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पी.के पाण्डेय
 

  • सन् 2095 यानी की आज से 79 साल बाद किसी घर का माहौल ऐसा होगा

    रितेश अपने कमरे में चुपचाप गुमसुम सा बैठा है....तभी मम्मी की तरंगे कैच होने लगती है(उस समय तक शायद मोबाईल म्यूज़ियम में दिखेंगे और ऐसे छोटे छोटे ऊँगली में फिट होने वाले गजेट्स आजायेंगे जिनका बटन ऑन करने के बाद जिस व्यक्ति के बारे में सोचेंगे उस से मानसिक तरंगो से बात शुरू हो जाएगी जैसे आजकल मोबाईल से होती है।

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