A PHP Error was encountered

Severity: Notice

Message: Only variable references should be returned by reference

Filename: core/Common.php

Line Number: 257

Hindi Media - जाँनिसार (हिंदी पीरियड ड्रामा )
header-logo

जाँनिसार (हिंदी पीरियड ड्रामा )

जाँनिसार  (हिंदी पीरियड ड्रामा )

दो टूक : प्रेम किसी भी जमाने में हो। किसी से भी हो। उसकी तासीर कभी नहीं बदलती। फिर चाहे तफायफ हो या राजा। मुजफ्फर अली की गमन, आगमन और उमराव जान जैसी उल्लेखनीय फिल्मों के लगभग तीन दशक बाद आई इमरान अब्बास और पर्निया कुरैशी की  भूमिकाओं वाली फिल्म जाँनिसार भी  ऐसी ही कहानी है। फिल्म में मुज्जफर अली, दिलीप ताहिल, बीना काक, आबिद युनुस खान, कार्ल वार्टन, नेताली अर्केन , बेंजमिन कॉकलेय और मिथिलेश चतुर्वेदी की भी अहम भूमिकाएं हैं। 

कहानी : फिल्म की कहानी १८५७ के गदर के बाद के कुछ साल बाद की है।  अवध की रियासत के उत्तराधिकारी अमीर हैदर (इमरान अब्बास) को देश में चल रही आजादी की लड़ाई के द्वन्द से बचाने के लिए इंग्लैंड भेज दिया जाता है । जहाँ अंग्रेजी हुक्मरान मीर हैदर की सोच में भी अंग्रेजों की सोच पैदा करना चाहते हैं । लेकिन अमीर हैदर वापस लौटता है तो संयोग से उसकी मुलाकात नूर (पर्निया कुरैशी) से होती है, जो क्रांतिकारी विचारधारा की खूबसूरत तवायफ है। दोनों में प्रेम हो जाता है लेकिन नूर के लिए देश को अंग्रेजी शासन ने मुक्त कराने का जज्बा सबसे ऊपर है। इसके बाद शुरू होती है दोनों के प्रेम और देश प्रेम के साथ एक नयी मुहीम की शुरुआत। 

गीत संगीत : फिल्म में मुज्जफर अली और उस्ताद शफक़त अली खान का संगीत है और गीत लिखे हैं नवाब वाजिद अली शाह, राही मासूम रज़ा , नीर अलीफ के साथ दाग दहलवी ने।   अब उमराव जान और गमन के बाद इस फिल्म के गीतों में भी अली ने शास्त्रीयता और आरोह अवरोह का बहुत ख्याल रखा है और इसलिए श्रेया घोषाल, सुखविंदर सिंह, आबिदा प्रवीण, उस्ताद शफकत अली के साथ मालनी अवस्थी के गाये हमें भी प्यार कर ले जैसे गीत उमराव जान से प्रेरित तो हैं पर सुकून देते हैं। इसके साथ ही चम्पई रंग यार आ जाए ,सूफी ये बा सफा मनम माले भी बहुत शानदार लिखा गया है और गाया भी गया है। तेरी कटीली  निघाओं ने मारा, अये जुल्फे  परेशान, मसनद लूटी जाती है, हर तरफ अँधेरा है, तुमको आने में तुमको बुलाने में कई सावन बरस गए सजना और अच्छी सूरत पर जैसे  बोलों वाले गीत भी सुने जा सकते हैं. 

अभिनय : अब अगर हम मुजफ्फर अली की गमन, आगमन और उमराव जान जैसी फिल्मों से जानिसार की तुलना करेंगे तो निराश हो सकते हैं लेकिन उनसे जानिसार की तुलना बेमानी है। इमरान अब्बास और पर्निया कुरैशी कहानी में शामिल इतिहास के शिल्प को जीने में पूरी मेहनत करते हैं। मीर साहेब की भूमिका स्वयं मुजफ्फर अली ने निभाई है और वो  निराश नहीं करते। दिलीप ताहिल, बीना काक, आबिद युनुस खान , कार्ल वार्टन, नेताली अर्केन, बेंजमिन कॉकलेय और मिथिलेश चतुर्वेदी के हिस्से में आई  भूमिकाओं के आपने अपने अर्थ हैं और वो इतिहास के मद्देनजर अपने पात्र और चरित्र में खुद को विशेष तरजीह के साथ सामने लाते हैं।  

निर्देशन : दरअसल मुज्जफर अली इतिहास के झरोखों में प्रेम को शास्त्रीयता के साथ रचने में माहिर हैं और इस फिल्म में भी उनकी ये कोशिश दिखाई  देती है। फिल्म की कहानी में कुछ नयापन नहीं है लेकिन उसमे उमराव जान की छवि और दोहराव उसे धीमा कर देते हैं। फिल्म में कथक और ऐतिहासिक परिदृश्य उसे गाढ़ा बनाता है।  फिल्म में धूसर रंग,  मीरा अली के कॉस्ट्यूम, अवध का माहौल, युद्ध दृश्य और उर्दू भाषा का अद्भुत इस्तेमाल उसे गंभीरता देता है।  अब कुछ लोग इसे एक बीते समय की फिल्म माने पर ऐसा कैनवास भी आखिर कितने लोग रचते हैं। 

फिल्म क्यों देखें : गीत संगीत के साथ इतिहास के लिए। 
फिल्म क्यों न देखें : उमराव जान नहीं है ये जानिसार है जानी।  
-------------------

author