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‘खतरनाक आभासी खेलों से बचें’

(आभासी खेल दिवस पर विशेष)
एक डरावनी शक्ल जिसकी दो बड़ी-बड़ी गोल आंखें हों, जिसकी एक डरावनी-सी मुखमुद्रा हो और अचानक ही आपके वाट्सऐप मैसेज पर अनजान नंबर से ऐसी तस्वीर आए तो शायद आप भयभीत हो जायेंगे। वैसे भी यह बात भयभीत करने वाली ही है क्योंकि यह तस्वीर है — बच्चों के एक खतरनाक खेल की ।

बच्चों की जान लेने वाले खतरनाक खेल ‘ब्लू व्हेल’ का खौफ अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि एक नया खेल बच्चों की जान लेने के लिए आ गया है। इस खेल का नाम है –‘मोमो गेम’। मोमो गेम को पिछले वर्ष आए ब्लू व्हेल गेम से भी अधिक खतरनाक माना जा रहा है। यह खेल भी बच्चों के लिए घातक साबित हो रहा है।

यह खेल सर्व प्रथम हमारे दिमाग के साथ खेलता है, डर का माहौल निर्मित करता है और उसके पश्चात जान ले लेता है। यह खेल वाट्सऐप मैसेज के जरिए किशोरों को अपना शिकार बनाता है। इस आभासी खेल में सबसे पहले बच्चों को अज्ञात नंबर से संदेश भेजा जाता है। इसके पश्चात इसी नंबर से बच्चों को डरावनी तस्वीर भेजकर कुछ टास्क दिए जाते हैं। जब खिलाड़ी किसी कार्य को करने से इंकार कर देता है तो फिर बड़ी-बड़ी आंखों वाली डरावनी मोमो की तस्वीर उसे कड़ी सजा देने की बात कहकर डराती और धमकाती है। खेल के अंत में खिलाड़ी को आत्महत्या करने के लिए प्रेरित किया जाता है ।

हाल ही में अर्जेंटीना में एक बारह साल की बालिका ने इसी खेल के मायाजाल में फँस कर आत्महत्या कर ली। विदेशों में अपना कहर ढाने के पश्चात अब यह खतरनाक खेल भारत में भी अपनी दस्तक दे चुका है। भारत में आते ही अभी तक यह खेल चार लोगों की जिंदगी ले चुका है जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं । इस खेल ने भारत में सबसे पहले अपना शिकार राजस्थान के अजमेर में दसवीं की एक छात्रा को बनाया। आज के समय में ऐसे किसी भी आभासी खेल का नाम सुनकर ही मस्तिष्क में एक भय का माहौल उत्पन्न हो जाता है क्योंकि पिछले वर्ष ही ब्लू ब्हेल खेल ने संपूर्ण दुनिया में अपना आतंक फैलाया था । पूरे संसार में इस आभासी खेल के कारण तकरीबन ढाई सौ से अधिक लोगों ने अपने कीमती जीवन को अलविदा कह दिया।

भारत में बढ़ती आत्महत्याओं को देखते हुए भारत सरकार ने इंटरनेट पर बच्चों के मन मस्तिष्क को काबू करने वाले इस खेल पर प्रतिबंध लगाते हुए सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को इस खेल के सभी डाउनलोड करने वाले लिंक हटाने के निर्देश दिए थे। सरकार तो अपना कार्य कर ही रही है परंतु यह भी आवश्यक है कि माता-पिता भी अपने बच्चों पर ध्यान दें जिससे बच्चे इतने खतरनाक खेलों से दूर रहें । अगर अभिभावक समय रहते अपने बच्चों को सतर्क करते तो शायद आज उनके बच्चे उन लोगों के साथ ही होते।

इंटरनेट की दुनिया के खतरनाक खेल बच्चों की जान लेने लगे तो यह अत्यंत ही चिंताजनक स्थिति है। बच्चों को भी अपने विवेक का इस्तेमाल करना चाहिए। जब बच्चों को यह ज्ञात होता है कि यह खेल खतरनाक है और उनकी आत्महत्या तक कर सकता है तो फिर ऐसे खेलों की तरफ ध्यान ही क्यों देते हैं ? यह भी सोचने वाली बात है। आजकल सोशल मीडिया पर आए दिन एक दूसरे को नये-नये चैलेंज देने का सिलसिला चल पड़ा है। ऐसे ही एक नये चैलेंज का नाम है ‘किकि चैलेंज’। यह चैलेंज कनेडियन हिप-हॉप सुपरस्टार के एल्बम स्कॉर्पियन के गाने ‘इन माय फीलिंग’ पर प्रारंभ हुआ। यह चैलेंज भी दुर्घटनाओं को न्योता देने वाला साबित हो रहा है।

इस चैलेंज के तहत एक व्यक्ति को चलती गाड़ी से उतरकर गाड़ी का दरवाजा खुला रखकर गाने पर नाचना होता है और फिर कूदकर पुनः गाड़ी में बैठना होता है। वहीं गाड़ी में बैठा दूसरा व्यक्ति गाड़ी चलाता है और बाहर नृत्य कर रहे व्यक्ति का वीडियो बनाता है । अब अगर इस तरीके के चैलेंज स्वीकार कर अपनी जान जोखिम में डालने वाले व्यक्ति को पागल नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे ?

बच्चों को ऐसे खतरनाक आभासी संसार की हकीकत और परिणामों से रूबरू कराना अत्यंत महत्वपूर्ण है। विज्ञान का इतना विस्तार हो गया है कि बच्चों को भटकाने वाला कोई भी खेल कभी भी वायरल हो जाता है और फिर वह भयावह दुर्घटनाओं को अंजाम देने के पश्चात ही रूकता है। इसलिए आभासी खेलों को खेलने से पूर्व बच्चों को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि इस खेल का भविष्य में क्या परिणाम होगा ? आज के व्यस्त समय में माता-पिता बच्चों पर ध्यान नहीं दे पाते जिसकी वजह से ऐसे खतरनाक खेल बच्चों के हाथ लग जाते हैं । इसलिए माता-पिता का भी बच्चों के प्रति सतर्क रहना अत्यंत आवश्यक है।

सुयश मिश्रा
( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल (म.प्र.) में अध्ययनरत )
8349182988

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