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Hindi Media - दृश्यम (हिंदी ड्रामा)
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दृश्यम (हिंदी ड्रामा)

दृश्यम (हिंदी ड्रामा)

दो टूक :  कोई कुछ भी कहे पर हालात आदमी से बड़े हो जाएँ तो फिर वो सही और गलत नहीं देखता। यही नहीं, अगर हालात उसके परिवार से जुड़े हों तो फिर तो वो और भी आगे बढ़ जाता है और इस बढ़त का कोई ओर छोर नहीं। अच्छा या बुरा कुछ भी। बस यही सन्देश देने की कोशिश करती है निर्देशक निशिकांत कामथ की अजय देवगन, श्रेया सरन, तब्बू, रजत कपूर, इशिता दत्ता और कमलेश सावंत की  मुख्य भूमिकाओं वाली फिल्म दृश्यम। 

कहानी : फिल्म की कहानी गोवा  में रहने वाले  विजय साल्गांवकर (अजय देवगन) नाम के एक केबल ऑपरेटर की है। फिल्में देखने का शौकीन विजय चौथी फेल है लेकिन अपने परिवार के लिए वो कुछ भी कर सकता है।  एक दिन विजय घर लौटता है तो देखता है कि उसकी पत्नी नंदिनी (श्रेया सरन), बड़ी बेटी मंजू (इशिता दत्ता) और छोटी बेटी अनु (मृणाल जाधव) बेहद परेशान  हैं। उसे पता चलता है कि नंदिनी और मंजू के हाथों एक लड़के सैम का कत्ल हो गया है।  विजय परिवार को बचाने के लिए हादसे  को नाटकीय  तरीके से बदलकर उसे एक ऐसा सच बना देता है जिस पर सब यकीन लेते हैं। लेकिन उसे अगले दिन पता चलता है कि सैम गोवा की आईजी मीरा देशमुख (तबू) का  बेटा है। यही नहीं, बीस  दिन से गायब अपने बेटे की तलाश में मीरा देशमुख  के साथ जब  विजय से ईर्ष्या रखने वाला इंस्पेक्टर गायतोंडे (कमलेश सावंत) भी शामिल हो जाता है तो विजय और उसका परिवार जाल में फंसता जाता है। विजय और उसका परिवार के इस जाल से निकलने  और खुद को साबित करने की कहानी है दृश्यम।  

गीत संगीत : फिल्म कोई भी गीत किसी चरित्र या पात्र को लेकर नहीं फिल्माया गया है लेकिन पाश्र्व में दम घटा है और क्या पता है जैसे ये गीत फिल्म  की गति को आगे बढ़ा देते हैं।  गुलजार के शब्द और विशाल भारद्वाज का संगीत हॉल से बहार आने के बाद याद नहीं रहता। 

अभिनय : फिल्म के केंद्र में अजय हैं और उनकी छवि के साथ उनका पात्र और चरित्र भी एकदम अलग है. अजय का पात्र खुला हुआ है लेकिन उसमे झल्लाहट नहीं है।  यही नहीं, वे अपने पात्र के आत्मकथ्य और प्रदर्शन को भी लाऊड नहीं करते। श्रेया सरन निराश नहीं करती पर उनके लिए  करने को बहुत ज्यादा कुछ नहीं  है।  जबकि उनसे जयादा इशिता दत्ता और मृणाल जाधव को अधिक महत्व के साथ प्रस्तुत किया गया है। गायतोंडे का पात्र कमलेश सावंत ने निभाया है लेकिन उनमे सदाशिव अमरापुरकर की छवि और प्रभाव दिखाई देता है। रजत कपूर बहुत दिन बाद दिखे लेकिन तब्बू के साथ उनकी कैमिस्ट्री गजब की है। अब बात तब्बू की बात। एक ग्रे शेड पुलिस अफसर की  भूमिका में दबंग तब्बू वर्दी और अपने बेटे को खोने वाली माँ दोनों की भूमिका में संतुलन बनाकर सामने आती है। एक सख्त दबंग महिला पुलिस अफसर इस से पहले फिल्मों में नहीं दिखी।  

निर्देशक : हिन्दी से पहले चार अलग-अलग भाषाओं में बन चुकी दृश्यम करीब दो  घंटे चालीस मिनट की फिल्म है। मूल फिल्म के लेखक जीतू जोसेफ की कहानी में उपेन्द्र सिध्ये ने हिंदी दर्शकों की रुचि का खयाल रखते हुए फिल्म को जो नया चेहरा दिया है वो निर्देशक निशिकांत कामत  की इस फिल्म को   देखने लायक बनाता है।  इसकी कई  वजह हैं।  इन वजहों में सबसे पहली वजह है अजय देवगन को जैसे एक्शन सितारे से विश्वसनीय, विवश और लाचार विजय सलगांवकर की तरह रचना और उसे ऐसा  विस्तार देना जो हमें उस  चरित्र की व्यथा और व्याकरण से भी सीधा जोड़ देता है.  निशिकांत कामत मराठी  के अभिनेता और निर्देशक हैं।  इसलिए उनकी  फिल्म में अधिकतर मराठी पात्र और चरित्र हैं  और परिवेश भी। पर वो किसी विशेष समुदाय को इंगित नहीं करते.  ये अलग बात है कि मलयालम, तेलगु, कन्नड़ और तमिल के बाद  हिंदी  में बनी दृश्यम कानून व्यवस्था के विरोध में भी खड़ी नही होतीं लेकिन  करारी चोट जरूर करती है।  फिल्म  की गति जरूर  धीमी है लेकिन आरिफ शेख के  संपादन और अविनाश अरुण के कैमरावर्क वाली ये  फिल्म एक  अद्भुत रोमांच और रहस्य के साथ जिज्ञासा बनाए रखने  वाली  फिल्म है।  

फिल्म क्यों देखे : अद्भुत जिज्ञासा वाली फिल्म है।  
फिल्म क्यों ना देखे : ऐसा मैं नहीं कहूँगा।  

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