ताजा सामाचार

आप यहाँ है :

आरिफा एविस
 

  • होली के रंग कुछ ऐसे भी

    होली के रंग कुछ ऐसे भी

    राजनीतिक लोग आपस में आरोप-प्रत्यारोप के गुब्बारे आये दिन फेंकते रहते हैं. संसद में जुबानी गुलाल-अबीर की बौछार भी करते रहते हैं. इनकी एक खास पहचान है रंगहीन होते हुए भी ये सभी रंगों को मिलकर काला रंग बनाते है और ये स्याह लोग सफेदपोश कहलाते है .

  • अट्टहास’ पत्रिका का  नया प्रयोग

    अट्टहास’ पत्रिका का नया प्रयोग

    लखनऊ से प्रकाशित हास्य व्यंग्य की अनूठी पत्रिका 'अट्टहास' का प्रकाशन पिछले अट्ठारह वर्षों से हो रहा है जिसके प्रधान संपादक अनूप श्रीवास्तव है. यूँ तो अलग अलग समय पर पत्रिका विशेषांक निकालती रही है.

  • कब्र का अजाब

    कब्र का अजाब

    'नहीं, मदरसे में रूही नहीं जायेगी . 'पर क्यों अम्मी?' 'कहा ना अब वो नहीं जायेगी मदरसे में बस..'

  • सेल्फी चिंतन

    एक महाशय सुबह से इसी बात पे नाराज थे कि जिसे देखो वो सेल्फी खींच कर डालने पर अड़ा है, पड़ा है सड़ा है . सेल्फी देख देखकर कुढा रहे थे.' मैंने भी पूछ ही लिया -"क्या हुआ भाई क्यों बडबडा रहे हो... बैठे बैठे.'

  • बेवकूफी का तमाशा

    बेवकूफी का तमाशा

    अप्रैल आने वाला था. बेवकूफ बनाने वाले लोगों को बेवकूफ बनाने की फ़िराक में थे. वैसे अब कोई महीना निश्चित नहीं है. अप्रैल का महीना भी अपमानित हो रहा है कि आखिर बेवकूफ बनाने का दर्जा हमसे क्यों छीन लिया है. अब तो हर दिन बेवकूफ बनाया जा रहा है अवाम को.

  • योग के बहाने

    योग के बहाने

    गुप्ता साहब ने यूँ तो कभी योगा किया नहीं. पर भला आज कैसे न करते. ह्म तो कहते हैं ऐसे योग रोज हों जिसमें रोजाना कुछ न कुछ मिले.

  • व्यंग्य नव लेखन में ऊँचे दर्जे का अधिकार : शिकारी का अधिकार

    व्यंग्य नव लेखन में ऊँचे दर्जे का अधिकार : शिकारी का अधिकार

    पिछले दिनों आयोजित तीन दिवसीय 'व्यंग्य की महापंचायत' में कई अनोखी बातें हुईं। पहली तो यही कि बन्दा 'अट्टहास' के प्रोग्राम में पहली बार शामिल हुआ ।

  • भारत माता की जय ….

    भारत माता की जय ….

    जब सवाल देशभक्ति का हो तो कभी पीछे नहीं हटना चाहिए. हम जिस देश में रहें और उसके प्राचीन सामन्ती विचारों की कोई कदर न करें और उसके प्रति निष्ठा न रखें ये कहाँ की बात हुई.

  • आईआईटी की फीस वृद्धिः अब  गरीब छात्रों  के लिए नहीं रहे ये संस्थान

    आईआईटी की फीस वृद्धिः अब गरीब छात्रों के लिए नहीं रहे ये संस्थान

    आईआईटी में पढ़ने वाले छात्रों को अब दोगुना फीस देनी होगी जो 90 हजार से बढ़कर दो लाख हो जाएगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने यह फैसला आईआईटी काउंसिल के सिफारिश पर लिया है.

  • पानी नहीं है तो क्या, कोका कोला पीजिये !

    पानी नहीं है तो क्या, कोका कोला पीजिये !

    देखो भाई बात एकदम साफ है, क्रिकेट ज्यादा जरूरी है या खेती-किसानी? जाहिर है क्रिकेट ही ज्यादा जरूरी है क्योंकि ये तो राष्ट्रीय महत्व का खेल बन चुका है जो हमारे देश की आन बान शान है.

Back to Top