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जाँच के घेरे में तीनों खान

यह अनायास नहीं है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला बॉलीवुड में ड्रग्स के चलन से लेकर हीरो-हीरोइनों के खातों की जांच, दुबई कनेक्शन और बाहरी-भीतरी की वजह से होने वाले कथित भेदभाव की जांच में परिवर्तित है। सुशांत सिंह आत्महत्या की या किसी साजिश के तहत उनको आत्महत्या के लिए उकसाया गया या सीधे उनकी हत्या कर दी गई, इसकी जांच के लिए सीबीआई को जिम्मा दिया गया था। लेकिन अब इस मामले में ईडी की भी जांच चल रही है और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो भी जांच कर रहा है।अगर भाजपा के सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी की अपील मानी गई और या उस पर ध्यान दिया गया तो वह दिन दूर नहीं है, जब इस आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच करने वाली देश की इकलौती एजेंसी, एनआईए को भी जांच में शामिल कर लिया जाए। डॉक्टर स्वामी मानते हैं कि इस पूरे मामले में दुबई का कनेक्शन है और उसकी जांच एनआईए ही कर सकती है।

जिन लोगों ने एक फिल्म अभिनेता की मौत की जांच में तीन केंद्रीय एजेंसियों को लगाया है उन्होंने जरूर स्वामी की बात को नोट कर लिया होगा और सही समय पर एनआईए भी जांच में उतरेगी। उसके जांच में आने से पहले ही पूरे विवाद को और बाकी एजेंसियों की जांच को एक खास दिशा देने का प्रयास चल रहा है। तभी यह भी अनायास नहीं है कि सुशांत सिंह राजपूत को न्याय दिलाने के लिए मैदान में उतरीं कंगना रनौत ने अपने खिलाफ राज्य सरकार की ओर से हुई हर कार्रवाई को हिंदू-मुस्लिम का एंगल दिया। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोला और जवाबी कार्रवाई में जब बीएमसी ने उनके दफ्तर का छज्जा तोड़ा तो उन्होंने कहा कि मुंबई अब पाक अधिकृत कश्मीर की तरह हो गया है। पीओके का प्रतीक अनायास नहीं था। उन्होंने अपना छज्जा तोड़े जाने को राम मंदिर टूटने जैसा बताया और यह भी कहा कि बॉलीवुड मुसलमानों के कब्जे में है। इससे एक तरह का छद्म विमर्श खड़ा किया गया, जिसके जरिए देश के लोगों को आसानी से बहकाया जा सकता है। वैसे भी देश के सभी 138 करोड़ लोगों को बहकाने की जरूरत भी नहीं है। सिर्फ 25-30 करोड़ लोगों को बहकाना है और वह काम बॉलीवुड की सफाई, उसे इस्लामी जिहादियों से मुक्त कराने या देशभक्त फिल्मकारों को न्याय दिलाने के नाम पर आसानी से हो जाएगा।

शुरुआत छद्म विमर्श के जरिए कंगना रनौत के बयानों से है बाकी काम एजेंसियां कर रही हैं। सुशांत सिंह राजपूत की मौत हत्या है या आत्महत्या यह मामला अब पीछे चला गया है। अब ड्रग्स इस्तेमाल की जांच हो रही है और एक-एक करके फिल्म उद्योग के तमाम बड़े नाम इसके दायरे में आते जा रहे हैं। छोटे-छोटे अभिनेता-अभिनेत्रियों से पूछताछ के आधार पर कुछ ड्रग पैडलर्स और कुछ सप्लायर पकड़े गए और उनसे पूछताछ के बाद एनसीबी का हाथ सीधे देश की सबसे बड़ी हीरोइन दीपिका पदुकोण तक पहुंच गया। वैसे कई लोग कह रहे हैं, जिस दिन वे जेएनयू में चल रहे छात्र आंदोलन को समर्थन देने वहां पहुंची थीं, उसी दिन यह तय हो गया था कि इनका ‘इंसाफ’ होगा। अब उसकी शुरुआत हो गई है। सोचें, वे हिंदी फिल्मों की सबसे मशहूर और सफल अभिनेत्री हैं, फिल्म और विज्ञापन जगत का कोई छह सौ करोड़ रुपया उनके ऊपर दांव पर है। वे राष्ट्रीय आईकॉन रहे प्रकाश पदुकोण की बेटी हैं। पर तीन साल पहले किसी व्हाट्सएप ग्रुप में ‘माल’ का शब्द, चर्चा की वजह से आरोपी बनी हैं।

उनसे पूछताछ के तुरंत बाद एनसीबी के अधिकारियों के हवाले खबर लीक हुई कि दीपिका और दो अन्य अभिनेत्रियों के खातों की जांच होगी। क्या एजेंसी उनको ड्रग नेटवर्क का हिस्सा मान रही है? खातों की जांच के साथ दूसरी खबर यह आई कि दीपिका के साथ काम कर चुके कुछ अभिनेताओं को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। दीपिका की पहली फिल्म से ही उनके साथ काम कर रहे शाहरूख खान का नाम सबसे पहले आया। इस तरह एक खान ड्रग्स मामले में जल्दी ही घिरने वाले हैं। उन्हें घेरना आसान इसलिए भी होगा क्योंकि वे क्रिकेट तमाशे यानी आईपीएल की फ्रेंचाइजी के मालिक भी हैं। कोलकाता नाइटराइडर्स उनकी क्रिकेट टीम है। सो, ड्रग्स के साथ साथ दुबई कनेक्शन, बाहरी निवेश, पैसों की कथित हेरा-फेरी जैसे कई मामले उनके खिलाफ बन सकते हैं। वैसे भी सोशल मीडिया में बड़ी संख्या में मौजूद ट्रोल किसी न किसी बहाने से उनका पाकिस्तान कनेक्शन भी बताते रहे हैं। वे अपनी फिल्मों के नाम की वजह से किंग खान, बादशाह खान आदि के नाम से जाने जाते हैं और अमिताभ बच्चन के बाद हिंदी फिल्मों पर सबसे ज्यादा समय उनका वर्चस्व रहा है। सो, खान पहचान की वजह से उन पर शिकंजा कसता है तो करोड़ों लोग परपीड़ा का सुख लेने वाले होंगे।

अभी तक आमिर खान का नाम किसी ने नहीं लिया है पर वह महज वक्त की बात है। किसी भी समय कोई भी आरोपी उनका नाम ले सकते है। देशभक्त वैसे ही उनसे खुन्नस में हैं। वे अपनी फिल्म की शूटिंग के लिए पिछले दिनों तुर्की गए तो वहां उन्होंने राष्ट्रपति एर्दोआन की पत्नी से मुलाकात की। अब चूंकि तुर्की का रुख भारत विरोधी है सो, आमिर खान भारत विरोधी मान लिए गए हैं। उन्होंने मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल के समय चारों तरफ हो रही मॉब लिंचिंग के समय अपनी पत्नी किरन राव के हवाले कहा था कि अब भारत में रहने में डर लगता है। तब भी वे हिंदुओं के निशाने पर आए थे। तभी बड़ी संख्या में लोग इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि कब तक जांच उन तक पहुंचती है।

लेखक नया इंडिया के संपादक हैं

 

 

 

 

 

साभार- https://www.nayaindia.com/से

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