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दुनिया में कृत्रिम वातावरण और हाे रहा बदलाव सामाजिक पर्यावरण के लिए हानिकारक: साेपान जाेशी

भोपाल : दुनिया में कृत्रिम वातावरण और हाे रहा बदलाव हानिकारक है। यह कहना है पर्यावरणविद साेपान जाेशी का। पर्यावरण दिवस पर पब्लिक रिलेशन्स सोसायटी, भोपाल की ओर से आयोजित विशेष व्याख्यान में गांधीवादी विचारक और पर्यावरणविद सोपान जोशी फेसबुक लाइव के जरिए ‘अनिश्चितता की साधना’ विषय पर अपने विचार रख रहे थे | उन्हाेंने समाज के पर्यावरण की स्थिति में हाे रहे बदलाव काे सामने रखा। साेपान ने कहा कि जाे जीव जिस वातावरण में पैदा हुआ है यदि उसे किसी अन्य बनावटी वातावरण में रहने के लिए छाेड़ दिया जाए ताे उसके शरीर के साथ ही उसका मन भी अस्वस्थ हाेने लगता है। इसी तरह विश्व के सभी मनुष्य विकास के नाम पर एक चिड़ियाघर के पिंजरे में रहने लगे है। भारतीय दर्शन स्पष्ट बताता है कि हमारा जीवन पर्यावरण दाेहन और संवर्धन पर आधारित था। अब स्थितियां बदल गई है। हम अपने स्वभाव से दूर हाे गए है। हमने विकास के माॅडल तैयार करने की संस्कृति अपना ली है। यह हानिकारक है। ऐसे में हमें सजग और सहज हाेकर सुविधाओं की जगह संतुलन काे अपनाते हुए अपने सामाजिक अभ्यारण्य का पर्यावरण स्वयं ही बनाना हाेगा।

जलवायु परिवर्तन को लेकर उनका कहना था विज्ञान की दुनिया में अब कोई शक नहीं बचा है कि जलवायु परिवर्तन हो रहा है। इसका कारण है, औद्योगिक विकास के लिए जलाए गए कोयले और पेट्रोलियम का हवाई कार्बन कचरा। जलवायु के कार्बन द्वारा गरम होने की बात किसी न किसी रूप में विज्ञान को 150 साल से पता है। लेकिन हम अपने विकास के लिए खोद-खोदकर कोयला और पेट्रोलियम निकालकर जला रहे हैं इस गुमान में कि हमारे पास सभी समस्याओं के समाधान हैं। फेसबुक लाइव मे बड़ी संख्या में इलेक्ट्रनिक व प्रिंट मीडिया से जुड़े पत्रकारों, पब्लिक रिलेशन्स प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स ने भाग लिया।

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