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अक्षरवनम्-एक गुरूकुल ऐसा भी…।

हैदराबाद शहर से 85 किलोमीटर की दूरी पर गाँव कल्वाकुर्ती ,नागरकर्नूल जिले के तेलंगाना प्रदेश में स्थित एक ऐसा गुरूकुल जो हमारी शिक्षा परंपरा के त्रेता और व्दापर युग की याद दिलाता है ।आज जहाँ सरकारी शिक्षा का व्यव्साय गाजर घास की तरह स्वाध्यायी संस्थानों के हाथो की कठपुतली बनकर हमारे समाज के मूलतः मध्यवर्गीय व निम्मवर्गीय परिवारों के लिए शिक्षा के सभी संस्थानों पाठशाला, कालेज,कोंचिग सेंटर केवल और केवल पैसा बनाने की मशीन मे बच्चों के भविष्य के साथ पालकों ,अभिभावको की आर्थिक विपन्नता की ओर ठकेलते हुए इसको इतना अधिक खर्चीला बना दीमक की तरह खोखला करते जा रहा है पर इस शिक्षा की आवश्कता के कारण अपने बच्चों को मजबूर होकर इन खर्चीले संस्थानो में दाखिला दिलवा रहे है ।एक तबका जो इससे वंचित रह रोजी रोटी का संघर्ष देख रहा है ।

इसके साथ सूदूर गाँवों के स्कूलों में शिक्षा के गिरते स्तरों के कारण इस ओर कुछ लोगों का घ्यान गया, इसी के तहत 2005 में वंदेमातरम के शताब्दी वर्ष में तेलंगाना के वरंगल शहर में एक संगठन वंदेमातरम् का गठन हुआ।संगठन प्रमुख संस्थापक श्रीमान रविन्द्रा तक्कालपल्ली जी,अध्यक्ष-डा.जी.भानुप्रकाश रेड्डी जी, रिसर्च प्रमुख श्रीमान श्रीपत्ती विप्पुला जी ,कोषाध्यक्ष-श्रीमान राम कुमार चिलीकुरी जी और सचीव-श्रीमान वाई-माधव रेड्डी जी कुल पाँच लोगों का प्रयास ।इसकी एक शाखा वरंगल में भी है । .उसी के तहत शिक्षा के लिए कुछ नये प्रयोग अपने पुरानी पध्दतियों के नये स्वरूप के साथ इस संस्थान अक्षरवनम् शिक्षा से वंचित जरूरतमंद ही नहीं सभी के लिए इसे तैयार किया है ।मेरी हैदराबाद की यात्रा के दौरान इस संस्था के सचीव व इस अक्षरवनम् के संरक्षक श्रीमान वाई माधव रेड्डी जी के सहयोग से मुझे देखने का सौभाग्य मिला । इस संस्था का मूल उद्देश बच्चों को नि-शुल्क गुणवतापूर्ण और सदाचार-पूर्ण शिक्षा के साथ-साथ अपने पैरों पर खडा करने में भी सहायक हो ।

 

 

इस जगह वंदेमातरम फाउंडेशन व्दारा एक रिसर्च केन्द्र का निर्माण वर्ष 2015 में किया इसके(12) बारह एकड जमीन पर(3) तीन एकड में संस्थान के विभिन्न निर्माण कार्य हुए है ।जिसमें छात्र-छात्राओं के रहने के लिए स्थान,शिक्षण के लिए आवश्यकता अनुसार कमरे आदि ।इस जगह पर वर्तमान में 80 (55-छात्र-25-छात्राएँ)8 वर्ष से 18 वर्ष तक के बच्चे रहते हैं । इनकी देख-रेख आदि के लिए कुछ स्वयं सेवक गाँव के लोग जो इनके शिक्षण आदि में मदद करते है । इसके सरंक्षक आदरणीय माधव रेड्डी जी के अनुसार यहाँ अनाथ बच्चे और कुछ अन्य बड़े परिवारों के बच्चे भी स्वेच्छा से रहते है ।शिक्षण का माध्यम तेलुगू और अंग्रेजी है ,हिंदी एक भाषा के रूप में पढ़ते है। स्वामी विवेकानंद जी के विचारों को मजबूत करते हुए ‘’’ हम ऐसी शिक्षा चाहते है ,जिसमें चरित्र का निर्माण ,मस्तिष्क की क्षमता में वृध्दि हो ,ज्ञान का विस्तार हो जिससे सभी अपने कदमें में खडे हो सके ।’’’

इस जगह पर बच्चे स्वयं ही अपने सभी साथियों का भोजन बनाते है ।यहाँ पर जो संसाधन उपलब्ध है बच्चे यहाँ खेती-किसानी, गौशाला(25 गाँयें है .उनकी देख रेख) बागवानी (साग-सब्जियाँ उगाना), वेल्डिग,.बिजली का काम, बढाई का काम आदि सीखते है,साथ ही कंप्युटर जैसे वर्तमान संयत्र भी इनकी शिक्षा को धारधार बनाने में सहयोग करते है । सारे परिसर की सफाई की जिम्मेदारी इन्हीं बच्चों पर होती है ।फलों के सब्जियों के पेड पौधे भी इन्ही के सरंक्षण में है । यहाँ पर कोई शिक्षक नही है ।शौचालय के रखरखाव सफाई आदि का जिम्मा भी इन्हीं बच्चों का होता है ।अनुशासन के दृष्टिकोण से सभी बहुत अनुशासित उनकी जिम्मेदारी का हमेशा समझते है और संस्था के सिध्दांत के तहत “ हमारी पाठशाला, हमारा गाँव और हमारी देश ” देश का भविष्य कक्षाकमरे में । हर सप्ताह बारी बारी से निश्चित माप-दण्डों के साथ आहार बनाने की दिम्मेदारी इन्हें 5 लोगों की एक टीम बनाकर जिम्मेदारी सौपीं जाती है ।यहाँ पर रसोईघर बहुत ही महत्वपूर्ण प्रयोगशाला है ।इस स्थान पर हर तरह के खेलकूद की सामाग्री भी उपलब्ध है ।

यहाँ पर दो प्रकार की सरल परीक्षाएँ होती है ।शिक्षण के लिए इस संस्था के रिसर्च केन्द्र ने तीन मूल मंत्र दिए है ,LLL-LANGUAGE –LOGIC- LIFE SKILL भाषा-तर्क-और जीवन के लिए उपयोगी क्षमताएँ ।बच्चों को यहाँ के रिसर्च केन्द्र राष्ट्रीय शिक्षण प्रणालियों के साथ तारतम्य भी करते रहते है । जिसके आधार पर अगली कक्षा में पहुँचाया जाता है (.MNS –MINIMUM NUMERICAL SKILL—न्यूनतम आंकिक क्षमता) तीन भाग होते है क-ख-ग 30-50 और 40 अंक (MLA-MINIMUM LEARNING(LOGIC) ABILITY-न्यूनतम सीखने(तर्क)क्षमता )इसके भी दो भाग होते है क-ख 30 और 50 अंक ।इस परीक्षा को जो लिखने वाला वहीं जाँचने वाला भी होता है ।

(SELF LEARNING-SELF EVALUTION & SELF REPORTING )स्वयं सीखिए,स्वयं जाँचिए और स्वयं रिपोर्ट करीए। कक्षाएँ नहीं होती जिसे जहाँ जिसके साथ बैठकर पढना है पढता है ,जब चाहे जो करें बीना शर्त के (UNCONDITIONAL) ।भाषा का सीखना-सवयं सीखना पडता है ।तर्क-आपस में साथ बैठकर (PEER LEARNING)..जीवन के लिए उपयोगी क्षमताएं –(LIFE SKILL )-करके सीखना learning by doing । अंत में 10 वीं व 12 वीं कक्षा की परीक्षा में स्वाध्यायी छात्र के रूप में बिठाकर बच्चों के भवि,य का निर्माण करते है ।

इस जगह को देश के कई स्थानों से शिक्षक प्रशिक्षण के लिए आते है इस जगह पहुँचना कुछ कठिन है आते समय कष्ट जरूर होता है पर जाते समय अपने सात यहाँ की ऐसी अविस्मरणीय यादें लेकर जाते है ।मैं भी बार बार यहाँ आना चाहूँगा इस स्थान का पता व इस स्थान के मोबाईल क्रंमाक निम्मनानुसार है ।जो भी इस स्थान के विषय में जानकारी चाहते है, प्राप्त कर सकते है ।

VANDEMATRAM-FOUNDATION ,AKSHARA-VANAM, KALWURTHY , NAGARKURNOOL –DISTRICT_ TELANGANA— STATE-

MoNo-9440788282 & 9030444688

(लेखक लिंगम चिरंजीव राव आंध्रप्रदेश में रहते हैं व हिंदी सेवी, हिंदी में साहित्य लेखन में रुचि रखते हैं)

 

 

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