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राधाकिशन शर्मा
 

  • एक मुठ्ठ चावल से बनी साढ़े तीन करोड़ की पूँजी

    एक मुठ्ठ चावल से बनी साढ़े तीन करोड़ की पूँजी

    सूझ-बूझ और संगठित प्रयास से गरीबी को मात देने वाली इन महिलाओं ने एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर क्षेत्र का यह बैंक नारी सशक्तीकरण को समर्पित एक शानदार प्रयास है। मेहनत-मजदूरी कर पेट पालने वाली कुछ महिलाओं ने छोटी बचत का जो सपना देखा था, वह तीन दशक बाद इस बैंक के रूप में सामने है। साढ़े तीन करोड़ की कुल पूंजी वाला बैंक। महिलाओं द्वारा संचालित, महिलाओं का बैंक। करीब दस हजार महिला खाताधारियों का बैंक। जो अब वंचित वर्ग की हजारों महिलाओं को स्वरोजगार मुहैया करा रहा है। सखी बैंक की शुरुआत एक मुट्ठी चावल से हुई थी।

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