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प्रो. पुष्पिता अवस्थी
 

  • राष्ट्रभाषा ही आत्मीय संस्कृति की अस्मिता की जनक ।

    राष्ट्रभाषा ही आत्मीय संस्कृति की अस्मिता की जनक ।

    भाषाएं सभ्यताओं की जननी है । भाषाओं में संस्कृति के स्रोत अनुस्पूत हैं। भाषाओं में हमारी अभिव्यक्ति के सूत्र समाहित हैं । हम सबकी अभिलाषाओं के स्वप्नभाषाओं में ही उजागर होते हैं। किसी भी अन्य देश की वास्तविक नागरिकता उस देश की भाषा के नागरिक होने पर ही संभव होती है ।

  • राम से जुड़कर नीदरलैंड में हिंदी का प्रवाह ।

    राम से जुड़कर नीदरलैंड में हिंदी का प्रवाह ।

    विश्वास भाव आस्था का जनक है और आस्थाएं सुजन की जननी हैं । नीदरलैंड के अमस्टर्डम शहर के हाईवे के बगलगीर अपगाउडो स्थान पर पिछले 5 वर्ष से राम नाम धुन की गूंज हो रही है जिसका निनाद चारों दिशाओं में है । इस देश में आर्यसमाजियों और सनातन धर्मियों के कई धर्मस्थल हैं ,जहां हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति की अपनी तरह से साधना होती है। सूर्यास्त बेला से ही श्रीराम धाम मंदिर में भक्त गण श्री राम का सरस संगीतमय जीवन चरित्र सुनने के लिए एकत्रित हो जाते हैं जहां

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