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अशोक चक्रधर
 

  • सम्मेलन होते रहे मगर संयुक्त राष्ट् संघ की भाषा नही बन सकी हिंदी

    सम्मेलन होते रहे मगर संयुक्त राष्ट् संघ की भाषा नही बन सकी हिंदी

    ‘विश्व हिंदी दिवस’ का आयोजन अभी तक विदेश मंत्रालय ही अपने सीमित दायरे में कराता आ रहा है। विदेश मंत्रालय में अब सुषमा जी जैसा कोई विकट हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषा-प्रेमी नज़र नहीं आ रहा। ऐसा लगने लगा है

  • सत्तर लोगों से डर गए, सत्तर करोड़ को भूल गए मुनव्वर राना

    सत्तर लोगों से डर गए, सत्तर करोड़ को भूल गए मुनव्वर राना

    मुनव्वर राना हमारे देश की वाचिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण नाम है। चचा, मुझे यह कहते हुए कोई संकोच नहीं है कि उन्होंने गंगा-जमुनी, चोली-दामनी और दूध-शकरी तहजीब के मिले-जुले कवि सम्मेलन और मुशायरों को बहुत आगे बढ़ाया। लोगों को उनका सधुक्कड़ी-फकीरी अंदाज बहुत भाया। धीरे-धीरे ऐसा होने लगा कि मुनव्वर राना हर अच्छे कवि सम्मेलन की जरूरत बनते गए।

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