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किताबें उम्र तुम्हारे नाम

एलियट ने कहा है – किताबें सबसे शांत और सबसे सदाबहार दोस्त हैं। ये सबसे सुलभ और बुद्धिमान काउंसलर हैं, और सबसे धैर्यवान शिक्षक हैं।

गुलजार साहब ने भी क्या खूब फ़रमाया है –

खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं
हवा चले न चले, दिन पलटते रहते हैं

वास्तव में किताबों की दुनिया निराली है। वह व्यक्ति को केवल ज्ञान का भंडार ही नहीं उपलब्ध कराती बल्कि ईमानदार साथी की भूमिका निभाती हैं। किताबों के कारण व्यक्ति स्वयं को कभी अकेला महसूस नहीं करता। किताबों के कारण व्यक्ति स्वयं को अत्यधिक सहज एवं आत्मविश्वास से परिपूर्ण पाता है।

पुस्तकालय समाज की अनिवार्य आवश्यकता है। किताबें जिंदगी की जरुरत। मनुष्य को भोजन कपड़े और आवास की व्यवस्था हो जाती है तो वह जिन्दा रह जाता है, शेष उन्नति तो वह उसके बाद सोचता है। किताबें जिंदगी बनाती हैं। जीवन को सजाती हैं। जीने की ललक को बढ़ाती हैं। जिंदगी का फलसफा समझाती हैं। किताबें आजीवन साथ निभाती हैं। इसलिए समाज यदि विचारशील है तो पुस्तकें और पुस्तकालय समाज की पहली आवश्यकता है, क्योंकि उससे ज्ञान और विचार के जीवन को पोषण मिलता है।

पुस्तकें पारम्परिक हों या डिजिटल, केवल ज्ञान प्राप्ति का साधन ही नहीं बल्कि आय के सृजन का भी उम्दा स्रोत हैं। देश में शिक्षा के प्रचार-प्रसार के बाद तो पुस्तकों से संबंधित रोजगार का वर्चस्व लगातार बढ़ता गया है। आज किसी भी व्यक्ति के लिए अपनी इच्छानुसार ज्यादा से ज्यादा पुस्तकें खरीद पाना संभव नहीं है और व्यक्ति की इन्हीं इच्छाओं की पूर्ति करती है ‘लाइब्रेरी’। लाइब्रेरी पुस्तक ज्ञान का वह भंडार केन्द्र है, जहां से किताबें तथा पत्र-पत्रिकाएं आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। अब तो सरकार की ओर से भी प्रत्येक क्षेत्रों में पुस्तकालयों और डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना की जा रही है।

युग-युग की साधना पुस्तकों में संकलित होकर पुस्तकालयों में सुरक्षित है I वे जनसाधारण के लिए सुलभ होती हैं I पुस्तकालयों में स्तरीय पुस्तकें रखी जाती हैं लेकिन उनमें कुछेक पुस्तकें इतनी महँगी होती हैं कि सर्वसाधारण के लिए उन्हें स्वयं खरीदकर पढ़ना संभव नहीं होता I यह बात संदर्भ ग्रंथों पर विशेष रूप से लागू होती है I लेकिन आज इलेक्ट्रानिक लाइब्रेरी ने राह आसान कर दी है। बड़ी-बड़ी जिल्दों के शब्दकोशों और विश्वकोशों तथा इतिहास-पुरातत्व की बहुमूल्य पुस्तकों को एक साथ पढ़ने का सुअवसर पुस्तकालयों और अंतरजाल पर संभव है I गौरतलब है कि जीवन में अच्छे मित्र, अच्छी किताबें, और साफ अंतःकरण सचमुच बड़ी दुर्लभ सौगातें हैं।

तो आइये उन किताबों का शुक्रिया अदा करें कुछ इस अंदाज में –

तुम्ही ने साथ दिया ज़िंदगी की राहों में
किताब-ए-उम्र तुम्हारे ही नाम करते हैं

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मो. 9301054300

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