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नरेंद्र कौशिक
 

  • गाय बचाने की मुहिम में जुटा है ये मुस्लिम युवक

    गाय बचाने की मुहिम में जुटा है ये मुस्लिम युवक

    “गाय काटने वालों ने मेरे भाई को मार डाला. मैं उनको कैसे छोड़ सकता हूँ?” मेरठ के तीस साल से भी कम उम्र के आसिफ़ जब ये कहते हैं तो उनका चेहरा ग़ुस्से और ग़म दोनों में तमतमाता दिखता है. भाई के मौत का ग़म और गाय को काटने वालों के प्रति उनका ग़ुस्सा, क्या ज़्यादा है, इसका अंदाज़ आप लगाते रहिए, तब तक आसिफ़ आपको बीते 18 महीने के दौरान गाय बचाने के लिए किए गए कामों की फ़हरिस्त सुनाने लगते हैं.

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