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मन डोलय रे मांघ फगुनवा,रस घोलय रे मांघ फगुनवा

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में भले ही विविध प्रकार से रंगों का उत्सव मनाया जाता है परंतु सबका उद्देश्य एवं भावना एक ही है। ब्रज मंडल में इस अवसर पर रास और रंग का मिश्रण देखते ही बनता है। बरसाने' की लठमार होली फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती है।

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होली के आध्यात्मिक रंग

भारतवर्ष की ख्याति पर्व-त्यौहारों के देश के रूप में है। इन पर्व-त्यौहारों की श्रृंखला में होली का विशेष महत्व है। होली का आगमन इस बात का सूचक है कि अब चारों तरफ वसंत ऋतु का सुवास फैलनेवाला है। यह पर्व शिशिर ऋतु की समाप्ति और ग्रीष्म ऋतु के आगमन का प्रतीक है। 

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आइये ! जलाएँ स्वच्छ-स्वस्थ-सबल भारत के संकल्प-दीप

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री हर्षवर्धन ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण मुक्त दिवाली सुनिश्चित करने का आग्रह किया। यह भी आग्रह किया है कि स्कूलों और कॉलेजों के प्रधानाचार्य विद्यार्थियों को ध्वनि प्रदूषण के कुप्रभावों के बारे में जागरूक करें। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में एक अभियान शुरू किया गया है, ताकि लोग अपने पैसे ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों में खर्च न करें। इससे भला कौन इंकार कर सकता है कि ये बातें वास्तव में काबिलेगौर हैं। 

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दीपावली पर धर्म का दीप जलाएं

दीपावली एक लौकिक पर्व है। फिर भी यह केवल बाहरी अंधकार को ही नहीं, बल्कि भीतरी अंधकार को मिटाने का पर्व भी बने। हम भीतर में धर्म का दीप जलाकर मोह और मूच्र्छा के अंधकार को दूर कर सकते हैं। दीपावली के मौके पर सभी आमतौर से अपने घरों की साफ-सफाई, साज-सज्जा और उसे संवारने-निखारने का प्रयास करते हैं।

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खगोलीय दृष्टि से दिवाली का महत्व

मेष एवं तुला की संक्रांति में सूर्य विषुवत रेखा (नाड़ीवृत्त) पर रहता है, जिसे देवता 6 माह तक उत्तर की ओर तथा राक्षस 6 माह तक दक्षिण की ओर खींचते हैं। 

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राम की शक्ति पूजा

महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला; ने राम की शक्ति पूजा को अपने ही अंदाज में कविता में अभिव्यक्त किया था दिवाली के शुभ अवसर पर प्रस्तुत है महाकवि की ये अमर रचना 

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दीपावली पर धर्म का दीप जलाएं

दीपावली एक लौकिक पर्व है। फिर भी यह केवल बाहरी अंधकार को ही नहीं, बल्कि भीतरी अंधकार को मिटाने का पर्व भी बने। हम भीतर में धर्म का दीप जलाकर मोह और मूच्र्छा के अंधकार को दूर कर सकते हैं।

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दिवाली पूजन का शुभ मुहुर्त

कुंभ लग्न की अवधि—मध्याह्न 02.40 से अपरान्ह 15.56 तक

वृषभ लग्न की अवधि—-शाम को 19.15 से लेकर रात्रि 21.10 तक

सिंह लग्न की अवधि——रात्रि 01.18 से लेकर 03.38 तक

वृश्चिक लग्न–प्रातः 08 :40 से लेकर 10 :50 तक

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दीपावली पूजन -संपूर्ण जैन विधि

दीपावली जैन संस्कृति का महान पर्व है। आज से 2524 वर्ष पूर्व कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के समापन होते ही अमावस्या के प्रारम्भ में चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर का पावापुरी से विर्वाण हुआ था।

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उर्दू शायरो ने भी खूब कलम चलाई है दिवाली पर

मध्य युग से लेकर आज तक कई मुस्लिम कवियों ने भी दिवाली के इस रंगारंग त्यौहार परअपनी कलम चलाई है और अपनी बेहतरीन शायरी से इस त्यौहार की महिमा का बखान किया है। हिन्दुओं के त्यौहारों पर नजीर अकबराबादी ने जिस मस्ती से कलम चलाई है उसका कोई सानी नहीं है। प्रस्तुत है कुछ शायरों द्वारा दीपावली को लेकर लिखी गई कुछ यादगार शायरी।

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नवसृजन का पर्व है नवरात्रि

भारतीय वाङमय में हर दिन और हर समय काल का महत्व है। नवरात्रि का तो विशेष महत्व है, क्योंकि यह ऋतु परिवर्तन के साथ ही प्रकृति के नवसृजन का शुभारंभ भी है। नवरात्रि के प्रथम दिवस से ही संपूर्ण प्रकृति एक नई अंगड़ाई लेती है।�

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सुखद दांपत्य की कामना का पर्व है हरियाली तीज

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को श्रावणी तीज कहते हैं।

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