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पंकज सोनी
 

  • रंगकर्मियों के लिए एक उपहार है  ‘सुबह अब होती है’

    रंगकर्मियों के लिए एक उपहार है ‘सुबह अब होती है’

    मजाक मज़ाक में लेखक पाठकों को एक गम्भीर मैसेज दे देता है कि कैसे रोज़ी रोटी की तलाश में अपनी पत्नी से दूर रह रहे पुरुष सेक्सुअल फ्रस्टेशन का शिकार हो जाते हैं। और दूसरा मैसेज यह है कि चौथमल मास्साब हर मर्द के अंदर होते हैं। वरना क्यों पाठक अंत तक इस कहानी को पढ़ रहे होते हैं कि आगे क्या हुआ होगा। यही हाल नाटक पढ़ते या देखते समय होता है।

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