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  • शकूरबस्ती से उपजे कुछ सवाल

    विकास के नाम पर गांवों को उजाड़ा जा रहा है। गांव के कृषि, लघु उद्योग, हस्तशिल्प को देशी-विदेशी धनपशुओं को फायदा पहुंचाने के लिए नष्ट किया जा रहा है। किसानों, आदिवासियों की जमीन छीनकर देशी-विदेशी लूटेरों को सेज व औद्योगिक कॉरिडोर बनाने और खनन के नाम पर दिया जा रहा है। इससे गांव का पलायन बढ़ा है और भारत की करीब 35 प्रतिशत आबादी शहरों में निवास करने लगी है जिसे भारत के भूतपूर्व वित्तमंत्री पी चिदम्बरम 80 प्रतिशत तक बढाने की बात करते हैं। गांव से उजड़ कर जब वहां के किसान-मजदूर शहर को आते हैं तो उनकी शरणस्थली झुग्गी बस्ती होती है।

  • शिवना सम्‍मानों की घोषणाःब्रजेश राजपूत, लालित्‍य ललित तथा सौरभ पाण्‍डेय को सम्मान

    शिवना सम्‍मानों की घोषणाःब्रजेश राजपूत, लालित्‍य ललित तथा सौरभ पाण्‍डेय को सम्मान

    शिवना प्रकाशन द्वारा प्रति वर्ष दिये जाने वाले तीन सम्‍मानों की घोषणा कर दी गई है। शिवना प्रकाशन के शहरयार ख़ान ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष सम्‍मानों के लिये साहित्‍यकारों के नाम चयन हेतु जो समिति बनाई गई थी उस समिति ने शिवना के तीनों सम्‍मानों हेतु सर्वसम्‍मति से नामों का चयन कर लिया है। इस चयन समिति में साहित्‍यकार श्री नीरज गोस्‍वामी, डॉ. सुधा ओम ढींगरा, श्रीमती इस्‍मत ज़ैदी, तथा पत्रकार श्री चंद्रकांत दासवानी सदस्‍य थे।

  • शायरी और ग़ज़ल की शाम ‘ग़ज़ल का आलोक’ के साथ जाते साल को सलाम…

    शायरी और ग़ज़ल की शाम ‘ग़ज़ल का आलोक’ के साथ जाते साल को सलाम…

    साल 2015 हमसे अलविदा लेने को तैयार है और तमाम दिल्लीवासी नये साल के जश्न में मगन हैं। जहां एक ओर पार्टियों और डी.जे. नाइट्स का शुमार छाया है वहीं हिन्दुस्तानी कला-संस्कृति के प्रचार-प्रसार हेतु लगातार शायरी व ग़ज़ल से सुसज्जित कार्यक्रम आयोजित करती आ रही गैर सरकारी संस्था साक्षी ने अपने अंदाज में एक सुरमयी संध्या ‘ग़ज़ल का आलोक’ के माध्यम से जाते साल को विदा किया।

  • इसको ही तो प्यारे छप्पन इंची सीना कहते हैं

    इसको ही तो प्यारे छप्पन इंची सीना कहते हैं

    जिसकी आँखों में भारत की उन्नति का उजियारा है, जिसकी गलबहियां करने को व्याकुल भी जग सारा है,

  • मीरा, सूर, कबीर को जन-जन तक पहुंचाने वाले मराठी कवि मंगेश पड़गाँवकर नहीं रहे

    मीरा, सूर, कबीर को जन-जन तक पहुंचाने वाले मराठी कवि मंगेश पड़गाँवकर नहीं रहे

    जाने-माने मराठी कवि, पद्मभूषण से सम्मानित मंगेश पडगांवकर का 30 दिसंबर को यहां निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे। कुछ समय से वह बीमार थे। महाराष्ट्र में सिंधुदुर्ग जिले के वेंगुर्ला में 10 मार्च 1929 को जन्मे पडगांवकर ने बम्बई विश्‍वविद्यालय से मराठी और संस्कृत में एमए की डिग्री ली थी। उन्होंने रूइया कॉलेज में कुछ साल तक मराठी पढ़ाई भी थी। 1970 से 1990 तक उन्होंने यूएस इन्फॉर्मेशन सर्विस में संपादक के रूप में काम किया।

  • भारतीय फौज की इस चाल से हारा था पाकिस्तान कारगिल में

    करगिल में हुई भारत और पाकिस्तान की जंग में इंडियन आर्मी ने कुछ ऐसा किया था, जिससे दुश्मन सेना हैरान रह गई थी। 8वीं माउंटेन डिविजन का नेतृत्व करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल मोहिंदर पुरी ने कहा है कि भारतीय सेना ने जिस तेजी और चालाकी से हमला बोला था, उसने दुश्मन को हैरत में डाल दिया था और उसी के चलते 1999 में करगिल युद्ध में विजय मिली थी।

  • एक ट्विटर की शिकायत पर आफताब खान के कर्णावर्त  प्रत्यारोपण शस्त्रक्रिया का रास्ता साफ़

    एक ट्विटर की शिकायत पर आफताब खान के कर्णावर्त प्रत्यारोपण शस्त्रक्रिया का रास्ता साफ़

    अली यावरजंग राष्ट्रीय श्रवण विकलांग संस्थान, मुंबई द्वारा कर्णावर्त तंत्रिका प्रत्यारोपण ( Cochlear Implants Surgery ) को लेकर 4 वर्षीय आफ़ताब आलम खान का परिवार इस प्रतिक्षा में है कि उसका बच्चा प्रत्यारोपण के बाद सुन सकेगा लेकिन लालफीताशाही के चलते गत 1 वर्ष से तारीख पर तारीख मिल रही हैं। इस पुरे मामले की शिकायत आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने ट्विटर पर केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत से करने के बाद कारवाई शुरु हुई और उसकी सर्जरी का रास्ता साफ़ हुआ हैं।

  • अब निजी बैंक से भी मिलेंगे रेल टिकट

    आने वाले समय में रेलवे टिकट भी बैंक से मिल सकेगा। रेलवे निजी क्षेत्र के बैंकों के साथ डाक विभाग की तर्ज पर रेलवे टिकट बेचने की योजना नए साल में लागू करने जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर रेलवे ने एक निजी बैंक से करार भी कर लिया है। इसे अगले साल पेश होने वाले रेल बजट में घोषित किया जा सकता है।

  • सुख और दुःख जीवन में साथ चलते हैं

    दुनिया का हर इंसान सुख चाहता है। दुःख कोई नहीं चाहता। वह दुःख से डरता हैं इसलिए दुःख से छुटकारा पाने के लिए तरह-तरह के प्रयत्न करता है। मतलब दुःख को खत्म करने और सुख को सृजित करने के लिए हर इंसान अपनी क्षमता के मुताबिक हमेशा कुछ-न-कुछ करता है। सुख और दुःख धूप- छाया की तरह सदा इंसान के साथ रहते हैं। लंबी जिन्दगी में खट्ठे-मीठे पदार्थों के समान दोनों का स्वाद चखना होता है। सुख-दुःख के सह-अस्तित्व को आज तक कोई मिटा नहीं सका है। जीवन की प्रतिमा को सुन्दर और सुसज्जित बनाने में सुख और दुःख आभूषण के समान है।

  • रेल मंत्री श्री प्रभु ने कुश्ती प्रतियोगिता का शुभारंभ किया

    केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने मंगलवार को पुरुषों के वरिष्ठ वर्ग की 60वीं फ्री स्टाइल, ग्रीकोरोमन वर्ग तथा महिलाओं के वरिष्ठ वर्ग की 18वीं राष्ट्रीय कुश्ती चैम्पियनशिप का शुभारंभ किया।

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