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हरगोविंद
 

  • कवयित्रियों के स्वरों से महकती रही कविता, गीतों और गज़लों की ये यादगार शाम

    कवयित्रियों के स्वरों से महकती रही कविता, गीतों और गज़लों की ये यादगार शाम

    कुल मिलाकर सभी कवत्रियों ने कमाल किया। तीन घंटे तक श्रोतागण काव्य की बारिश में भीगते रहे। तालियां बजती रहीं। वाह-वाह होती रही और ठहाके भी लगते रहे। कुछ कवत्रियों ने तहत में बहुत अच्छा कविता पाठ किया। कुछ के पास इतना दिलकश तरन्नुम था कि सुनकर श्रोता झूम उठे। कुल मिलाकर यह एक ऐसा कार्यक्रम था जिसने श्रोताओं के दिलों पर अमित छाप छोड़ी।

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