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इंटरनेट की कृपा से बना ब्रिटेन का नंबर वन रेस्टोरेंट, जो था ही नहीं

ये रोचक आलेख बताता है कि इंटरनेट की दुनिया पर पढ़े लिखे और होशियार लोगों को कितनी आसानी से मूर्ख ही नहीं बनाया जा सकता है बल्कि बार बार मूर्ख बनाया जा सकता है। इंटरनेट पर कैसे फर्जी तरीके से रैंकिंग का गोरखधंधा चलता है, जरा आप भी जान लीजिये।

चर्चित मैगजीन वाइस के रिपोर्ट ऊबा बटलर ने कभी मशहूर वेबसाइट ट्रिप एडवाइजर पर रेस्टोरेंटों के लिए फर्जी समीक्षाएं लिखने का काम किया था. इससे उन्हें यह तो अहसास हो ही गया था कि इंटरनेट होटलों या रेस्टोरेटों की समीक्षाएं झूठी हो सकती हैं. फिर एक दिन उन्हें लगा कि क्यों न थोड़ा आगे बढ़ा जाए. यानी एक ऐसा रेस्टोरेंट खोला जाए जो हो ही नहीं. उन्हें लगता था कि समीक्षाएं तो फर्जी हो सकती हैं, लेकिन रेस्टोरेंट नहीं.

इस काम के लिए उन्होंने अपने घर का ही इस्तेमाल किया जिसके आगे छोटा सा गार्डन भी था. फर्जी रेस्टोरेंट को को नाम दिया गया ‘द शेड ऐट डलविच’. इसके बाद एक वेबसाइट बनाई गई. इसमें खाने-पीने से जुड़ी कुछ तस्वीरें लगाई गईं. ये भी फर्जी थीं. एक व्यंजन तो ब्लीच टैबलेट, शेविंग क्रीम और ऊबा बटलर के पैर के निचले हिस्से की तस्वीर को मिलाजुलाकर बना दिया गया था. वेबसाइट में रेस्टोरेंट की खासियत बताई गई कि यहां मूड के हिसाब से खाना परोसा जाता है. हैपी (खुश) से लेकर लव (प्रेम) और कंटंप्लेशन (सोच-विचार) तक मेनू में तमाम मूड थे.

अब बारी थी रेस्टोरेंट को ट्रिपएडवाइजर पर रजिस्टर करवाने की. इसके लिए एक फोन नंबर चाहिए था. ऊबा बटलर ने अपना नंबर दे दिया. कुछ दिन बाद वेबसाइट की तरफ से रजिस्ट्रेशन की सूचना भी आ गई. इसके बाद बटलर ने अपने दोस्तों की मदद से ‘द शेड ऐट डलविच’ की कुछ फर्जी समीक्षाएं डालना शुरू कर दिया. सब में इस रेस्टोरेंट की खूब तारीफ की गई थी. रेस्टोरेट की वेबसाइट पर कहा गया था कि यहां लोग सिर्फ बुकिंग करके आ सकते हैं और वह बुकिंग भी सिर्फ फोन से होगी. फोन नंबर वही था, बटलर का.

शुरुआत हो गई. यह मई की बात है. लंदन में खाने के छोटे-बड़े 18 हजार से भी ज्यादा ठीए हैं. ट्रिपएडवाइजर पर ‘द शेड ऐट डलविच’ की शुरुआत हुई 18190वें नंबर से. कुछ दिन बाद ऊबा बटलर का फोन बजने लगा. हर बार वे ग्राहक को जवाब देते कि सभी सीटें बुक हैं. ग्राहक कहता कि कुछ दिन बाद की दे दो तो जवाब होता था कि दो हफ्ते तक बुकिंग फुल है. दो हफ्ते बाद की कहने वाले को दो महीने का आंकड़ा बताया जाता. लोगों को शक न हो, इसके लिए बीच में इस तरह की फर्जी समीक्षाएं भी डाली गईं जिनमें लोग कहते कि दो हफ्ते के इंतजार के बाद आखिरकार उनका नसीब खुला और उन्हें ‘द शेड ऐट डलविच’ में जाने का मौका मिला. आगे समीक्षा में बताया जाता कि इंतजार सफल रहा और खाना शानदार जिसे खाकर उन्हें जीवन धन्य महसूस हुआ.

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जल्द ही ट्रिपएडवाइजर पर रेस्टोरेंट की चर्चा फैलने लगी. नतीजतन इसकी रैकिंग चढ़ती गई. पहले यह 10 हजार के नीचे आई और अगस्त आते-आते ‘द शेड ऐट डलविच’ का नाम लंदन के बेहतरीन 1500 रेस्टोरेंटों में शामिल हो गया. इसके बाद एक पीआर एजेंसी ने बटलर से संपर्क साधा. उसने दावा किया कि कई बड़े नाम उसके क्लाइंट हैं और ‘द शेड ऐट डलविच’ को अपनी लिस्ट में शामिल करके उसे खुशी होगी.

इसके बाद तो रेस्टोरेंट की चर्चा हर तरफ होने लगी. जल्द ही ‘द शेड ऐट डलविच’ लंदन का 30वां सबसे बढ़िया रेस्टोरेंट हो गया. अब ऊबा बटलर को सारी दुनिया से बुकिंग के लिए फोन आने लगे. एक साक्षात्कार में वे कहते हैं, ‘मेरे घर के आस-पास टहलते लोग मुझसे इसके बारे में पूछते.’ फिर एक दिन उन्हें ट्रिपएडवाइजर से एक चिट्ठी मिली. उन्हें लगा कि भेद खुल गया. लेकिन इसमें बताया गया था कि ‘द शेड ऐट डलविच’ को एक दिन में 89 हजार ‘व्यूज’ तक मिले हैं.

आखिरकार ट्रिपएडवाइजर पर रजिस्टर होने के सात महीने बाद ‘द शेड ऐट डलविच’ लंदन का नंबर वन रेस्टोरेंट हो गया-एक ऐसा रेस्टोरेंट जो था ही नहीं. ऊबा बटलर के फोन की घंटी बंद होने का नाम नहीं ले रही थी. लेकिन वे ‘द शेड ऐट डलविच’ में किसी तरह एक बार खाना खाने की कामना करने वाले लोगों को यही बताते कि सीट खाली नहीं है.

अब ऊबा बटलर के लिए मामला संभालना काफी मुश्किल हो रहा था. फिर भी उन्होंने सोचा कि प्रयोग को थोड़ा आगे ले जाया जाए. एक दिन रेस्टोरेंट खोला भी जाए. उन्होंने अपने कुछ दोस्तों को राजी किया. इन दोस्तों को रेस्टोरेंट का नकली मेहमान बनना था. इसके बाद कुछ असली ग्राहकों को बुलाने का फैसला हुआ. नकली मेहमानों का मकसद एक ऐसा माहौल तैयार करना था कि एक साधारण सी जगह में परोसा जा रहा लगभग रेडीमेड खाना असली ग्राहकों को एक असाधारण अनुभव लगे. इसके लिए ऊबा बटलर के दोस्तों को खाना खाते हुए उसकी खूब तारीफ करनी थी.

असली ग्राहकों को फोन करके एक तय दिन आने को कह दिया गया. उनसे कहा गया कि वे रेस्टोरेंट से कुछ दूर पहले एक तय जगह पर रुककर पहले फोन करें. इसके बाद बटलर उनकी आंखों पर पट्टियां बांधकर उन्हें ‘द शेड ऐट डलविच’ तक लाए. यह भी रेस्टोरेंट की रवायत बताई गई. बटलर के दोस्त पहले ही वहां पहुंचकर माहौल जमा चुके थे. असली ग्राहकों को उनके मनपसंद मूड के हिसाब से खाना दिया गया. खाना आम सा ही था, बस, ऊटपटांग नाम और ऊपर से कुछ धनिया पत्ती वगैरह डालकर उसे एक अलग टच देने का नाटक कर दिया गया था. ग्राहक धन्य-धन्य होकर वापस गए. इस वादे के साथ कि फिर वापस आएंगे.

इसके बाद ऊबा बटलर ने नाटक का अंत कर दिया. ‘द शेड ऐट डलविच’ का भेद खुल गया. लेकिन सहज बुद्धि को किनारे रखकर सोशल मीडिया और इंटरनेट पर मौजूद ऐसी चीजों पर यकीन कर लेने वाले करोड़ों लोगों के लिए कोई न कोई नाटक अब भी जारी होगा. ऊबा बटलर कहते हैं, ‘लोग मेरा पैर देखकर लार टपका सकते हैं, द शेड ऐट डलविच लंदन का नंबर एक रेस्टोरेंट हो सकता है तो दुनिया में कुछ भी हो सकता है.’

साभार- https://satyagrah.scroll.in/ से



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