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विजय जोशी
 

  • मन की बात  ” कुछ अपनी कुछ उनकी “

    मन की बात ” कुछ अपनी कुछ उनकी “

    अपने स्व से मिली प्रेरणा और चतुर्दिक परिवेश से प्राप्त संवेदनाओं के समन्वित स्वरों का तरंगित आयाम जब वैचारिक रूप से साकार होता है तो सृजन सन्दर्भों के विविध पक्ष उभरने लगते हैं। यही सन्दर्भ सृजन मूल्यों को समर्पित व्यक्ति के लिए सामाजिक,सांस्कृतिक और साहित्यिक परिवेश का निर्माण करते हैं और वह अपने पथ पर अनवरत बढ़ता हुआ प्रेरणात्मक पुञ्ज प्रदान करता है। इन्हीं सन्दर्भों का बतियाता दस्तावेज़ है कृष्णा कुमारी की कृति - "कुछ अपनी कुछ उनकी " साक्षात्कार की यह कृति मात्र प्रश्नोत्तरी नहीं है वरन् व्यक्तित्व-कृतित्व का वह वार्तालाप है जो भीतर की चेतना और बाह्य परिवेश की संवेदना का विवेचन प्रस्तुत कर संवाद स्थापित करता है और प्रेरणात्मक अनुभवों को साझा करता है।

  • जीवन मूल्यों, सांस्कृतिक परिवेश और मानवीय सन्दर्भों के सशक्त रचनाकार डॉ. प्रभात कुमार सिंघल

    जीवन मूल्यों, सांस्कृतिक परिवेश और मानवीय सन्दर्भों के सशक्त रचनाकार डॉ. प्रभात कुमार सिंघल

    रचनाकार अपने परिवेश और संस्कार के साथ अर्जित अनुभवों से सृजन सन्दर्भों को विकसित ही नहीं करता वरन् उसे संरक्षित भी करता है। यह भाव और स्वभाव ही एक रचनाकार के सामाजिक सरिकारों को परिलक्षित करता है।

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