ताजा सामाचार

आप यहाँ है :

अली बाबा का तिलस्म

एक व्यापारी मर कर ऊपर पहुंचा। वहां उसकी मुलकात, पाप-पुण्य का हिसाब-किताब रखने वाले चित्रगुप्त से हुई। उन्हें यह तय करना था कि उसे स्वर्ग भेजा जाए अथवा नरक। चित्रगुप्त ने जब उसका खाता देखा तो पाया कि पाप, पुण्य का टाई हो गया, दोनों बराबर थे। एक और वह धंधे के सामान में मिलावट करता था, कम तौलता था ओर वहीं दूसरी और काफी दान-पुण्य करता था। उसने अनेक गौशालाएं, धर्मंशालाए बनवाई थी।

अतः उसका रिकार्ड देखकर चित्रगुप्त ने उसे कहा कि तुम्हारा पाप-पुण्य का हिसाब किताब बराबर है। तुम पहले कहा जाना चाहोगे? इस पर वह मुस्कुराते हुए बोला कि साहब जहां दो पैसे का धंधा हो वहीं भेज दो। हाल में जब चीन के सबसे बड़े व अमीर व्यक्ति जैक मा द्वारा सुअरो का धंधा कर अरबों कमाने की खबर आई तो वह घटना याद आ गई। कम्युनिस्ट देश में पैदा होने व खुद वामपंथी होने के बाद इस व्यापारी ने पैसा कमाने के तमाम रिकार्ड तोड़ दिए।

जैक मा तो चीन का अंबानी, अडानी हे। उनकी दौलत 39 खरब डॉलर आंकी गई है। वे वहां के सबसे अमीर इंसान हैं। उन्होंने अली बाबा कंपनी की स्थापना की थी जोकि एक बहुत बड़ी ई-कामर्स कंपनी है। चीन का यह बहुत बड़ा व्यापार जगत का सम्राट 10 सितंबर 1964 को पैदा हुआ था। वह वहां का जाना-माना व्यापारी ही नहीं दानी नेता है। अली बाबा नामक अंतर्राष्ट्रीय समूह की स्थापना करने वाला यह वामपंथी शुरू से बाजारवाद की अर्थव्यवस्था के खिलाफ रहा है। हालांकि आज उसके कारण ही फलफूल रहा है।

उसकी गिनती दुनिया के 20 सबसे असरदार नेताओं में की जाती है व उसे चीन का व्यापारिक राजदूत कहा जाता है। जिसे स्टार्ट-अप, ई-व्यापार की सफल कहानी माना जाता है। उसे चीन में इस व्यापार का रोल मॉडल माना जाता है। चीन के हांगजू इलाके में पैदा हुए इस 56 वर्षीय व्यापारी को बचपन से ही अंग्रेजी पढ़ने का बहुत शौक था। उसने अपनी अंग्रेजी अच्छी करने के लिए डॉगजू इंटरनेशनल में पर्यटको के साथ अनुवादक का काम करने वाले एक कर्मचारी से संपर्क किया।

उसे यह भाषा सीखने का इतना ज्यादा शौक था कि वह अपने घर से साईकिल पर 70 किलोमीटर का रास्ता तय करके वहां ठहरने वाले पर्यटको से अंग्रेजी में बात करने के लिए जाता था। उसने नौ साल तक यह सिलसिला जारी रखा। उसके अनेक विदेशी परिचित बन गए व उन्हीं में से एक ने उसे जैक नाम दिया क्योंकि उसका चेग नाम बोलने में उसे बहुत तकलीफ होती थी। बाद में उसे कालेज में दाखिला लेने में बहुत दिक्कते आई क्योंकि दाखिला परीक्षा साल में एक बार ही होती थी व वह लगातार तीन साल उसमें फेल होता गया।

उसने 1988 में अंग्रेजी में बीए किया और अपनी सक्रियता के कारण कालेज की छात्र परिषद का अध्यक्ष बना। उसने हारवर्ड बिजनेस स्कूल में दाखिला लेने की 10 बार कोशिशें की मगर उसे हर बार ठुकरा दिया गया। अंततः वह हांगजू विश्वविद्यालय में अंग्रेजी का प्राध्यापक बन गया। मा किसी भी ऐसे युवक के लिए आदर्श बन सकता है जिसने किसी नौकरी की परीक्षा को ठुकरा दिया गया है। मा के अनुसार उसने 30 बार अलग-अलग नौकरियो के लिए आवेदन किया और हर बार उसे ठुकरा दिया गया। मगर उसने अपनी हिम्मत नहीं हारी।

इंटरव्यू लेने वाले उससे कह देते कि तुम इस काम के लिए उपयुक्त नहीं हो। जब उसके शहर में केएफसी खुला तो वह अन्य 23 लोगों के साथ वहीं इंटरव्यू के लिए गया। उनमें से उसके सिवा सभी 23 लोगों का चयन हो गया। मगर उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने 1994 में पहली बार इंटरनेट के बारे में सुना और उससे इतना ज्यादा प्रभावित हुआ कि उसने हांगजू हबीबो इंटरनेट कंपनी शुरू कर दी। वह ज्यादा जानकारी लेने के लिए अमेरिका गया वहां उसके चीनी दोस्तो ने काफी मदद की।

वहां जब उसने विभिन्न स्रोतो पर भालू के बारे में जानकारी एकत्र की तो उसने पाया कि चीनी भालू के बारे में कहीं कोई जानकारी ही नहीं थी। उसे बहुत आश्चर्य हुआ और उसने अपने दोस्तो की मदद से चीन के बारे में वेबसाईट तैयार की। उसने सुबह 9-40 पर इसे शुरू किया व 12-30 दोपहर तक उसे चीन से निवेशकों के ई-मेल मिलने शुरू हो गए। जिसमें उन्होंने उसके इस प्रयास में निवेश करने की इच्छा जताई थी। अप्रैल 1995 में जैक मा कंप्यूटर शिक्षक ही मिबबिंग ने अपनी पहली चीनी वेबसाईट का दफ्तर वहां खोला। महज तीन साल में उन्होंने 8 लाख अमेरिकी डालर के बराबर रकम जुटा ली।

वह चीनी कंपनियों के लिए वेबसाईट बनाने लगा। उसने साढ़े तीन साल में अपने दोस्तो की मदद से इस क्षेत्र में जबरदस्त सफलता हासिल करते हुए चीन में इंटरनेट को काफी लोकप्रिय बना दिया। उसने 33 साल की उम्र में पहली बार कंप्यूटर खरीदा। उसने 1999 में अपने 18 दोस्तों व चंद लाख डालर की रकम की मदद से अली बाबा ई-मार्केट कंपनी की स्थापना की। बस फिर क्या था उसकी इस कंपनी से विदेशों से पैसा लगाने वालो के प्रस्ताव आने लगे। वह 2014 में अलीबाबा कंपनी का शेयर लाया। न्यूयार्क स्टॉक एक्सचेंज में उसका 25 अरब डालर का खुला।

उसने 2017 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर उनसे अमेरिका में उसकी कंपनी द्वारा 50 लाख नौकरिया पैदा करने की बात की। अगले साल उसने अली बाबा कंपनी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उसने जैक मा फाउंडेशन की स्थापना की है। इसके जरिए वह शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेक जन-योजनाएं चलाता है। हाल ही में उसने नकली बुद्धिमदता के जरिए अपना सुअरो का धंधा शुरू किया है। आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस के जरिए वह अपने सुअरो की शक्ल व आकार से उनकी तबियत का हाल पता लगा लेता है। उसे क्या चाहिए, यह सेवा लोगों को उपलब्ध करवाता है। इसकी मदद से सुअर फार्म के लोग ज्यादा स्वस्थ व खुश रहकर अपना धंधा बढ़ा रहे है। मालूम हो कि पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा सुअर फार्म चीन में ही है। वह न केवल खुद उनका उपयोग करता हे व कई अमेरिकी व यूरोप को भी उनका निर्यात करता है। सुअर भले ही हिंदू व मुसलमान दोनों के लिए धृणास्पद माना जाता हो मगर वह जैक मा के लिए तो सोना देने वाली मुर्गी साबित हो रहे है। वे कम खाकर ज्यादा मौटे होकर उसकी जेंबे भर रहे हैं।

विवेक सक्सेना वरिष्ठ पत्रकार व संतंभकार हैं और https://www.nayaindia.com/ में नियंित कॉलम लिखते हैं।

साभार-https://www.nayaindia.com/ से

image_pdfimage_print


सम्बंधित लेख
 

Back to Top