सा पध्दति विकसित की है कि जटिल से जटिल बीमारी भी ठीक हो जाती है।

  • तकनीक देसी, मगर भाषा विदेशी, ये गुलामी कब जाएगी

    तकनीक देसी, मगर भाषा विदेशी, ये गुलामी कब जाएगी

    सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा हर स्तर पर राजभाषा सम्बन्धी प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा है। मंत्रालय की हिंदी वेबसाइट महीनों से अद्यतित नहीं की गयी है, मंत्रालय की कोई भी ऑनलाइन सेवा अब तक हिंदी में शुरू नहीं की गयी है।

  • ज़ी अनमोल ने शीर्ष पर, कलर्स ने मात दी स्टार को

    ज़ी अनमोल ने शीर्ष पर, कलर्स ने मात दी स्टार को

    बीएआरसी (बार्क) ने हिंदी मनोरंजन चैनलों के 50वें हफ्ते (12-18 दिसंबर, 2015) के जो आंकड़े जारी किए हैं, उसमें जी अनमोल अभी भी शीर्ष पर बना हुआ है, हालांकि चैनल की रेटिंग इस दौरान घटी है, जोकि 779 मिलियन से घटकर 752 मिलियन रह गई है। इधर कलर्स ने भी स्टार प्लस को पीछे छोड़ दिया है और दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। यानी स्टार प्लस अब नंबर-3 पर है। जी टीवी और स्टार उत्सव वही अपने पुराने पायदान नंबर-4 और नंबर-5 पर है।

  • हिन्दी से कन्नड़ और कन्नड़ से हिन्दी में अऩुवाद की गई पुस्तक के लिए पुरस्कार

    कमला गोइन्का फाउण्डेशन के प्रबंध न्यासी श्री श्यामसुन्दर गोइन्का ने बताया कि हिन्दी साहित्य के कन्नड़ में अनुवाद या कन्नड़ साहित्य के हिन्दी में अनुवाद की गयी सर्वश्रेष्ठ साहित्यिक कृति (गद्य या पद्य दोनों में से किसी भी विधा में) के लिए इक्कीस हजार राशि का "पिताश्री गोपीराम गोइन्का हिन्दी-कन्नड़ अनुवाद पुरस्कार" हर दो वर्ष में एक बार दिया जाता है। यह पुरस्कार कन्नड़-हिन्दी साहित्य की पारस्परिक समृद्धि के लिए दिया जाता है।

  • ड्रायवर की बेटी बैठेगी न्यायाधीश की कुर्सी पर

    ड्रायवर की बेटी बैठेगी न्यायाधीश की कुर्सी पर

    जयपुर । 24 साल की ज्योति शर्मा का परिवार काफी गरीब है, लेकिन आज ज्योति के ऊपर केवल उनके माता-पिता को ही नहीं बल्कि पूरे राज्य को गर्व है। ज्योति को राजस्थान न्यायिक सेवा (आरजेएस) परीक्षा में 15वां स्थान मिला है। ज्योति ने पहली बार यह परीक्षा दी थी।

  • राम और दशरथजी को मुआवजा देने के लिए 6 महीने तक भटकते रहे अधिकारी

    अब तक आपने सुना होगा कि प्रभावित लोग मुआवजा पाने के लिए प्रशासनिक अफसरों के चक्कर काटते फिरते हैं लेकिन यहां मामला कुछ अलग है। मध्य प्रदेश के ब्यावरा और राजगढ़ के बीच बन रहे मोहनपुरा डेम के डूब क्षेत्र में आ रही मांडाखेड़ा गांव में बने मंदिर की जमीन को अधिग्रहित करने के लिए प्रशासन आठ महीने से भगवान श्रीराम पिता दशरथ जी महाराज को छह लाख का मुआवजा देने भटक रहा है।

  • जम्मू कश्मीर राज्य में महिलाओं के मूल अधिकारों का भी हनन हो रहा है

    जम्मू कश्मीर राज्य में महिलाओं के मूल अधिकारों का भी हनन हो रहा है

    मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहमद सईद जी ने जम्मू कश्मीर राज्य के लोगों की दयनीय स्थिति १ मार्च २०१५ को यह कह कर संक्षिप्त में बयान कर दी थी कि जम्मू क्षेत्र के लोग अगर ‘उत्तर हैं तो फिर कश्मीर घाटी के लोग दक्षिण हैं’. जो राज्य कभी भाई चारे के लिए जाना जाता था उस की अगर ६० साल की आज़ादी के बाद ऐसी स्थिति है तो यह बड़ी पीड़ा जनक बात हैजम्मू कश्मीर राज्य के जन-मानस को कभी अनुच्छेद ३७० के नाम पर , कभी भारत के साथ २६ अक्टूबर १९४७ के अधिमिलन (एक्सेशन ) के नाम पर या कभी पाकिस्तान के नाम पर या कभी पाकिस्तान

  • एक हिन्दू दंपत्ति ने मलेशिया की पहली इस्लामिक एअर लाईऩ शुरु की

    एक भारतीय हिंदू दंपत्ति ने मलयेशिया की पहली इस्लामिक एयरलाइन शुरू की है जिसमें शरियत के अनुरूप सेवाओं की पेशकश की जाएगी। इसमें उड़ान से पहले नमाज अदा करना, उड़ान के दौरान शराब या पोर्क से बने व्यंजन का परोसा नहीं जाना और एयर होस्टेस के लिए पोशाक के सख्त नियम शामिल हैं।

  • भारतीय राजनीति के आकाश का चमकता सितारा हैं अटलजी

    भारतीय राजनीति के आकाश का चमकता सितारा हैं अटलजी

    टूटे हुए तारों से फूटे वासंती स्वर पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर झरे सब पीले पात

  • अपने ही देश में 70 साल से शरणार्थी की जिंदगी जी रहे हैं कश्मीरी पंडित

    अपने ही देश में 70 साल से शरणार्थी की जिंदगी जी रहे हैं कश्मीरी पंडित

    बंटवारे के खूनखराबे को चुनौती देकर वे पाकिस्तान के सियालकोट से बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर किसी तरह से जम्मू के गांवों तक पहुंचे थे लेकिन आजादी के 70 साल बाद भी उन्हें जम्मू और कश्मीर राज्य में स्थाई निवासी का दर्जा, शिक्षा, रोजगार और वोटिंग के अधिकार पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।

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