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धर्मरक्षार्थ जूझता हुआ एक संत

आज देश की ज्वलंत समस्याओं की जड़ है बढती जनसँख्या। इसे नियंत्रित करने के लिए समस्त देशवासियों के लिये एक समान कठोर ‘जनसँख्या नियंत्रण कानून’ बनाने की सर्वाधिक आवश्यकता है। इसी सन्दर्भ में अखिल भारतीय संत परिषद के राष्ट्रीय संयोजक यति नरसिंहानंद सरस्वती जी एक नवम्बर 2018 से प्राचीन चंडी देवी मंदिर, डासना (गाज़ियाबाद) में आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं।

करोड़ों भारतवासियों के हितों की रक्षार्थ ये क्रांतिकारी संत वर्षों से भारतीय संस्कृति, अस्मिता व स्वाभिमान की रक्षार्थ सतत संघर्ष करते आ रहे हैं। लेकिन यह अत्यंत दुखद है की आज (15 नवम्बर) अनशन के पन्द्रहवें दिन भी हमारा शासन व प्रशासन सत्ता के मद में इतना अधिक व्यस्त है कि उन्हें एक संत के देश की ज्वलंत समस्यायों के समाधान के लिए किये जा रहे आमरण अनशन से कोई सरोकार नहीं ।

क्या यह उचित है कि हमारी सरकार व समाज केवल यह सोचे कि संत की भूमिका केवल एक कथावाचक बन कर अपना आश्रम विकसित करने तक ही सीमित रहनी चाहिए ? अगर ऐसा है तो यह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है। प्राचीन भारत का इतिहास ऐसे अनेक संतों, साधुओं व आचार्यों का परिचय कराता है जिन्होंने समय-समय पर राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षार्थ राजवंशों को भी सत्ताच्युत करने का साहस करा था।

निसंदेह हमारा देश सुनियोजित षड़यंत्र के अंतर्गत बढती हुई मुस्लिम जनसंख्या के कारण अनेक समस्याओं से जूझ रहा है। अगर यह कहा जाए कि यह समस्या हमारी राष्ट्रीय एकता और अखण्डता को तार-तार करने की ओर बढ़ रही है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। ऐसे में स्वामी नरसिंहानंद सरस्वती जी का “जनसँख्या नियंत्रण कानून” बनवाने का यह प्रयास अभूतपूर्व है। देश के विभिन्न क्षेत्रों के हजारों देशवासी प्रतिदिन स्वामी जी के अनशन स्थल चंडी देवी मंदिर, डासना (गाज़ियाबाद) पर पहुंच कर उनका अभिनन्दन कर उन्हें धन्य मान रहे हैं।

ऐसे में भारत के समस्त साधू समाज, राजनीतिज्ञों , बुद्धिजीवियों और राष्ट्रवादियों को क्रांतिकारी संत यति नरसिंहानंद जी के राष्ट्र रक्षार्थ किये जा रहे ‘आमरण अनशन’ पर सकारात्मक सहयोग कर के भारत सरकार को “जनसंख्या नियंत्रण कानून” बनाने के लिए विवश करना चाहिए। यह समस्त देशवासियों का सामूहिक दायित्व है और चिंतन का विषय भी कि एक संत जो हम सबके अस्तित्व की रक्षार्थ अपने प्राणों का बलिदान करने को आतुर है के अनमोल जीवन की रक्षा को कैसे संभव किया जाय।

भवदीय
विनोद कुमार सर्वोदय
(राष्ट्रवादी चिंतक व लेखक)
गाज़ियाबाद



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