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श्रमण डॉ. पुष्पेन्द्र
 

  • आत्म जागरण का पर्व है पर्यूषण

    आत्म जागरण का पर्व है पर्यूषण

    अहिंसा और मैत्री द्वारा ही शांति मिल सकती है। आज जो हिंसा, आतंक, आपसी-द्वेष, नक्सलवाद, भ्रष्टाचार जैसी ज्वलंत समस्याएं न केवल देश के लिए बल्कि दुनिया के लिए चिंता का बड़ा कारण

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