A PHP Error was encountered

Severity: Notice

Message: Only variable references should be returned by reference

Filename: core/Common.php

Line Number: 257

Hindi Media
header-logo

जल संरक्षण मानवीय कर्तव्य और राष्ट्रीय जिम्मेदारी - डॉ.जैन

राष्ट्रीय प्रशिक्षक, प्रेरक वक्ता और दिग्विजय कालेज के  प्रोफ़ेसर डॉ.चन्द्रकुमार जैन मानते हैं कि जल संरक्षण आंदोलन, पानी बचाकर देश को संवारने की दिशा में सार्थक कदम है। विश्व जल दिवस पर यहाँ डॉ.जैन ने कहा कि दरअसल जल संरक्षण अभियान एक विश्व स्तरीय सोच की मिसाल बनकर उभरा है। 

readmore
READMORE

समस्याओं का मूल कहां है?

हर मनुष्य सफल होना चाहता है और सफलता के लिये जरूरी है समस्याओं से संघर्ष। समस्याओं रूपी चुनौतियों का सामना करने, उन्हें सुलझाने में जीवन का उसका अपना अर्थ छिपा हुआ है। 

readmore
READMORE

स्वस्थ समाज के दो आधार : स्वच्छता और शिष्टाचार

क्या यह आश्चर्य की बात नहीं है कि आज ज्यादातर भारतीयों के पास मोबाइल फोन तो हैं लेकिन घर में शौचालय नहीं है। यह लोगों की स्वच्छता के प्रति जागरूकता की कमी और उसके प्रति समाज के दृष्टिकोण का मुकम्मल बयान है। 

readmore
READMORE

एस.एम.एस. से बन रही है एक नई दुनिया

पिछले लगभग दो वर्ष से प्रतिदिन सुबह लगभग 6 बजे मेरे मोबाइल पर एक टंकार बिना किसी नागा के बजती है और मैं उस टंकार के साथ आने वाले एस.एम.एस. को पढ़ने के लिये उत्सुक हो जाता हॅूं। इसी एस.एम.एस. के साथ मेरी दिन की शुरूआत शुभ और मंगलमय हो जाती है। 

readmore
READMORE

जीवन को स्वस्थ कैसे बनाएँ

90 प्रतिशत रोग केवल पेट से होते हैं। पेट में कब्ज नहीं रहना चाहिए। अन्यथा रोगों की कभी कमी नहीं रहेगी।

readmore
READMORE

छोड़िये भी ! क्या रखा है इन विचारों में !

हम अपने मन में चल रहे अविवेकपूर्ण व अतार्किक विचारों से परेशान रहते हैं जिसका हमारे दैनिक जीवन और कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. ये विचार सफल व्यक्ति को असफल व्यक्ति से अलग करते हैं.

readmore
READMORE

सफल जीवन की एक नई राह बनाएं

व्यक्ति अपने जीवन को सफल और सार्थक बनाने के लिये समाज से जुड़कर जीता है, इसलिए समाज की आंखों से वह अपने आप को देखता है। साथ ही उसमें यह विवेक बोध भी जागृत रहता है ‘मैं जो भी हूं, जैसा भी हूं’ इसका मैं स्वयं जिम्मेदार हूं। 

readmore
READMORE

अतीत के खंडहर और भविष्य के हवा महल से निकलने की ज़रुरत

अभी के दौर में आर्थिक शब्दावली कुछ ज्यादा ही चलन में है, लिहाजा जीवन मूल्यों को भी आयात-निर्यात की नजर से देखा जाने लगा है। लेकिन भारत ने अपने मूल्य न तो अभी तक किसी पर थोपे हैं, न ही उनका निर्यात किया है।

readmore
READMORE

राजनांदगाँव के दिग्विजय कालेज में यादगार पाक-कला कार्यशाला

शैफ सुभाष अग्रवाल ने व्यंजन-विधि के साथ बतायीं किफायत की बारीकियाँ

readmore
READMORE

आभूषण और पोशाक कश्मीर के गर्व

अपनी नैसर्गिक और अगाध खूबसूरती के लिए कश्मीर की वादियों का कवियों और गायकों ने भरपूर चित्रण किया है जिन्होंने इसे विभिन्न रस्मों, संस्कृतियों और जीने के तरीके का एक खुशनुमा स्थान बताया है। यहां की जमीन और लोगों की आत्मसात करने वाली प्रवृत्तियों ने जीवन का एक अनूठा दर्शन पैदा किया है जिसमें हर धर्म के बुनियादों को न केवल उचित जगह मिली है बल्कि पर्याप्त महत्व भी मिला है।

readmore
READMORE

आभूषण और पोशाक कश्मीर के गर्व

अपनी नैसर्गिक और अगाध खूबसूरती के लिए कश्मीर की वादियों का कवियों और गायकों ने भरपूर चित्रण किया है जिन्होंने इसे विभिन्न रस्मों, संस्कृतियों और जीने के तरीके का एक खुशनुमा स्थान बताया है। 

readmore
READMORE

हार का डर

आज हमारी समाज के समक्ष बहुत सारी  समस्याएं  हैं, और ये समस्याएं ख़त्म होने की जगह,  दिन दूनी रात चौगिनी बढ़ रही है. और कहीं ऐसा न हो की इन समस्याओं के कारण आगे आने वाली पीढ़ियां इन सबके कारण कहीं खो जाएँ।  

readmore
READMORE
author