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  • छत्तीसगढ़ की लोक कला के जगमगाते नक्षत्र

    छत्तीसगढ़ की लोक कला के जगमगाते नक्षत्र

    दाऊ रामचन्द्र देशमुख छत्तीसगढ़ी कला, संस्कृति के ओर सम्पूर्ण रुप से समर्पित है। उन्होंने चंदैनी गोंदा शुरु किये और गांव गांव में गये ताकि कलाकार कवि उससे जोड़े। चंदैनी गोंदा शुरु से ही बहुत लोकप्रिय रहे।

  • डॉ. रमन सिंह द्वारा शोध पत्रिका  ‘मेधा’ के 22वें अंक का का विमोचन

    डॉ. रमन सिंह द्वारा शोध पत्रिका ‘मेधा’ के 22वें अंक का का विमोचन

    मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अपने निवास कार्यालय में संस्कृत शोध पत्रिका ‘मेधा’ के 22वें अंक का विमोचन किया। इसका प्रकाशन शासकीय दूधाधारी श्रीराजेश्री महन्त वैष्णवदास स्नातकोत्तर संस्कृत महाविद्यालय द्वारा किया गया है। उल्लेखनीय है कि यह महाविद्यालय संस्कृत भाषा का प्रमुख शोध केन्द्र भी है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्यामण्डलम् के पूर्व अध्यक्ष डॉ. गणेश कौशिक, महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्रीमती राधा पाण्डेय, उच्च शिक्षा विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. किरण गजपाल, शोध पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. सत्येन्दु शर्मा, संपादक डॉ. राघवेन्द्र शर्मा और अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजीव तिवारी इस अवसर पर उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने शोध पत्रिका के प्रकाशन पर सभी लोगों को बधाई और शुभकामनाएं दी। इस पत्रिका में संस्कृत, हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं में वेद, ज्योतिष, व्याकरण, दर्शन और साहित्य जैसे विषयों पर शोध पत्र प्रकाशित किए गए हैं।

  • देव संस्कृति विश्वविद्यालय  का लोकार्पण

    देव संस्कृति विश्वविद्यालय का लोकार्पण

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने दुर्ग जिले में कुम्हारी के पास सांकरा स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय के विशाल भवन का लोकार्पण किया। इस विश्वविद्यालय की स्थापना अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा की गई है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए गायत्री परिवार के सभी सदस्यों और पदाधिकारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा - छत्तीसगढ़ में भारतीय संस्कृति के अध्ययन में इस विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण योगदान होगा।

  • ग़ज़लों व शायरी से सराबोर ‘महफिल-ए-खुशरंग’ में घुली रागों की मिठास

    ग़ज़लों व शायरी से सराबोर ‘महफिल-ए-खुशरंग’ में घुली रागों की मिठास

    नई दिल्ली। ; गुलाबी ठंडक भरती शाम और संगीत की रूहानियत भरी शाम का अपना ही आनन्द है, जो न केवल रोजमर्रा की भागम-भाग से अलग सुकून प्रदान करती है बल्कि गीत-संगीत के माध्यम से एक अलग ऊर्जा का संचार करती है।

  • उमेश नेमा, बिनय षडंगी राजाराम और चरनजीत कुकरेजा का रचना-पाठ सम्पन्न

    भोपाल। साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग, भोपाल द्वारा आयोजित निरंतर रचनापाठ की शृंखला के अंतर्गत वरिष्ठ साहित्यकार श्री महेश सक्सेना की अध्यक्षता में उमेश नेमा, बिनय षडंगी राजाराम और चरनजीत कुकरेजा का रचना-पाठ स्वराज भवन के सभागार में संपन्न हुआ।

  • व्योमकेश पाण्डेय और श्वेता रानी द्वारा शोध पत्र वाचन

    व्योमकेश पाण्डेय और श्वेता रानी द्वारा शोध पत्र वाचन

    सीधी. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय भोपाल के एम. फिल के शोधार्थी व्योमकेश पाण्डेय और श्वेता रानी ने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय रायपुर के माधव राव सप्रे शोधपीठ द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में “महिला और मीडिया” में अपनी प्रस्तुति दी.

  • लग तो यही रहा है कि भगवा तेवर में होगा अगला चुनाव

    लग तो यही रहा है कि भगवा तेवर में होगा अगला चुनाव

    रंग दे तू मोहे गेरुआ..... ना तो देश की जनता ने यह गाया और ना ही ‘दिलवाले’ फिल्म में गाए शाहरुख खान के इस गाने के पीछे कोई पूरे देश की भावना थी। फिर भी लग ऐसा रहा है कि जैसे जैसे अगला लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहा है,

  • मैं हर सुबह कुछ नया करना चाहता हूँः डॉ. सुभाष चन्द्रा

    मैं हर सुबह कुछ नया करना चाहता हूँः डॉ. सुभाष चन्द्रा

    डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा कि आजकल लोगों की आकांक्षाएं, पैसे की उपलब्धता, तकनीकी और मांग व आपूर्ति की स्थिति बदल रही है। ऐसे माहौल मेंउपभोक्ता ही सबसे बड़ा प्रेरणाकेंद्र है।

  • मतदाता जागरूकता पर यादगार वाद-विवाद में  अंकिता तोतवानी और प्रीति वैष्णव ने मारी बाज़ी

    मतदाता जागरूकता पर यादगार वाद-विवाद में अंकिता तोतवानी और प्रीति वैष्णव ने मारी बाज़ी

    राजनांदगांव। शासकीय दिग्विजय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के तत्त्वावधान तथा प्राचार्य डॉ.आर.एन.सिंह के मार्गदर्शन में स्वीप प्लान के अंतर्गत जिला स्तरीय निबंध एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता उत्साह पूर्ण वातावरण में, सफलता पूर्वक सम्पन्न हुईं।

  • मांगलिक कार्य आरम्भ होने का दिन है देवोत्थान एकादशी

    मांगलिक कार्य आरम्भ होने का दिन है देवोत्थान एकादशी

    देवोत्थान एकादशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कहते हैं। दीपावली के ग्यारह दिन बाद आने वाली एकादशी को ही प्रबोधिनी एकादशी अथवा देवोत्थान एकादशी या देव-उठनी एकादशी कहा जाता है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव चार मास के लिए शयन करते हैं।

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