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विज्ञापन में एअरटेल के झूठे दावे

साल 2016 में भी भारती एयरटेल के ओपन नेटवर्क वाले विज्ञापन पर सवाल उठाए गए थे, जिसमें कंपनी ने दावा किया था कि वह पूरे नेटवर्क को सार्वजनिक करने वाली पहली कंपनी है, लिहाजा सबसे अच्छी है
विज्ञापन पर दूरसंचार ऑपरेटर भारती एयरटेल के साथ भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) की रस्साकशी नई नहीं है। शुक्रवार को देश के सर्वोच्च नियामक ने ग्राहक आधार पर देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी को फास्टेस्ट नेटवर्क का दावा करने वाले अपने विज्ञापन में सुधार लाने को कहा है। यह तीसरा मौका है जब एएससीआई ने भारतीय एयरटेल को विज्ञापन में सुधार करने को कहा है।

साल 2015 के विज्ञापन अभियान में एयरटेल ने दावा किया था कि उसका 4जी नेटवर्क अब तक का सबसे तेज गति वाला नेटवर्क है। इसने यह भी कहा था कि अगर किसी प्रतिस्पर्धी का नेटवर्क इससे ज्यादा तेज गति से चले तो वह पूरी जिंदगी मोबाइल बिल मुफ्त देने के लिए तैयार है। एएससीआई ने पहले विज्ञापन पर शिकायत मिलने के बाद भारती एयरटेल को नोटिस भेजा था, लेकिन इस बार प्रतिस्पर्धी रिलायंस जियो इन्फोकॉम ने इस विज्ञापन के खिलाफ एएससीआई को पत्र लिखा है।

शिकायत में रिलायंस जियो ने कहा था कि एयरटेल का मौजूदा विज्ञापन भ्रामक है और इसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। विज्ञापन में एयरटेल ने दावा किया है कि नेटवर्क टेस्टिंग एजेंसी ओकला एलएलसी के नतीजे के आधार पर यह आधिकारिक तौर पर देश का सबसे तेज गति वाला नेटवर्क है।

आदेश में एएससीआई ने कहा है कि विज्ञापन ने निकाय की विज्ञापन संहिता और डिस्क्लेमर के उपबंधों पर दिशानिर्देश का उल्लंघन किया है। एएससीआई ने कहा है, हमने विज्ञापनदाता को 11 अप्रैल तक इसमें उचित सुधार लाने या इसे वापस लेने की सलाह दी है।

एक ओर जहां एएससीआई के फैसले का एयरटेल ने विरोध किया है और कहा है कि वह नियामक से सहमत नहीं है, वहीं ओकला अपने नतीजे को सही बता रही है। एयरटेल इस आदेश के खिलाफ अपील कर सकती है, जो संकेत देता है कि अभी इस मसले पर पर्दा गिरा नहीं है।

साभार- http://hindi.business-standard.com से



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