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चित्रनगरी संवाद मंच में गांधी और शास्त्री पर एक सार्थक विमर्श

मुंबई।रविवार 2 अक्टूबर को चित्रनगरी संवाद मंच मुम्बई में गांधी जयंती और शास्त्री जयंती मनाई गई। केशव गोरे स्मारक ट्रस्ट, गोरेगांव में आयोजित इस कार्यक्रम में महात्मा गांधी पर दो नाटक लिखने वाले प्रतिष्ठित कथाकार असग़र वजाहत का एक लेख ‘गांधी जो नहीं कर सके’ देवमणि पाण्डेय ने प्रस्तुत किया गया। असग़र वजाहत के अनुसार “गांधी एक अद्भुत व्यक्ति थे। हमारे देश में जिन महानतम लोगों ने जन्म लिया है, गांधी उनमें से एक थे। अपने साहस, निर्भीकता, बुद्धिमत्ता, सत्य-अहिंसा और मानवता पर अटल विश्वास के कारण उन्होंने इतनी शक्ति अर्जित कर ली थी या लोगों ने उनको इतनी शक्ति दे दी थी कि वे अकेले देशव्यापी आंदोलन कर सकते थे। भारत के अंतिम गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने उन्हें ‘वन मैन आर्मी’ कहा था। माउंटबेटन का कहना था कि पंजाब में 30,000 की सेना हिंदू मुस्लिम दंगे नहीं रोक सकी लेकिन बंगाल में गांधी जी ने अकेले यह काम कर दिखाया। बहुत कम नेताओं में यह क्षमता, इतनी ताकत और साहस होता है की वे जन सैलाब के सामने खड़े हो सके। गांधी देश के अकेले नेता थे जिन्होंने ऐसा किया था।”

डॉ रवींद्र कात्यायन, सुभाष काबरा और हरगोविंद विश्वकर्मा ने इस चर्चा को आगे बढ़ाया। कथाकार सूरज प्रकाश द्वारा अनूदित महात्मा गांधी की आत्मकथा का एक अंश राजेश ऋतुपर्ण ने प्रस्तुत किया। उदयभानु सिंह ने लाल बहादुर शास्त्री के जीवन के कुछ प्रसंग साझा किए। इस आत्मीय चर्चा में गांधीजी के चरखे, चश्मे और उनकी बकरी तक की चर्चा हुई। वर्धा में उनके मिट्टी के घर और दक्षिण अफ्रीका के टॉलस्टॉय आश्रम तक का ज़िक्र हुआ। हिंदी के प्रसार में गांधी जी के प्रयासों को भी याद किया गया।

दूसरे सत्र में आयोजित काव्य संध्या में अभिजीत सिंह, पीयूष पराग, ज़ाकिर हुसैन, अनिकेत गिरि, दिनेश दीप, दिलीप आर्य, दिनेश बैसवारी बंशीधर शर्मा, राजेश ऋतुपर्ण, राजेन्द्र वर्मा और डॉ बनमाली चतुर्वेदी ने कविताएं सुनाईं। इस अवसर पर अभिनेता अविनाश प्रताप सिंह और हिन्दी मीडिया के संपादक चंद्रकांत जोशी विशेष रूप से उपस्थित थे।

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