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आम संग्रहालयों से अलग व अनूठा है राष्ट्रपति भवन का कला संग्रहालय

राष्ट्रपति भवन संग्रहालय भारतीय स्वतंत्रता, लोकतंत्र और एकता का प्रतीक है। संग्रहालय से कला, वास्तुकला तथा जीवंत समुदाय के दर्शन होंगे तथा भारत के राष्ट्रपतियों के जीवन की जानकारी मिलेगी। राष्ट्रपतियों को मिले उपहार शिल्पकृतियों के अतिरिक्त, संग्रहालय के संग्रह में अस्त्र-शस्त्र, फर्नीचर, प्रतिमाएं, वस्त्र, छायाचित्र, पुरालेखीय सामग्री आदि वस्तुएं शामिल हैं। संग्रहालय से, एक विरासत ढांचे, पूर्व अस्तबल तथा कोच हाऊस का संरक्षण किया गया और इन्हें शानदार अत्याधुनिक संग्रहालय में बदल दिया गया। संग्रहालय के द्वारों और खिड़कियों पर अभी भी अश्व नाल के प्रतिरूप हैं। वास्तव में प्रत्येक प्ररदर्शन को आकर्षक ढंग से एक एन्क्लेव में तब्दील किया गया है तथा उपहारों और कलाकृतियों से सुसज्जित किया गया है।

संग्रहालय में ऐसे 22 एन्क्लेव हैं। संग्रहालय को तीन गलियारों में विभाजित किया गया है, बायां गलियारा, लम्बा कक्ष तथा दायां गलियारा। उपहार और चित्र बाएं और दाएं गलियारों में दर्शाए गए हैं जबकि लम्बा गलियारा आगे जाकर तीन हिस्सों, युद्ध दृश्य वीथिका, फर्नीचर वीथिका तथा राष्ट्रपति अंगरक्षक वीथिका में बंट जाता है। गलियारों के अतिरिक्त, प्रदर्शन वस्तुओं के लिए एक कोच हाऊस तथा विशेष कक्ष है।

संग्रहालय के एन्क्लेव में कोरिया गणराज्य के महामहिम राष्ट्रपति श्री रोह-मू-ह्यू द्वारा राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम को भेंट किया गया स्वर्ण चोन्मा चोंग मुकुट के साथ-साथ भारत के विभिन्न राष्ट्रपतियों द्वारा प्राप्त कुछ शानदार उपहार प्रदर्शित किए गए हैं। अमरीकी राष्ट्रपति विलियम जे. क्लिंटन द्वारा राष्ट्रपति के.आर. नारायणन को भेंट किया गया व्हाइट हाऊस का एक चित्र तथा डॉ. राजेंद्र प्रसाद के उकेरे हुए चित्र वाला अनूठा ब्ल्यू कट जार भी अन्य वस्तुओं के साथ यहां प्रदर्शित किया गया है। वर्ष 2006 में, राष्ट्रपति अब्दुल कलाम को भेंट की गई बहरीन में पायी गई दिलमुन मुद्रा के साथ एशियानेट न्यूज द्वारा राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी को भेंट की गई पुष्पदार सुंदर चांदी की सुराही प्रदर्शित की गई है। यह अमूल्य उपहार भारत और बहरीन के बीच प्राचीन सम्बन्धों का प्रमाण है। वर्ष 1990 में लंदन की राजकीय यात्रा के दौरान राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन को महारानी एलिजाबेथ और राजकुमार फिलिप द्वारा भेंट किया गया चांदी के कटोरे तथा जापान के महामहिम सम्राट और साम्राज्ञी द्वारा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भेंट किया गया, बीच में स्वर्ण रंग के पुष्पदार प्रतिरूप वाले धातु के फूलदान को संग्रहालय के शेल्फों में स्थान दिया गया है।

सिमोन शोन की एक हाथी पर अफ्रीकी महाद्वीप की द्विआयामी कृति वाला आभूषण कला का एक सुन्दर नमूना भी इस एन्क्लेव में प्रदर्शित किया गया है। आकलैंड के प्रथम अर्ल (1836-1842) भारत के गवर्नर जनरल जॉर्ज ईडन की बहन एमिली ईडन का उत्कीर्णित चित्र और ड्राइंग तथा कागज पर आलोक सेन का जल रंग चित्र कुछ ऐसे नमूनों में से हैं,प्रदर्शित किए गए हैं। राष्ट्रपति ध्वज जो राष्ट्रीय चिह्न सहित चार तहों से बना है, एक हाथी, एक तुला और कमल भी यहां प्रदर्शित किया गया है। वे क्रमश: शक्ति; न्याय और समानता; सम्मान और बंधुत्व; शांति और समृद्धि प्रस्तुत करते हैं। यह ध्वज वर्ष 1971 तक राष्ट्रपति भवन के मुख्य गुंबद पर फहराया जाता था, इसके बाद इसका स्थान तिरंगे ध्वज ने ले लिया दर्शनीय है। यहां हंगरी के राजदूत द्वारा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भेंट की गई फेरेन्क पुस्कास द्वारा हस्ताक्षरित एक फुटबाल भी रखी गई है। बीचों-बीच मुंबई विश्वविद्यालय का एक मॉडल प्रदर्शित किया गया है जिसे 2012 में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भेंट किया गया था।

राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन को भेंट की गई उत्तर मलाई मंदिर की सॉपस्टोन प्रतिकृति तथा संगीतमय स्तंभ—सचिंद्रम मंदिर की पत्थर की प्रतिकृति, निर्वाण मंदिर पावापुरी की प्रतिकृति के साथ यहां प्रदर्शित की गई है। इस खंड के चित्रों में सास ब्रूनर का मुदेरा का सूर्य मंदिर तथा सुजीतदास का दुशांबे का लेटे हुए बुद्ध शामिल हैं। संगमरमर की पुष्पदार पैटर्न वाली दो प्लेटें भी यहां प्रदर्शित की गई हैं। राष्ट्रपतियों को प्राप्त धार्मिक उपहार दायीं ओर की दीवार पर स्वर्ण पत्र के बने साई बाबा, एक मयूर और देवी दुर्गा के जबकि बायीं ओर की दीवार पर भगवान गणेश के 24 कैरेट के द्विआयामी चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। रजत वर्ण की सांची स्तूप की प्रतिकृति भी प्रदर्शित की गई है।विभिन्न अवसरों पर भारत सरकार द्वारा जारी स्मारक डाक टिकटों को फ्रेम करवाकर यहां प्रदर्शित किया गया है। भारत के माननीय राष्ट्रपतियों द्वारा लोकार्पित कुछ विशेष प्रकाशन भी शामिल है।

लम्बा कक्ष
लम्बे कक्ष का प्रथम खण्ड, युद्ध दृश्य वीथिका देश के इतिहास का दर्शन करता है जिसके अंतर्गत एंग्लो-सिख और एंग्लो-अफगान युद्धों में प्रयोग किए गए पुराने अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शित किए गए हैं। इन पुरातन वस्तुओं को युद्ध दृश्यों को पुन:गढ़ने के लिए कथावाचक की आधुनिक दृश्य श्रव्य तकनीकों के साथ जोड़कर कलात्मक ढंग से प्रयोग किया गया है। फर्नीचर वीथिका है जिसमें मॉर्निंग रूम, येलो ड्राइंग रूम, साऊथ ड्राइंग रूम, राष्ट्रपति अध्ययन कक्ष तथा एडीसी कक्ष जैसे राष्ट्रपति भवन के राजकीय कक्षों की चुनिंदा फर्नीचर कृतियां प्रदर्शित की गई हैं। इस वीथिका में वीरता और आदर्श वाक्यों के पूर्ण विवरण के साथ यूनाइटेड किंग्डम के रॉयल कोर्ट ऑफ आर्म्स प्रदर्शित किए गए हैं। डिजीटल सतह पर बातचीत के रूप में प्रश्नोत्तर दर्शकों की सूचना और मनोरंजन के लिए इस खण्ड में प्रदर्शित किए गए हैं।

राष्ट्रपति अंगरक्षक वीथिका में 1773 में स्थापित राष्ट्रपति अंगरक्षक भारतीय सेना की सबसे पुरानी और वरिष्ठ रेजीमेंट है। इस वीथिका में रजत तूर्य और ध्वज हैं जो भारतीय राष्ट्रपतियों द्वारा सिल्वर ट्रम्पेट बैनर प्रदान करने के लिए प्रयोग किए गए हैं। ध्यान से देखने पर हमारे माननीय राष्ट्रपतियों के देवनागरी लिपि में कढ़े हुए आद्यक्षर देखे जा सकते है। अंगरक्षकों की ग्रीष्म और शीत ऋतुओं की समारोहिक पोशाक भी प्रदर्शित की गई है। वर्ष1930 से प्रयोग की जा रही एक कमांडर चेयर को भी अब प्रदर्शन के लिए रखा गया है।

दायां गलियारा
यहां एडविन लुट्येन्स द्वारा बनाई गई गवर्नमेंट हाऊस की मूल ड्राइंग और उनके द्वारा जारी मूल पत्र इस एन्क्लेव में प्रदर्शन करने के लिए रखे गए हैं। ड्राइंग में कुर्सियां, बिस्तर, जालीदार टांगों वाली मेज, सोफे के ब्योरे, विशाल बुक केस कैबिनेट आदि भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, इस एन्क्लेव में सर लुट्येन्स की आवक्ष प्रतिमा भी प्रदर्शित की गई है।सर एडविन लुट्येन्स और उनके सहयोगी हर्बर बेकर द्वारा राष्ट्रपति भवन के बनाए गए रेखाचित्र और ड्राइंग का प्रदर्शन किया गया है। उन्होंने भवन की आंतरिक सज्जा की अपनी संकल्पना और विचारों को व्यक्त किया है। इसके अतिरिक्त, भारत के माननीय राष्ट्रपतियों के उपहार के तौर पर प्राप्त सिरामिक और चीनी मिट्टी का सामान भी देखने के लिए रखा गया है।

राष्ट्रपति भवन के बाहरी ढांचे के डिजायन से संबंधित एडविन लुटियन और हरबर्ट बेकर द्वारा निर्मित पांच महत्त्वपूर्ण चित्र यहां प्रदर्शित किए गए हैं। इंडिया गेट का चित्र दोनों ने मिलकर बनाया था। विलियम लुकेर जूनियर द्वारा भारतीय सिपाही पर जल रंग पेंटिंग है। अंग्रेज कलाकारों द्वारा निर्मित शिकार के अनेक दृश्यों की नक्काशियां, अश्म लेख तथा चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। अमृतसर, पंजाब में महाराजा शेरे सिंह की सायंकालीन घुड़सवारी यहां प्रदर्शित एक महत्त्वपूर्ण अश्म लेख प्रदर्शित है। यहां भारतीय राष्ट्रपतियों को भेंट किए गए गणमान्यजनों के हस्ताक्षर युक्त छायाचित्र हैं। हम बर्मा के लॉर्ड माउंटबेटन, लेडी एडविना माउंटबेटन, महारानी एलिजाबेथ, राजकुमार फिलिप, जापान के सम्राट और साम्राज्ञी, राजकुमार चार्ल्स और कैमिलिया, स्पेन के नरेश जुआन कार्लोस-I, संयुक्त राज्य अमरीका के राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी, श्रीलंका की प्रधानमंत्री श्रीमती एस. भंडारनायके आदि के छायाचित्र देख सकते हैं।

थॉमस डेनियल, जे.एफ. एटकिंसन की ताजमहल और जामा मस्जिद सहित दिल्ली और आगरा के स्मारकों को प्रदर्शित करने वाली नक्काशियां और अश्मलेख कृतियां प्रदर्शित की गई हैं। कुम्बुला आई अफ्रीका जिसका अर्थ है ‘अफ्रीका को याद रखना’ कही जाने वाली काष्ठ से बने जनजातीय शतरंज एक अनूठा उपहार है जिसे यहां प्रदर्शित किया गया है। राष्ट्रपतियों को भेंट किए गए जलयान और नौकाओं की प्रतिकृतियां यहां प्रदर्शन के लिए रखी गई हैं। लौंग निर्मित जलयान का एक मॉडल इस एन्क्लेव का एक प्रमुख आकर्षण है। यह इंडोनेशिया के राष्ट्रपति, डॉ. सुकर्णो ने भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भेंट किया था।

यहां बारीक नक्काशी वाला हाथीदांत है। इसके अलावा, राष्ट्रपति भवन में पाई गई विभिन्न नक्काशियां, अश्ममुद्र , प्राचीन सिक्के,तथा छायाचित्र भी यहां प्रदर्शित किए गए हैं।
संग्रहालय के आखिर में करीबसौ वर्ष पुराना चालू हालत में एक पियानो प्रदर्शित किया गया है।

विशेष कक्ष
संग्रहालय इमारत के चारों ओर चार गुंबद हैं। उनके नीचे संग्रहालय कार्यालय, नियंत्रण कक्ष, वीआईपी कक्ष तथा प्रदर्शित वस्तुओं के लिए विशेष कक्ष हैं। विशेष कक्ष में कुछ अनूठी वस्तुएं प्रदर्शित किए जाने से यह सबसे रोचक है।

गोल कक्ष के बीच में अफगानिस्तान की एक मेज है जो डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भेंट की गई थी। इस मेज की अनोखी बात यह है कि इसके पत्थरों को छूने से वे रंग बदलने लगते हैं।
भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किए गए सैन्य, असैन्य और खेल के वास्तविक पुरस्कार यहां प्रदर्शित किए गए हैं। इस कक्ष की अन्य प्रदर्शित वस्तुओं में एक राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम को भेंट की गई धूप घड़ी और एक होलोग्राम है। इस कक्ष की सबसे आकर्षक वस्तुओं में विश्व के सबसे ऊंचे शिखर माउंट एवरेस्ट तथा चन्द्रमा से लाए गए पत्थर हैं। माउंट एवरेस्ट का पत्थर वर्ष 1953 में श्री तेनजिंग नोर्गे द्वारा डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भेंट किया गया था जबकि माउंट एवरेस्ट का दूसरा पत्थर वर्ष 1984 में शिखर पर पहुंचने वाली भारत की प्रथम भारतीय महिला बचेंद्रीपाल ने राष्ट्रपति श्री ज्ञानी जैल सिंह को भेंट किया था। चन्द्रमा से लाया गया चट्टान का एक टुकड़ा 1969 में अमरीका के राजदूत केनेथ बी. कीटिंग ने राष्ट्रपति श्री वी.वी. गिरि को भेंट किया था।

कक्ष में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा लिखा गया एक मूल नोट, प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की एक फाइल टिप्पणी तथा लॉर्ड माउंट बेटन के लिखे गए पत्र इस विशेष कक्ष में प्रदर्शित किए गए हैं। इसके अलावा, यहां भारत के प्रथम गणतंत्र पर राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को बधाई देते हुए संयुक्त राज्य अमरीका के राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन का एक फ्रेम किया गया तार भी है। भारत और संयुक्त राज्य की चिरस्थायी मैत्री को दर्शाता हुआ व्यक्तिगत रूप से फलक के साथ फ्रेम किया गया ऐतिहासिक रूप से महत्त्वपूर्ण दस्तावेज 2015 में भारत के 66वें गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत की यात्रा के दौरान माननीय राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भेंट किया गया था। संयुक्त राज्य के राष्ट्रपति भारत के गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि भी थे।

करीब 10हज़ार वर्ग मीटर क्षेत्र में विस्तृत इस संग्रहालय के सूत्रधार राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने संग्रहालय का औपचारिक उद्घाटन 25 जुलाई, 2016 को किया गया। यहांभारत की 28 भाषाओं में देशभक्ति गीत बजाने जैसी आनंदकारी गतिविधियां भी लुभाती हैं। नए संग्रहालय में तीन तल, भूतल, अपर बेसमेंट और लोअर बेसमेंट हैं। एक मेजनाइन तल भी नए संग्रहालय की इमारत का हिस्सा है। राष्ट्रपति भवन परिसर का सुंदर मुगल गार्डन दर्शनीय है।दर्शकों के लिए राष्ट्रपति भवन संग्रहालय सोमवार को छोड़कर बाकी दिन प्रात: 9 बजे से अपराह्न 4 बजे तक खुला रहता है।

(लेखक वरिष्ट पत्रकार एवं राजस्थान जनसंपर्क के सेवा निवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं)

 

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