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सेवा और समर्पण के प्रतीक पुरुष ः संजय लाठ

एक अच्छे कुल,संस्कार और स्वतंत्रतासंग्रामी परिवार में 6सितंबर को जन्मे मारवाडी सोसायटी,भुवनेश्वर के अध्यक्ष, श्री संजय लाठ एक निःस्वार्थ समाजसेवी हैं ।उनको पैतृक विरासत में जनसेवा, लोकसेवा, समाजसेवा और राष्ट्रसेवा की विरासत मिली है। श्री संजय लाठ को वास्तव में मां सरस्वती तथा मां लक्ष्मी दोनों का आशीर्वाद प्राप्त है। भुवनेश्वर, 253-ए, फारेस्टपार्क में स्थाई रुप से रहनेवाले श्री संजय लाठ बी.काम. आनर्स,एलडीसीपीए,एलएलबी.तथा एमबीए जैसी उच्च शिक्षाप्राप्त हैं। उनके दादाजी स्वर्गीय प्रह्लाद राय लाठजी ओडिशा के प्रथम मारवाडी स्वतंत्रता सेनानी रहे जिनको ओडिशा के वीरपुत्रों में से एकमात्र मारवाडी वीरपुत्र की उपाधि प्राप्त है। आज भी ओडिशा साहित्य समाज,कटक में लगी उनकी तस्वीर उनकी राष्ट्रसेवा का अमरता का पावन संदेश है।सेवा की प्रेरणा है।

स्व.प्रहलाद राय लाठ गांधीजी के नेतृत्व में भारत की आजादी में सहयोग दिये थे। जेल गये थे। मात्र 13 साल की उम्र में वे स्वतंत्रता संग्राम में कूदे थे। भारत छोडो आन्दोलन में हिस्सा लिये। बालसेवा समिति,हरिजन सेवा संघ तथा चरखा संघ से आजीवन जुडे। सम्बलपुर में 1944 में स्वतंत्रता सेनानी प्रभावती देवी के बाल निकेतन अनाथ आश्रम के निर्माण में प्रह्लादजी द्वारा स्वेच्छापूर्वक दिया गया एक लाख रुपये का सहयोग एक असाधारण सहयोग था। श्री संजय लाठ के पिताजी स्वर्गीय ओमप्रकाश लाठजी एक कुशल तथा सफल कोरोबारी थे। साथही साथ एक निःस्वार्थ समाजसेवी भी थे जो पण्डित श्रीराम शर्मा के अनन्य भक्त थे।

भुवनेश्वर मारवाडी पंचायत की स्थापना में उनका योगदान अतुलनीय था। भुवनेश्वर गायत्री-परिवार से वे आजीवन जुडे रहे। जनसेवा और समाजसेवा उनका विशेष शौक था। मारवाडी सोसायटी,भुवनेश्वर के दूसरी बार निर्विरोध अध्यक्ष बने श्री संजय लाठ 1984 से अपने आपको पेट्रोलियम रीटेलर व्यापार तथा 2007 से आटोमोबाईल ट्रेड से सक्रिय रुप से जोडे रखे हैं। भुवनेश्वर ,यूनिट-2,राजधानी सर्विस स्टेशन-डीलर्स-बीपीसीएल के पार्टनर हैं। श्री संजय लाठ अखिल भारतीय पेट्रोलियम डीलर्स संघ, नई दिल्ली के महासचिव हैं। उत्कल पेट्रोलियम डीलर्स संघ के महासचिव हैं। बीपीसीएल डीलर्स क्लब ओडिशा के चेयरमैन हैं।अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन,खोर्द्धा शाखा के वे प्रसिडेंट हैं।वे पब्लिक इन्टरेस्ट ओडिशा कैपिटल मार्केट और इन्टरप्राइजेज लिमिटेड के एक निदेशक हैं। ओडिशा राज्य कन्ज्यूमर प्रोटेक्शन काउंसिल के वे माननीय सदस्य हैं।

मारवाडीसोसायटी,भुवनेश्वर के अध्यक्ष,निःस्वार्थ समाजसेवी श्री संजय लाठ को सदा मैंने एक परोपकारी,कर्तव्यपरायण तथा संवेदनशील अध्यक्ष के रुप में ही पाया। उनका धीरज, सकारात्मक सोच तथा कार्यकरने की शैली अनुकरणीय लगी। श्री संजय लाठ समाज ही नहीं अपितु सभी बडे-बुजुर्गों का आदर-सम्मान करते हैं।सभी से प्रेम रखते हैं। कोरोना महामारी संकटकाल में पिछले लगभग ढाई सालों के दौरान मैंने उनको पूरी तरह से संतुलित तथा तनावमुक्त पाया। उनका यह कहना है कि कोरोना संकटकाल में उन्होंने व्यक्तिगत रुप से कीम्स के संस्थापक प्रोफेसर अच्युत सामंत का उचित मार्गदर्शन लिया तथा अपने निजी प्रयासों से मारवाडी समाज के कुछ कोरोना मरीजों का इलाज कीम्स में कराया जिसके लिए वे प्रोफेसर सामंत के प्रति आभारी हैं।

आज श्री संजय लाठ के जन्मदिन पर उनके विलक्षण व्यक्तित्व की कुछ खास बातों से सभी को अवगत कराना मैं अपना दायित्व समझता हूं। सच तो यह है कि श्री संजय लाठ हंसमुख,उदार तथा परोपकारी इन्सान हैं जिनके व्यक्तित्व की तीन खूबियां हैं। उनके प्रति आत्मीय श्रद्धा के तीन आधार हैं जैसाकि हिन्दी समालोचक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल भी अपने श्रद्धा शीर्षक लेख में कहते हैं। किसी भी व्यक्ति के प्रति श्रद्धा उसकी विलक्षण प्रतिभा,अनुकरणीय चरित्र तथा परोपकार के लिए संचित धन को लेकर होती है। श्री संजय लाठ के पास योग्यता भी है। प्रतिभा भी है तथा वे भाग्य-पुरुषार्थ के धनी भी हैं। सेवाभाव उनका शौक है।

वैश्विक महामारी कोरोना संकटकाल में मारवाडी सोसायटी भुवनेश्वर की ओर से उनका सभी को साथ लेकर चलना,सोसायटी के सभी सेवा प्रकल्पों को कारगर बनाने में सभी का सुझाव लेकर सामूहिक प्रयास करना आज उनको मारवाडी समाज भुवनेश्वर में एक विशेष स्थान पर प्रतिष्ठित कर दिया है। पिछले लगभग तीन सालों में पेट्रोल-डीजल के बढते दामों के समय टेलीविजन चैनलों पर उनके सुलझे विचारों को मैंने गौर से सुना जो मुझे बहुत अच्छा लगा।अपने जन्मदिन पर वे युवाशक्तिऔर मातृशक्ति को मजबूत बनाने तथा विभिन्न कौशल विकास प्रशिक्षण को अपनाने का संदेश दिया। मारवाडी सोसायटी,भुवनेश्वर के अध्यक्ष श्री संजय लाठ निज जीवन में,सामाजिक जीवन में और लोकजीवन में और अधिक संवेदनशील बनें,तेजस्वी बनें, यशस्वी बनें और सपरिवार शतायु बनें श्री जगन्नाथ भगवान के चरणों में मेरी यही प्रार्थना है।

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