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चम्बल रिवर फ्रंट की लागत बढ़ कर हुई 700 करोड़

साहित्यकार चौक में लगेंगी देश के विख्यात साहित्यकारों की मूर्तियां–धारीवाल
वास्तुकार भरतिया ने किया बारीकी से निरीक्षण

कोटा। कोटा के ड्रीम प्रोजेक्ट चम्बल रिवर फ्रंट की लागत 500 करोड़ रुपये से बढ़ कर 700 करोड़ हो गई हैं। कोटा बैराज से लेकर नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने बताया कि हमारा प्रयास है कि यह देश में अपनी तरह का नायाब प्रोजेक्ट बनें। देश के ही नहीं वरन विश्व के सैलानी इसे देखने आएं। इसी दृष्टि से परियोजना के बन रहे घाट केवल बाढ़ नियंत्रण का ही कार्य नहीं करेंगे वरण उन्हें हेरिटेज लुक देते हुये बहुउपयोगी और आर्कषक बनाते हुए समाज और संस्कृति से जोड़ा जाएगा। यह फ्रंट गोमती एवं सावरमती नदियों के फ्रंट से अधिक आकर्षक होगा।

नगरीय विकास मंत्री ने बताया कि घाटों पर अब “साहित्य चौक” और पुस्तकालय को भी जोड़ा गया है। पुस्तकालय में साहित्यकारों की रचनाएं पढ़ने को मिलेंगी एवं साहित्य चौक में लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यकारों की मूर्तियां भी लगाई जाएंगी। योग एवं आध्यात्मिक चोक भी बनाया जाएगा। उन्होंने ने बताया कि चम्बल नदी के किनारे बैराज से लेकर नयापुरा पुलिया तक रिवर फ्रंट योजना में करीब 6 किलोमीटर में हेरिटेज लुक के साथ मुगल गार्डन की तर्ज पर खूबसूरत पर्यटक स्थल बनाया जाएगा। इस के बीच के नालो को डायवर्ट कर अलग से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बना कर उस मे डाला जाएगा।

धारीवाल के निर्देश पर शनिवार को प्रोजेक्ट के वास्तुकार अनूप भरतिया ने लंबे समय करीब 5 घंटे तक ओएसडी आर.डी. मीना ,मुख्य अभियंता ओ.पी.वर्मा एवं अन्य तकनीकी अधिकारियों के साथ चम्बल रिवर फ्रंट का बारीकी से निरीक्षण किया। विशेष रूप से बनाये जा रहे घाट के सम्बंध में विचार विमर्श कर इस पर किये जाने वाले कार्यों पर चर्चा की गई।

मुख्य अभियंता वर्मा ने बताया कि परियोजना का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। अभी यहाँ करीब 700 श्रमिक तेजी से कार्य कर रहे हैं। हमारा प्रयास यही है कि यह प्रोजेक्ट पूरी गुणवत्ता के साथ तय समय में पूरा हो।

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