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Hindi Media - गौर हरि दास्तान : द फ्रीडम फाइल (हिंदी ड्रामा)
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गौर हरि दास्तान : द फ्रीडम फाइल (हिंदी ड्रामा)

गौर हरि दास्तान : द फ्रीडम फाइल  (हिंदी ड्रामा)

दो टूक : कहते हैं हिंदुस्तान वो देश हैं जिसमे सही मायनों में स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में हिस्सा लेने वाले कहीं पीछे और उपेक्षित रह गए और देश ऐसे लोगों के पास चला गया जिन्हे उनके नाम तो क्या चेहरे भी याद नहीं। अभिनेता निर्देशक अनंत महादेवन की विनय पाठक, कोंकणा सेन शर्मा, रणवीर शौरी और तनिष्ठा चैटर्जी की भूमिका वाली फिल्म गौर हरि दास्तान भी एक ऐसे ही स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में हिस्सा लेने वाले सेनानी की है। 

कहानी : गौर हरि दास्तान : द फ्रीडम फाइल की कहानी स्वतंत्रता सेनानी गौर हरि दास (विनय पाठक ) के संघर्ष की कहानी  है। खादी क्राफ्ट में कार्यरत दास अपनी पत्नी लक्ष्मी दास (कोंकणा सेन शर्मा) और बेटे के साथ जिंदगी जी रहे हैं। उनकी परेशानी तब शुरू होती है जब उनके बेटे को फ्रीडम फाइटर सर्टिफिकेट यानी ताम्रपत्र न होने के चलते कॉलेज में एडमिशन नहीं मिलता। इसके बाद वे स्वतंत्रता  सेनानी का दर्जा पाने की जिद्दोजहद में लग जाते हैं। एक पत्रकार राजीव सिंघल (रणवीर शोरी) और उसकी दोस्त अनीता (तनिष्ठा मुखर्जी) उनकी मदद करते हैं। पर इस दर्जे को पाने के लिए उन्हें लगातार ३२  साल तक संघर्ष करना पड़ता है और आखिरकार ८४ साल की उम्र में उन्हें सर्टिफिकेट मिलता है. लेकिन  इस संघर्ष में उन्हें जो पीड़ा और अपमान झेलना पड़ता है, गौर हरि दास्तान : द फ्रीडम फाइल उसी दर्द की कहानी है।  फिल्म में दिव्या दत्ता, राहुल वोहरा, उपेन्द्र लिमये, परीक्षित साहनी, मुरली शर्मा, असरानी, सिद्धार्थ जाधव, नीना कुलकर्णी, विपिन शर्मा, विनय आप्टे, भारत दाभोलकर , सुरेन्द्र राजन, विक्रम गोखले, संदीप कुलकर्णी , विजु खोटे, अंचित कौर और अनंत महदेवन की भी छोटी छोटी भूमिकाएं हैं।  

गीत संगीत : फिल्म में कोई पारम्परिक गीत संगीत नहीं है लेकिन पाश्र्व में एल सुब्रह्मनियम का संगीत  कहानी और शिल्प में मदद करता है। 
अभिनय : फिल्म आप देखेंगे तो लगेगा जैसे बरसों पहले आई महेश भट्ट और अनुपम खेर की सारांश देख रहे हैं लेकिन उसमे और इसमें बहुत अंतर है। विनय पाठक का पात्र उन्होंने जिस तरह गढ़ा है वो अद्भुत व्याकरण और विस्तार वाला है। वो विचलित करता है और धैर्यशील होने के बाद भी कचोटता रहता है।  कोंकणा ठीक है।  उन्हें मौका मिला है लेकिन रणवीर शौरी, विक्रम गोखले, विनय आप्टे और सुरक्षा गार्ड बने भारत दाभोलकर के साथ नीना कुलकर्णी प्रभवित करते हैं।  मोहन कपूर और अंचित कपूर को व्यर्थ किया गया है। जबकि सिद्धार्थ जाधव, राजित कपूर के साथ दिव्या दत्ता, राहुल वोहरा, उपेन्द्र लिमये, परीक्षित साहनी, मुरली शर्मा, असरानी, विपिन शर्मा , विनय आप्टे, सुरेन्द्र राजन,संदीप कुलकर्णी और  विजु खोटे छोटे छोटे चरित्रों में हैं। 

निर्देशन : गौर हरि दास्तान  एक गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी की जीवनी है. लेकिन आजादी से पहले और आजाद देश में अपने हक के लिए जूझते लोगों के लिए ये एक उदासी भरा दस्तावेज है। गौर हरि दास्तान की कहानी मुंबई की है लेकिन लगभग दो घंटे की इस फिल्म में हम इसके कहानीकार सीपी सुरेंद्रन के जरिये देश भर में फैले उस दर्द को देखते हैं जो आज भी हमारे अंदर तैर रहा है।  फिल्म की गति धीमी है लेकिन उसका कथ्य और शैली अवसादित करती है तो हमारे अंदर तेजी से एक बेचैनी चहलकदमी करने लगती है।  अभिनेता निर्देशक अनंत महादेवन ने समय काल और अपने चरित्रों को रचने और गढ़ने में मेहनत की है और रंगों को ख्याल रखा है।  साथ ही छाया और प्रकाश भी फिल्म को गंभीर बनाता है।  खासतौर से फिल्म का अंत में ये संवाद , इन्हे पत्र दे दो लेकिन ताम्र का नहीं कागज़ का। ताम्र अब बहुत महंगा हो गया है। बस यही फिल्म  की सबसे बड़ी पीड़ा है। 

फिल्म क्यों देखें : एक मार्मिक फिल्म है। 
फिल्म  क्यों न देखें : अगर इसे सारांश से जोड़कर देखने जाएँ तो।  

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