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अहमद पटेल चुनाव जीत गए थे और इंदिरा गांधी चुनाव हार गई थी

नई दिल्ली: कांग्रेस के चाणक्य कहे जाने वाले अहमद पटेल (Ahmed Patel) का निधन हो गया है. पिछले एक महीने से वो अस्पताल में भर्ती थे. उन्हें कोरोना का संक्रमण हुआ था और बाद में उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था. अहमद पटेल गांधी परिवार (Gandhi Family) के अलावा कांग्रेस पार्टी के सबसे खास सदस्य थे और पिछले 19 सालों से कांग्रेस पार्टी को अपनी चतुराई से संभाले हुए थे.

अहमद पटेल ने नगरपालिका परिषद से राजनीति की शुरुआत की. और देखते ही देखते वो कांग्रेस पार्टी की सर्वेसर्वा इंदिरा गांधी की नजर में आ गए. इंदिरा गांधी की नजर में उनका आना एक इत्तेफाक ही था, क्योंकि 1977 के जिस आम चुनाव में कांग्रेस की करारी पराजय हुई थी, उस चुनाव में अहमद पटेल भरूच सीट से जीते थे. जबकि खुद इंदिरा गांधी अपनी सीट गवां बैठी थी.

अहमद पटेल ने संसद में 8 बार गुजरात का प्रतिनिधित्व किया है. तीन बार लोकसभा सांसद की हैसियत से, तो 5 बार राज्यसभा सांसद की हैसियत से. अहमद पटेल ने कांग्रेस पार्टी में हर अहम जिम्मेदारी उठाई. कांग्रेस पार्टी तो गुजरात में बेहद मजबूत किया और यूथ कांग्रेस को पूरे देश में सांगठनिक तौर पर खड़ा किया. आज कांग्रेस में जो भी पुराने नेता दिखते हैं, इत्तेफाक से उनमें से कई यूथ कांग्रेस से निकलकर आए हैं. अहमद पटेल कांग्रेस पार्टी के महासचिव से लेकर कोषाध्यक्ष तक रहे.वो 1977 से 1982 तक पटेल गुजरात यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष रहे. साल 1991 में जब पटेल को कांग्रेस वर्किंग कमेटी का सदस्य बनाया गया, जो वे जीवनपर्यन्त बने रहे.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पार्टी के कोषाध्यक्ष एवं सोनिया गांधी के राजनैतिक सलाहकार अहमद पटेल के निधन पर पूर्व केंद्रीय मंत्री मोतीलाल वोरा ने गहरी संवेदना प्रकट की है। उन्होंने कहा कि अहमद पटेल का निधन देश एवं कांग्रेस के अलावा उनके लिए व्यक्तिगत क्षति है। ऐसे कर्मठ रणनीतिकार, सुलझे हुए व्यक्तित्व एवं जनता की सेवा में अपनी पूरी जिंदगी न्यौछावर करने वाले नेता के चले जाने से देश की राजनीति में जो शून्य उत्पन्न हुआ है उसकी भरपाई करना आसान नहीं। कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने में उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता । श्री वोरा ने अपने व्यक्तिगत संबंधों को याद करते हुए कहा कि एक लंबे अरसे तक उन्होंने श्री पटेल के साथ काम किया है जिस दौरान कभी भी श्री पटेल में ऊर्जा की कमी नहीं देखी। गुजरात कांग्रेस से राजनीति की शुरुवात करते हुए अपने सद्कर्मों एवं सेवा भावना से वे सदैव आगे बढ़ते रहे । ईमानदारी एवं पार्टी के प्रति कर्तव्य परायणता की वे एक मिसाल हैं। यूपीए के शासन के दौरान उन्होंने सोनिया जी के साथ मिलकर एलायंस को एक सूत्र में पिरोए रखने में प्रमुख भूमिका निभाई। श्री वोरा ने शोक संतप्त परिवार को शक्ति देने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

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