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स्पाइनल सर्जरी के बाद भी बुजुर्गों को चलने-फिरने लायक बनाना सम्भव

फोर्टिस अस्पताल, नोएडा के डाॅक्टरों ने सत्तर साल से अधिक उम्र के मरीज़ों को भी स्पाइनल सर्जरी के लिहाज से उपयुक्त साबित किया!

बिस्तर पर सिमट चुके मरीज़ ने चलना-फिरना शुरू किया, अब छड़ी मुक्त और पीड़ा मुक्त जीवन की आशा का हुआ संचार जीवन की गुणवत्ता बेहतर!

नोएडा। फोर्टिस अस्पताल, नोएडा ने यह सफलतापूर्वक साबित कर दिखाया है कि स्पाइनल सर्जरी के बाद बुजर्गाें को छड़ी के सहारे चलने-फिरने लायक बनाया जा सकता है। हालांकि अभी अभी तक यह माना जाता रहा है कि स्पाइनल सर्जरी वृद्धावस्था में चुनौतीपूर्ण हो सकती है लेकिन यह भी एक भ्रामक धारणा ही साबित हुआ है कि बुजुर्गोें की इस प्रकार की शल्यचिकित्सा नहीं की जा सकती है और ऐसा करने पर उनके लकवाग्रस्त होने की आशंका बढ़ जाती है। लेकिन अस्पताल हर महीने करीब 20 ऐसे मामलों में सफल सर्जरी करता आ रहा है। इस टीम का नेतृत्व डाॅ. राहुल गुप्ता, सीनियर कन्सल्टैंट, न्यूरोसर्जरी विभाग करते हैं।
इस सर्जरी से जुड़ी जानकारी देने एवम् मीडिया से रूबरू होने के उद्देश्य से नोएडा सैक्टर 62 स्थित फोर्टिस अस्पताल में एक प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। जहां डाॅ राहुल गुप्ता एवम् गगल सहगल ने पत्रकारों को सम्बोधित किया।
वार्ता में बताया गया कि 84 वर्ष की श्रीमति शिंगरी देवी पीठ में तेज दर्द की वजह से बिस्तर तक सिमटकर रह गई थीं। जांच से पता चला कि वे डिजेनेरेटिव स्पाइन रोग की शिकार हैं जिसमें नर्व कम्प्रेशन भी है। डिजेनरेटिव डिस्क रोग में लिगामेंट और ज्वाइंट्स कमजोर पड़ जाते हैं जिसकी वजह से मेरूदंड या मेरूदंड में मौजूद स्नायु-तंतु मुड़ जाते हैं। इस प्रकार डिस्क क्वालिटी के लगातार बिगड़ने से कई बार मेरूदंड की संरचना भी प्रभावित होती है जिससे स्नायुओं पर दबाव पड़ता है और नतीजन मरीज़ को दर्द होता है और उसके चलने-फिरने की क्षमता भी जाती रहती है। मरीज की मल्टीपल लैवल डीकम्प्रेशन और फिक्सेशन सर्जरी की गई। कुछ ही दिनों में वे अपने पैरों पर खड़ी हो गई और एक महीने बाद छड़ी के सहारे तेजी से चलने-फिरने लगी तथा बिना किसी सहारे के सीढ़ी पर भी चढ़ने-उतरने लगी थीं।
उधर, 74 वर्षीय डाॅ विनोद तलवार गंभीर किस्म के डिजेनेरेटिव स्पाइन रोग से ग्रस्त थे और वे 100 मीटर चलने पर भी पीठ और पैर में तेज दर्द से कराह उठते थे। उनकी जांच करने पर लंबर स्पाइन फ्रैक्चर तथा नर्व कम्प्रेशन की वजह से अस्थिरता सामने आयी। इस प्रकार की स्थिति कैसे पैदा होती है, इसका कोई एक कारण नहीं है। बैठने के गलत तरीके, वज़न अधिक होने की वजह से मेरूदंड पर अत्यधिक दबाव और आॅस्टियोपोरोसिस आदि इसकी वजह होते हैं। मरीज़ के स्नायुओ को डीकम्पे्रस करने तथा मेरूदंड को सीधा करने के लिए एक सर्जरी की गई। सर्जरी के दो दिन बाद ही मरीज़ खुद चलने फिरने में सक्षम हो गए और छह सप्ताह के बाद वे सामान्य हो गए हैं।
71 साल के तुषारकांती दत्ता को भी पीठ तथा पैरों में लंबे समय से और काफी दर्द की शिकायत रहती थी। उन्हें भी डिजेनेरेटिव स्पाइन और कम्प्रेशन का मरीज़ घोषित किया गया। उनके मामले में मिनीमैली इन्वेसिव अर्थात् कीहोल सर्जरी की गई और स्नायुओं को डीकम्प्रेस किया गया तथा मिनीमैली इन्वेसिव स्क्रू एव राॅड लगायी गई। सर्जरी के कुछ ही हफ्तों के भीतर वे चलने लगे हैं।

डाॅ राहुल गुप्ता, सीनियर कन्सल्टैंट, न्यूरोसर्जरी विभाग का कहना है, ‘यह भ्रामक ही है कि स्पाइन सर्जरी कराने से लकवा हो सकता है। सच तो यह है कि ऐसे 95 प्रतिशत से अधिक मामलों में सफलता मिली है और अधिकांश मरीज तेजी से सामान्य हुए हैं। विशेषज्ञ से स्पाइन सर्जरी कराने पर 1 फीसदी से भी कम मामलों में जटिलता की गुंजाइश होती है। उन्नत उपकरणों और टैक्नालाॅजी, आॅपरेटिंग माइक्रोस्कोप तथा अनुभवी न्यूरोसर्जरी टीम की उपलब्धा के चलते फोर्टिस नोएडा स्पाइन विकारों से पीडि़त अनेक मरीज़ों का सफलतापूर्वक उपचार कर चुका है। हमारे पास स्पाइन मरीजों की सर्जरी के लिए विशेष आॅपरेटिंग टेबल भी है और हम सर्जरी के दौरान नर्व माॅनीटरिंग तथा न्यूरो नेवीगेशन तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं।’

श्री गगन सहगल, जोनल डायरेक्टर, फोर्टिस अस्पताल, नोएडा का कहना है, ‘‘बुजुर्गावस्था अपने आप में एक चुनौति होता है। और ऐसे में अगर मेरूदंड में दर्द भी होने लगे तो हालात काफी मुश्किल हो जाते हैं जो न सिर्फ उसे सहने वाले मरीज के लिए बल्कि उनकी देखभाल करने वाले परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी कठिन परिस्थितियां पैदा करते हैं। हमारे डाॅक्टर मरीजों के लिए लगातार नए और बेहतर इलाज के विकल्पों को उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत रहते हैं। अब बुजुर्गों के लिए इस नई उम्मीद की किरण दिखायी देने से वे पीड़ा रहित और दूसरों पर बोझ बने बगैर खुशहाल जीवन जी सकते हैं।
फोर्टिस अस्पताल नोएडा के पास ऐसे हजारों मामलों का सफल इलाज करने का लम्बा अनुभव है जो मेरूदंड के रोगों से ग्रस्त थे। अस्पताल में इस प्रकार के जटिल मामलों के सफल इलाज के लिए सभी प्रकार के आवश्यक साधन उपलब्ध हैं। विशेष उपकरणों की मदद से मिनीमैली इन्वेसिव स्पाइन सर्जरी की जा सकती है जो आस पास के बाॅडी टिश्यू को कम से कम नुकसान पहुंचाती है। इसका परिणाम यह होता है कि सर्जरी के बाद मरीज़ जल्दी चलने-फिरने लगता है और शीघ्र स्वास्थ्यलाभ भी कर पाता है।
आधुनिक समाज में मेरूदंड के रोग काफी आम हो गए हैं और ऐसा माना जाता है कि डिजेनेरेशन की वजह से, खासतौर से इंटरवर्टिब्रल डिस्क (डिस्कोपैथी) या फिर आसपास की वर्टिब्रल बाॅडी (स्पाॅन्डीलाॅसिस) की वजह से ऐसा होता है। उम्र बढ़ने के साथ, एक बड़र आबादी में डिस्कोपैथी या स्पाॅन्डीलाॅसिस के लक्षण दिखाई देने लगते हैं जिसकी वजह से आमतौर पर स्पाइन के लंबर क्षेत्र में स्पाइनल कैनाल बनने लगती है। अध्ययनों से पला चला है कि सर्वाइकल ओर लंगर आॅपरेशन अब आम होते जा रहे हैं। भारत में सर्वाइकल स्पाइन के आॅपरेशन के मामले काफी बढ़े हैं। इसका अर्थ यह है कि न्यूरोसर्जनों और आॅर्थोपिडिक सर्जनों के लिए सर्वाइकल स्पाइनल स्टेनाॅसिस काफी महत्वपूर्ण है। जीवनशैली संबंधी आदतें, एकल परिवार और बुजुर्ग अभिभावकों से दूर रह रहे बच्चों की वजह से वृद्ध पीढ़ी पर दबाव और तनाव बढ़ता है। इस प्रकार की स्थितियों से निपटने के लिए नियमित शारीरिक व्यायाम, सैर, संतुलित भोजन और सेहतमंद जीवन पद्धति जरूरी है। नियमित रूप से कैल्शियम और विटामिन डी का आवश्यक मात्रा में सेवन और धूम्रपान तथा अत्यधिक शराब के सेवन से बचने से इस प्रकार के रोग से बचा जा सकता है।
फोर्टिस हैल्थकेयर लिमिटेड के बारे में

फोर्टिस हैल्थकेयर लिमिटेड भारत में अग्रणी एकीकृत स्वास्थ्य सेवा प्रदाता है। कंपनी की स्वास्थ्य सेवाओं में अस्पतालों के अलावा डायग्नाॅस्टिक एवं डे केयर स्पेश्यलिटी सेवाएं शामिल हैं। फिलहाल कंपनी भारत समेत दुबई, माॅरीशस और श्रीलंका में 54 हैल्थकेयर सुविधाओं (इनमें वे परियोजनाएं भी शामिल हैं जिन पर फिलहाल काम चल रहा है), करीब 10,000 संभावित बिस्तरों और 283 डायग्नाॅस्टिक केंद्रों का संचालन कर रही है।
अधिक जानकारी हेतु सम्पर्क करें;

विद्या पवन कपूरः 91 9899996189

शैलेश नेवटियाः 91 9716549754

टिटूराजः 91 9871918187

शर्मिष्ठा घोषः 91 9891859626

जाॅय श्रीसैकियाः़91 9711972019

प्रीति सहरावतः 91 9711170599

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