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हिंदी की हत्या पर टाईम्स समूह को आईना दिखाया एक जागरुक हिंदी प्रेमी ने

अभिनेता सैफ अली खान का साक्षात्कार हाल ही में एक वेबसाइट पर छपा है। बताया जाता है कि इस इंटरव्यू को अंग्रेजी वेबासइट से अनुवाद करके लगाया गया है। यहां तक तो ठीक है, लेकिन हिंदी में छपे इस इंटरव्यू में भाषा और व्याकरण की तमाम गलतियां हैं। ऐसे ही एक पाठक ने इन गलतियों के बारे में बताते हुए अपने विचार शेयर किए हैं। इन्हें आप यहां पढ़ सकते हैं।

‘आज के दौर की हिंदी पत्रकारिता में भाषाई शुद्धता की उम्मीद न के बराबर ही हो चली है। लेकिन पत्रकारिता के कुछ नामी ब्रैंड से अभी भी ये उम्मीद की जाती है कि वे भाषाई शुद्धता के स्तर का ध्यान जरूर रखेंगे। रोजमर्रा के कामों में हिंदी की गलतियां छूट जाना इतनी चिंताजनक बात अब नहीं रह गई है। लेकिन जब आपके सामने एक बड़ी सेलेब्रिटी का इंटरव्यू हो, तब ध्यान देना जरूरी हो जाता है।

ऐसा ही कुछ हुआ टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ। टाइम्स समूह के टाइम्स इंटरनेट का प्रोडक्ट है Mensxp। पिछले 10 सालों से यह वेबसाइट पुरुषों की लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर अंग्रेजी में काम कर रही है। हाल ही में हिंदी में इस वेबसाइट को शुरू किया गया है। मैं पिछले कई वर्षों से अंग्रेजी की इस वेबसाइट का पाठक रहा हूं। जब इसे हिंदी में शुरू करने की जानकारी मिली तो मन बहुत खुश हुआ। आखिर अपनी भाषा में कुछ पढ़ने का सुख अलग ही होता है।

Mensxp हर महीने किसी सेलिब्रिटी का इंटरव्यू डिजिटल कवर के तौर पर छापती है। इन सितारों में कई बड़े नाम शामिल हैं। मैं खुद इन डिजिटल कवर्स का फैन रहा हूं। हाल ही में आदित्य रॉय कपूर का इंटरव्यू मुझे इस वेबसाइट पर बहुत अच्छा लगा। पहले मैं इन इंटरव्यू को अंग्रेज़ी में पढ़ता था, लेकिन हिंदी की वेबसाइट शुरू होने के बाद कुछ कवर इंटरव्यू हिंदी में भी प्रकाशित किये गए।

अगस्त में वेबसाइट ने सैफ अली खान के ऊपर डिजिटल कवर निकाला है। वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार इसे अलशार ने लिखा है। हिंदी वेबसाइट में लेख के अंत में दी गई जानकारी के अनुसार अंग्रेजी के इसआर्टिकल का हिंदी अनुवाद किया है मृदुल राजपूत ने। लेकिन Mensxp की हिंदी वेबसाइट पर इस कवर को देखने के बाद यह अनुवाद असल में ट्रांसलेशन के नाम पर भाषाई आतंकवाद और हिंदी पट्टी में ही हिंदी की दुर्दशा का जीता-जागता प्रमाण दिखता है।

एक बड़े सुपरस्टार पर लिखे गए इस लेख में हिंदी की इतनी अनगिनत अशुद्धियां हैं कि पढ़ने वाला भी अपना माथा पीट ले। कई जगह सैफ अली खान को शैफ अली खान तक लिख दिया गया है। यहां तक कि अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद करते वक़्त अर्थ का अनर्थ भी कर दिया गया है। कई शब्द ऐसे हैं, जिनका कोई मतलब ही नहीं। लगता है अनुवाद करने वाले व्यक्ति ने गूगल ट्रांसलेट का उपयोग कम दुरुपयोग ज्यादा किया है। बेसिरपैर के हिंदी में अनुवाद किये गए इंटरव्यू को पता नहीं सैफ अली खान ने देखा होगा या नहीं। शायद नहीं ही देखा होगा, क्योंकि अगर देखेंगे तो शायद अपने इंटरव्यू की इस दुर्दशा को देखकर वो अंग्रेज़ी में भी कभी दोबारा Mensxp को इंटरव्यू नहीं देना चाहेंगे।

असल मे टाइम्स जैसे संस्थान जो मुख्यतः अंग्रेजी में काम करते हैं, उन्हें हिंदी के लेखकों के बारे में शायद ये जानकारी नहीं होगी कि हिंदी पट्टी के अधिकांश लेखक ढंग की हिंदी तक नहीं लिख पाते और अनुवाद तो खैर छोड़ ही दीजिये। हालांकि कई अखबार और कई वेबसाइट अपने लेख में हिंदी की कुछ गलतियां कर जाते हैं, लेकिन जिस तरह से इस इंटरव्यू को लिखा गया, वो बताता है कि कैसे हिंदी के लोग ही हिंदी की हत्या करने पर तुले हुए हैं। कम से कम टाइम्स जैसे संस्थानों से भाषाई शुद्धता की उम्मीद होनी चाहिए।’

साभार – https://www.samachar से

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