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देवेन्द्र
 

  • संस्कृत साहित्य में छिपा खजाना

    इसी तरह विभिन्न उपनिषद् के अनेकों मंत्र व पाठ सार्वात्मदर्शन के अलौकिक ज्ञानज्योतिपुंज हैं।इनके पढ़ने व भावार्थ को समझते ही मानों हमारे स्वयं के ही अंदर अवस्थित एक ढके हुये ज्ञान-निधि पर से आवरण हट जाता है और इस तरह हमें स्वयं में

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