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डॉ. विनोद बब्बर
 

  • राष्ट्र की आत्मा से छल है विदेशी भाषा की गुलामी

    राष्ट्र की आत्मा से छल है विदेशी भाषा की गुलामी

    14 सितम्बर को हिंदी दिवस या हिंदी पखवाड़ा मनाना पर्याप्त नहीं है। हिंदी को प्रशासन से लोक व्यवहार की भाषा बनाने के

  • कौए बनाम कोयलः   अपने देश में हिंदी को बोलियों और कटु बोलों से बांटने की साजिश

    कौए बनाम कोयलः अपने देश में हिंदी को बोलियों और कटु बोलों से बांटने की साजिश

    इधर सोशल मीडिया पर ‘कौए-कोयल’ के नाम पर जारी नये पुराने हिसाब चुकाने का खेल देख कर लगता है जैसे इस बार शीत के बाद ‘बसंत’ नहीं ‘पतझड़’ आ गया हो। पिछले दिनों बेशक कुछ अलग कारणों से ही सही लेकिन साहित्य जगत में कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न उठाये गये लेकिन वे विवादों में उलझ कर अपने उद्देश्य से भटक गए।

  • आवश्यक है भारतीय भाषाओं का संरक्षण ।

    भाषा जीव के मानव बनने की दिशा में प्रथम कदम कहा जा सकता है। आरंभ में संकेतों की भाषा रही होगी जो कालांतर में शब्द संवाद में परिवर्तित हुई। हर परिस्थिति परिवेश एक दूसरे से अपरिचित और भिन्न था इसलिए हर मानव समूह ने अपने ढ़ंग से कुछ शब्द संकेत बनाये। एक दूसरे से कुछ मील से हजारो मील तक की दूरी में रह रहे समूहों द्वारा विकसित किये गये इन संकेतों और शब्दों में एकरूपता का प्रश्न ही पैदा नहीं होता।

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