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वाणी फ़ॉउण्डेशन द्वारा अनुवाद के लिए विशिष्ट पुरस्कार मलयाली कवि अत्तूर रवि वर्मा को

जयपुर। वाणी प्रकाशन और टीमवर्क आर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से विशिष्ट अनुवादक पुरस्कार प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार भारत के उन अनुवादकों को दिया जाता है जिन्होंने निरन्तर और कम से कम दो भारतीय भाषाओं के बीच साहित्यिक और भाषाई सम्बन्ध विकसित करने की दिशा में गुणात्मक योगदान दिया है| इस पुरस्कार की आवश्यकता इसलिए विशेष रूप से महसूस की जा रही थी क्योंकि वर्तमान स्थिति में दो भाषाओं के मध्य आदान-प्रदान को बढ़ावा देने वाले की स्थिति बहुत निम्न है| इसका उद्देश्य एक ओर अनुवादकों को भारत के इतिहास के मध्य भाषिक और साहित्यिक सम्बन्धों के आदान-प्रदान की पहचान के लिए प्रेरित करना है, दूसरी ओर, भारत की सशक्त परम्परा को वर्तमान और भविष्य के साथ जोड़ने के लिए प्रेरित करना है। यह पुरस्कार विशेष रूप से उन अनुवादकों को दिया जाता है जिन्होंने निरन्तर लेखन के माध्यम से साहित्यिक समृद्धि के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया है, यह पुरस्कार न केवल उनके लिए एक सार्वजनिक मंच तैयार करता है बल्कि उनके योगदान को रेखांकित करने के लिए 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि के साथ वाणी प्रकाशन सम्मान चित्र दिया जाता है।

इस पुरस्कार के सम्मानित निर्णायक मण्डल में नमिता गोखले, संस्थापक और सह-निदेशक, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल; नीता गुप्ता, निदेशक, जयपुर बुक मार्क और संदीप भुटोरिया, सांस्कृतिक आलोचक शामिल हैं।

निर्णायक मण्डल के साथ वाणी फ़ॉउण्डेशन के अध्यक्ष अरुण माहेश्वरी भी साहित्यिक अनुवाद में ख़ासी रूचि रखते हैं।

इस सम्मान के तहत वर्ष 2016 का प्रथम ‘डिस्टिंग्विश्ड ट्रांसलेटर अवार्ड’ मलयालम कवि श्री अत्तूर रवि वर्मा को प्रदान किया गया। वर्ष 2017 में यह पुरस्कार प्रख्यात अनुवादक, कवयित्री, लेखिका और आलोचक डॉ. अनामिका को दिया गया। वर्ष 2018 में सांस्कृतिक इतिहासज्ञ और अनुवादक डॉ. रीता कोठारी को इस पुरस्कार से नवाज़ा गया है।

वर्ष 2019 में यह पुरस्कार प्रख्यात कवि, कथाकार, अनुवादक और चित्रकार तेजी ग्रोवर को प्रदान किया जा रहा है।

पंजाब में जन्मी तेजी ग्रोवर के पाँच कविता संग्रह, एक कहानी संग्रह, एक उपन्यास, एक निबन्ध संग्रह और आधुनिक नोर्वीजी, स्वीडी, फ्रांसीसी साहित्य से तेरह पुस्तकाकार अनुवाद प्रकाशित हैं। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं – नीला (उपन्यास), अन्त की कुछ और कविताएँ, लो कहा सांबरी, दर्पण अभी काँच ही था (कविता संग्रह), घास ढँकी पगडण्डियाँ, बर्फ़ की ख़ुशबू (स्वीडी कविताएँ), दस समकालीन नोर्वीजी कहानियाँ तथा नीलाघर और दूसरी यात्राएँ। 2016-17 के दौरान Institute of Advanced Study, Nantes France फ़ेलोशिप में कविता और चित्रकला के अन्त:सम्बन्ध पर कार्य। अभी तक चित्रों की सात एकल और तीन समूह प्रदर्शनियाँ देश-विदेश में आयोजित।

भारत भूषण कविता पुरस्कार, रज़ा अवार्ड और वरिष्ठ कलाकारों हेतु राष्ट्रीय सांस्कृतिक फ़ेलोशिप।

कविताएँ देश-विदेश की तेरह भाषाओँ में और ‘नीला’ शीर्षक से एक उपन्यास और कुछ कहानियाँ पोलिश और अंग्रेजी में अनूदित।

2019 में यह पुरस्कार जयपुर बुक मार्क में 23 जनवरी 2019 को दिया जायेगा, जिसका निर्माण प्रतिष्ठित जयपुर साहित्यिक समारोह के सहयोग से किया गया है। तीन वर्ष पूर्व जयपुर बुक मार्क द्वारा जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल ने एक महत्त्वपूर्ण नयी पहल की है। जयपुर बुक मार्क की संकल्पना मूलतः पुस्तक व्यापार उपक्रम के रूप में की गयी है तथा यह JLF के समानान्तर और समीपवर्ती स्थान पर आयोजित किया जाता है, जिसके अन्तर्गत अनेक प्रकाशकों, साहित्यिक समूहों, लेखकों, अनुवाद से जुड़ी एजेंसियों के मध्य सम्बन्ध, व्यापार सम्बन्धी परिचर्चा के अवसर उपलब्ध करवाए जाते हैं| इसमें न केवल विश्व भर से आये वक्ताओं को सुनने का अवसर मिलता है, बल्कि कई बार आपसी सम्बन्धों के लिए संविदा भी तैयार की जाती है।

प्रत्येक वर्ष जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का विशिष्ट प्रयास होता है कि भारत की विभिन्न भाषाओं की प्रदर्शनी को सुनिश्चित करे जबकि इसका औद्योगिक पक्ष, जयपुर बुकमार्क, अनुवाद की कला और व्यापार पर केन्द्रित है| ठीक इसी प्रक्रिया का अनुपालन 2019 में भी किया जायेगा, जिसके अन्तर्गत 25 भाषाओं में पूरे देश में किये जाने वाले साहित्यिक अनुवाद और साथ ही वैश्विक अनुवाद के संरक्षण और विकास के लिए, भारतीय और वैश्विक कथाओं का सहारा लिया जायेगा।

वाणी प्रकाशन 56 वर्षों से 32 विधाओं से भी अधिक में, बेहतरीन हिन्दी साहित्य का प्रकाशन कर रहा है| इसने प्रिंट,इलेक्ट्रॉनिक और ऑडियो प्रारूप में 6,000 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित की हैं। देश के हज़ारों गाँव, 600 कस्बे, 54 मुख्य नगर और 12 मुख्य ऑनलाइन बुक स्टोर में उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई है। वाणी प्रकाशन भारत के प्रमुख पुस्तकालय प्रणालियों, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, ब्रिटेन और मध्य पूर्व, से भी जुड़ा हुआ है। वाणी प्रकाशन की सूची में, साहित्य अकादेमी से पुरस्कृत 32 पुस्तकें और लेखक, हिन्दी में अनूदित 9 नोबेल पुरस्कार विजेता और 24 अन्य प्रमुख पुरस्कृत लेखक और पुस्तकें शामिल हैं| संस्था को क्रमानुसार नेशनल लाइब्रेरी, स्वीडन, इंडोनेशियन लिटरेरी क्लब और रसियन सेंटर ऑफ़ आर्ट कल्चर तथा पोलिश सरकार द्वारा इंडो-स्वीडिश, रसियन और पोलिश लिटरेरी सांस्कृतिक विनिमय विकसित करने का गौरव प्राप्त है। वाणी प्रकाशन ने 2008 में भारतीय प्रकाशकों के संघ द्वारा प्रतिष्ठित ‘गण्यमान्य प्रकाशक पुरस्कार’ भी प्राप्त किया है। 51वीं वर्षगाँठ के मौक़े पर, ‘न हानि न लाभ’ के पक्ष में वाणी फ़ाण्डेशन की नींव रखी।

लन्दन में भारतीय उच्चायुक्त द्वारा 25 मार्च 2017 को ‘वातायन सम्मान’ तथा 28 मार्च 2017 को वाणी प्रकाशन के प्रबन्ध निदेशक व वाणी फ़ाउण्डेशन के चेयरमैन अरुण माहेश्वरी को ऑक्सफोर्ड बिज़नेस कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में ‘एक्सीलेंस इन बिज़नेस’ सम्मान से नवाज़ा गया। प्रकाशन की दुनिया में पहली बार हिन्दी प्रकाशन को इन दो पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। हिन्दी प्रकाशन के इतिहास में यह अभूतपूर्व घटना मानी जा रही है।

2014 में केन्द्रीय साहित्य अकादेमी में चयनित सदस्य, 3 मई 2017 को नयी दिल्ली के विज्ञान भवन में ‘64वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार समारोह’ में भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी के कर-कमलों द्वारा ‘स्वर्ण-कमल-2016’ पुरस्कार प्रकाशक वाणी प्रकाशन को प्रदान किया गया। भारतीय परिदृश्य में प्रकाशन जगत की बदलती हुई ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए वाणी प्रकाशन ने राजधानी के प्रमुख पुस्तक केन्द्र ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर के साथ सहयोग कर ‘लेखक से मिलिये’ में कई महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम-शृंखला का आयोजन किया और वर्ष 2014 से ‘हिन्दी महोत्सव’ का आयोजन सम्पन्न करता आ रहा है।

संलग्न :

प्रेस – विज्ञप्ति
पोस्टर – तेजी ग्रोवर
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