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डॉ. विवेक आर्य
 

  • ब्राह्मण शब्द को लेकर भ्रांतियां एवं उनका निवारण

    ब्राह्मण शब्द को लेकर अनेक भ्रांतियां हैं। इनका समाधान करना अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि हिन्दू समाज की सबसे बड़ी कमजोरी जातिवाद है। ब्राह्मण शब्द को सत्य अर्थ को न समझ पाने के कारण जातिवाद को बढ़ावा मिला है।

  • ये लिव इन है या व्यभिचार

    ये लिव इन है या व्यभिचार

    कुछ लोगों द्वारा खजुराओ की नग्न मूर्तियाँ अथवा वात्सायन का कामसूत्र को भारतीय संस्कृति और परम्परा का नाम दिया जा रहा है। जबकि सत्य यह है कि भारतीय संस्कृति का मूल सन्देश वेदों में वर्णित संयम विज्ञान पर आधारित शुद्ध आस्तिक विचारधारा है।

  • क्या टीपू सुल्तान न्यायप्रिय शासक था?

    क्या टीपू सुल्तान न्यायप्रिय शासक था?

    टीपू द्वारा मन्दिरों का विध्वंस दी मैसूर गज़टियर बताता है कि "टीपू ने दक्षिण भारत में आठ सौ से अधिक मन्दिर नष्ट किये थे।”

  • …फिर भी कुछ धूर्त औरंगजेब को महान बना रहे है..

    …फिर भी कुछ धूर्त औरंगजेब को महान बना रहे है..

    मुगल खानदान में सबसे लम्बे समय तक राज औरंगज़ेब का रहा था। जितना लम्बा औरंगज़ेब का राज था उतनी ही लम्बी उसके अत्याचारों की सूची थी। भारत के 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त करने के पश्चात पाठ्यक्रम में इतिहास के उन रक्तरंजित पृष्ठों को जिनमें मुसलमानों ने हिन्दुओं पर अथाह अत्याचार किये थे स्थान नहीं दिया गया।

  • नवबौद्ध बनना: नौटंकी या फैशन

    नवबौद्ध बनना: नौटंकी या फैशन

    सन्देश- बनना भी है तो महात्मा बुद्ध की मान्यताओं को जीवन में , व्यवहार में और आचरण में उतारो। अन्यथा नवबौद्ध बनना तो केवल नौटंकी या फैशन जैसा हैं।

  • संस्कृत भाषा की महता

    संस्कृत भाषा की महता

    आज संस्कृत एवं जर्मन भाषा को लेकर चर्चा जोरो पर हैं। तीसरी भाषा के रूप में केंद्रीय विद्यालयों में जर्मन के स्थान पर संस्कृत भाषा को लागु करने के सरकार के फैसले का कुछ लोग जोर शोर से विरोध कर रहे हैं।

  • बाइबिल में वैदिक कर्म-फल व्यवस्था: “जो जैसा बोयेगा वो वैसा पायेगा”

    बाइबिल में वैदिक कर्म-फल व्यवस्था: “जो जैसा बोयेगा वो वैसा पायेगा”

    वेदों में वर्णित कर्म फल व्यवस्था को इतने आसान शब्दों में शायद ही कोई समझा सकता हो। प्राचीन काल से ही हर वैदिकधर्मी इस अटल एवं अकाट्य सिद्धांत को मानता आ रहा हैं

  • आदिवासी समाज और ईसाइयत

    आदिवासी समाज और ईसाइयत

    1857 में प्रथम संघर्ष के असफल होने के पश्चात हज़ारों कारण हज़ारों क्रांतिकारियों ने जंगलों को अपना घर बनाया और छापे-मार युद्ध के माध्यम से अंग्रेजों और उनके खुशामदियों को बेचैन करने लगे।

  • सदाचार बनाम समलेंगिकता

    सदाचार बनाम समलेंगिकता

    अधिकतर धार्मिक संगठन धारा 377 के हटाने के विरोध में हैं। उनका कहना है कि यह करोड़ो भारतीयों का जो नैतिकता में विश्वास रखते हैं उनकी भावनाओं का आदर हैं। आईये समलेंगिकता को प्रोत्साहन देना क्यों गलत है इस विषयकी तार्किक विवेचना करें।

  • भगत सिंह के क्रांतिकारी विचारों के प्रेरणास्रोत्- सरदार अर्जुन सिंह

    भगत सिंह के क्रांतिकारी विचारों के प्रेरणास्रोत्- सरदार अर्जुन सिंह

    सरदार अर्जुन ने अपने ग्राम बंगा जिला लायलपुर (पाकिस्तान) में गुरूद्वारे को बनाने में तो सहयोग किया और वे गुरुद्वारा में तो जाते थे पर कभी गुरु ग्रन्थ साहिब के आगे माथा नहीं टेकते थे.

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