आप यहाँ है :

डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा
 

  • चित्रा मुद्गल की कहानियों का सांगोपांग अध्ययन

    चित्रा मुद्गल की कहानियों का सांगोपांग अध्ययन

    लेखिका डॉ.संगीता शर्मा ने ‘आदि-अनादी’ शीर्षक से तीन खंडों में प्रकाशित चित्रा मुगल की समस्त कहानियों का विहंगम परिचय कराने के बाद विस्तार से व्यक्तिपरक यथार्थ की दृष्टि से

  • भाषा : राष्ट्रीयता, समन्वय और समरसता’ पर व्याख्यान संपन्न

    भाषा : राष्ट्रीयता, समन्वय और समरसता’ पर व्याख्यान संपन्न

    ये विचार प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने कर्नाटक विश्वविद्यालय में विभिन्न भाषा-साहित्य और कला विषयों के प्राध्यापकों को संबोधित करते हुए प्रकट किए।

  • “ईश्वर करुण अभिनंदन ग्रंथ” हेतु रचनाएँ आमंत्रित

    “ईश्वर करुण अभिनंदन ग्रंथ” हेतु रचनाएँ आमंत्रित

    ग्रंथ की प्रकृति के अनुसार आलेख - ईश्वर करुण : जैसा मैंने देखा (अंतरंग संस्मरण), कवि सम्मेलनों का लाड़ला रचनाकार ईश्वर करुण, ईश्वर करुण और उनके गीत, हिंदी ग़ज़ल को ईश्वर करुण की देन,

  • स्त्री साहित्य पर एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

    स्त्री साहित्य पर एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

    हैदराबाद। साठ्ये महाविद्यालय, विले पार्ले, मुंबई के तत्वावधान में ‘स्त्री साहित्य’ विषय पर एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी का उद्घाटन जे. एस. विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश के कुलपति डॉ. हरिमोहन ने किया। बीज वक्तव्य प्रख्यात साहित्यकार डॉ. सूर्यबाला ने दिया. अध्यक्षता डॉ. कविता रेगे ने की तथा संचालन डॉ. ऋषभदेव शर्मा ने किया।

  • डॉ. ऋषभदेव शर्मा ‘अंतरराष्ट्रीय साहित्य गौरव सम्मान’ से अलंकृत

    डॉ. ऋषभदेव शर्मा ‘अंतरराष्ट्रीय साहित्य गौरव सम्मान’ से अलंकृत

    रूसी-भारतीय मैत्री संघ – दिशा (मास्को), हिंदी संस्थान – कुरुनेगल (श्रीलंका), सामाजिक संस्था – पहल (दिल्ली) और साहित्यक-सांस्कृतिक शोध संस्था (मुंबई) के संयुक्त तत्वावधान में दीनदयाल मार्ग, दिल्ली स्थित राजेंद्र भवन न्यास के सभाकक्ष में ‘अंतरराष्ट्रीय सम्मान समारोह’ का संक्षिप्त लेकिन भव्य आयोजन संपन्न हुआ. समारोह की अध्यक्षता जे. एस. विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश के कुलपति प्रो. हरिमोहन ने की तथा संचालन उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, हैदराबाद के पूर्व अध्यक्ष प्रो.ऋषभदेव शर्मा ने किया.

  • जाना एक जनकवि का….

    जाना एक जनकवि का….

    इन हृदयविदारक पंक्तियों के रचनाकार जगदीश ‘सुधाकर’ अभी इसी माह अपनी इहलीला समेटकर परलोक गमन कर गए. अपनी अंतिम साँस तक अभावों से जूझते रहे सुधाकर जी को लगभग छह महीने पहले जून 2016 में ‘ब्रेन-अटैक’ आया था.

  • ‘वृद्धावस्था विमर्श’ : नए विषय पर एक रोचक कृति

    ‘वृद्धावस्था विमर्श’ : नए विषय पर एक रोचक कृति

    21वीं सदी की दुनिया जिन चुनौतियों और समस्याओं का सामना कर रही है उनमें तेजी से बढ़ती हुई वृद्धों की जनसंख्या से उत्पन्न समस्या बड़ी तेजी से विकराल रूप धारण करती जा रही है.

  • वृद्धावस्था

    वृद्धावस्था

    काल की गति क्षिप्र है. वह इतनी शीघ्रता से चला जाता है कि उस पर किसी की दृष्टि नहीं जाति. एक नवजात शिशु कब अपनी शैशवावस्था छोड़कर युवावस्था में पहुँचा और कब वृद्धावस्था में, यह पता ही नहीं चलता. मानव विकास मनोविज्ञान के अनुसार 0 - 3 वर्ष की आयु शैशवकाल है, 4 – 12 वर्ष की आयु बाल्यकाल, 13 – 20 वर्ष की आयु युवावस्था, 20 – 40 वर्ष की आयु जवान युवावस्था, 40 – 65 वर्ष की आयु माध्यमिक युवावस्था तथा 65 वर्ष से वृद्धावस्था है.

  • “नई सदी के हिंदी साहित्य की बदलती प्रवृत्तियाँ” पर बीजापुर में राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

    “नई सदी के हिंदी साहित्य की बदलती प्रवृत्तियाँ” पर बीजापुर में राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

    यहाँ अंजुमन कला, विज्ञान एवं वाणिज्य महाविद्यालय में ‘नई सदी के हिंदी साहित्य की बदलती प्रवृत्तियां’ विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न हुई. महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से पधारे प्रो. देवराज ने संगोष्ठी का उद्घाटन किया तथा अपने बीज भाषण में कहा कि “बीजापुर में आज भी गंगा-जमुनी तहजीब मौजूद है.

  • ऋषभदेव शर्मा की पुस्तकों का लोकार्पण संपन्न

    ऋषभदेव शर्मा की पुस्तकों का लोकार्पण संपन्न

    साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था ‘साहित्य मंथन’ के तत्वावधान में खैरताबाद स्थित दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के सम्मलेन कक्ष में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से पधारे प्रो. देवराज की अध्यक्षता में आयोजित एक समारोह में तीन पुस्तकों को लोकार्पित किया गया.

Get in Touch

Back to Top