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भागवत परिवार की तीर्थ दर्शन यात्रा में समाया पूरा भारत नेपाल और अमरीका भी

मुंबई के सांताक्रुज़ हवाई अड्डे पर 18 सितंबर को सुबह-सुबह लोगों के लिए अजीब सा माहौल था, मुंबई के कई जाने माने उद्योगपति, व्यापारी वहाँ जय श्री कृष्ण, राधे राधे और जय श्रीराम से एक दूसरे का अभिवादन कर रहे थे। हलौ, हाय की इस दुनिया में इतने सारे लोगों को एक पारंपरिक अंदाज़ से अभिवादन करते देखना सुनना एक रोमांचक अनुभव था।

मुंबई के भागवत परिवार के 60 से अधिक लोग उत्तर प्रदेश के नैमिशारण्य, अयोध्या, चित्रकूट, प्रयागराज और वाराणसी की तीर्थ यात्रा पर जा रहे थे। इसके साथ ही नेपाल, चेन्नई , बैगलुरू, अमरीका, दिल्ली, आगरा आदि स्थानों से 90 से अधिक यात्री सीधे लखनऊ पहुँच चुके थे। इस तरह लगभग 150 तीर्थ यात्रियों का ये काफिला पूरे भारत और नेपाल व अमरीका का प्रतिनिधित्व करते हुए यात्रा पर रवाना हुआ।

यात्रा की शानदार शुरुआत लखनऊ के राज भवन से हुई। राज्यपाल श्री राम भाऊ नाईक को जब पता चला कि उनके अपने मुंबई शहर के लोग उत्तर प्रदेश के तीर्थों की यात्रा करने आ रहे हैं तो उन्होंने अपने शहर के लोगों को राज भवन आमंत्रित कर राज भवन ही नहीं घुमाया बल्कि सभी लोगों से बेहद आत्मीयता से मुलाकात की।

राज भवन में आयोजित कार्यक्रम का संचालन करते हुए माननीय राज्यपाल महोदय के पारिवारिक मित्र व भागवत परिवार के प्रमुख कर्ता धर्ता श्री वीरेंद्र याज्ञिक ने भागवत परिवार की इस यात्रा के बारे में जानकारी दी और कहा कि किस तरह राम भाऊ नाईक ने अपनी मेहनत, सहजता, सरलता और आम कार्यकर्ताओं के साथ रहते हुए अपनी एक अलग छवि बनाई।

इस अवसर पर श्री राम नाईक ने कहा कि महाराष्ट्र के स्वामी रामदास खुद नैमिशारण्य तीर्थकी यात्रा पर आए थे और उनकी स्मृति में वहाँ एक मंदिर भी बना है।

श्री नाईक ने कहा कि मैं बरसों से मुंबई के भागवत परिवार से जुड़ा हूँ और मुंबई जैसे शहर में भागवत परिवार धर्म, संस्कृति, अध्यात्म के साथ ही पारिवारिक जीवन मूल्यों को स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।

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इस अवसर पर श्री नाईक ने बताया कि वे महाराष्ट्र के एक छोटे से गाँव से मुंबई आए थे और एक सरकारी क्लर्क के रूप में उन्होंने अपना जीवन यापन शुरु किया था। लेकिन बाद में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ाव होने और जनता पार्टी बनने के बाद उससे टिकट मिलने के बाद दो बार बोरिवली से विधायक और पाँच बार सांसद रहा।

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उन्होंने बताया कि उन्होंने राज भवन के दरवाजे आम आदमी के लिए खोल रखे हैं और यहाँ कोई भी व्यक्ति आकर उनसे मिल सकता है। उन्होंने कहा कि मेरे दो वर्ष के कार्यकाल में मैं अब तक 13 हजार लोगों से मिल चुका हूँ और उनकी शिकायतों व समस्याओँ का समाधान करने की दिशा में लगातार पहल कर रहा हूँ।

राज भवन के बाद लखनऊ के प्रसिध्द नीम करोली वाले हनुमान मंदिर में श्री अजय याज्ञिक द्वारा प्रस्तुत सुंदर कांड की रस वर्षा में सभी लोग शामिल हुए।

यात्रा के दूसरे दिन 19 सितंबर, सोमवार को सभी तीर्थ यात्री नैमिशारण्य पहुँचे और वहाँ अपने पितरों का श्राध्द कर्म कर शाम को लखनऊ पहुँचे। लखनऊ में शाम को लखनऊ के भगत सिंह कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट ऐंड इंजीनियरिंग में आयोजित मानस मर्मज्ञ श्री अजय याज्ञिक जी की सुंदर कांड की रसवर्षा का आनंद लिया। इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन करते हुए श्री वीरेंद्र याज्ञिक ने बताया कि इस संस्थान का अध्यक्ष रूप में श्री हनुमानजी को बनाया गया है और उनके ही मार्गदर्शन में ये कॉलेज संचालित किया जाता है। संस्थान के उपाध्यक्ष श्री पंकज सिंह भदौरिया ने बताया कि हमें इस संस्थान के अध्यक्ष के रूप में भगवान श्री हनुमानजीको नियुक्त किए जाने के लेकर लंबी लड़ाई लड़ना पड़ी, क्योंकि सरकारी नियमों के हिसाब से संस्थान का अध्यक्ष कोई जीवित व्यक्ति ही हो सकता है, लेकिन हमने सरकार को मजबूर किया कि भगवान हनुमानजी को संस्थान का अध्यक्ष बनाए जाने की हमारी जिद को अनुमति देना पड़ी।

इस अवसर पर श्री वीरेंद्र याज्ञिक ने कहा कि कॉलेज के प्रबंधन के कोर्स में सुंदर कांड को भी शामिल कर इसके एक एक दोहे पर शोध किया जाना चाहिए, अगर ऐसा हुआ तो इस कॉलेज को पूरी दुनिया में प्रसिध्दि तो मिलेगी ही सिध्दी भी मिलेगी। उन्होंने कहा कि सुंदर कांड के एक –एक दोहे में श्रेष्ठतम प्रबंधन के गूढ़ रहस्य छुपे हैं, और इनक सामने लाकर इनकी उपयोगिता सिध्द की जानी चाहिए।

तीर्थ यात्रियों का काफिला मंगलवार को अयोध्या पहुँचा और यहाँ मानस भवन मे मुंबई, बैंगलुरू, कोलकोता, चेन्नई, अमरीका, नेपाल आदि स्थानों से आए हुए सभी तीर्थ यात्रियों का परंपरागत तरीके से स्वागत किया गया।

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2 टिप्पणियाँ
 

  • Singhal@v4venus.in'
    Rajkumar R singhal

    सितंबर 21, 2016 - 4:22 pm

    Good information

  • murarkasampatdevii@yahoo.co.in'
    संपत देवी मुरारका

    सितंबर 30, 2016 - 8:04 pm

    मैं भी जुडने हेतु इच्छुक हूँ, क्योंकि मैं भी यात्रा एँ लिखती हूँ। पढ़कर मुझे अच्छा लगा।

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