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बुलेट ट्रैन सपना नहीं, हकीकत बनेगीः श्री धनंजय कुमार

मुंबई और अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन चलाने के पीएम मोदी के सपने का एक महत्वपूर्ण चरण शुरू हो गया है. समुद्र के भीतर सुरंग बनाने के लिए मिट्टी की जांच का काम शुरू हो गया है। जापानी समुद्री विशेषज्ञों ने लगभग 15 दिनों तक समुद्र के अंदर रहकर रजिस्ट्रिविटी सोनिक जाँच को अंजाम दिया।

एक अनौपचारिक चर्चा के दौरान बुलेट ट्रेन परियोजना को अंजाम दे रही हाई स्पीड रेल कोरिडोर कॉर्पोरेशन http://hsrc.in/ के जनसंपर्क अधिकारी श्री धनंजय कुमार ने बुलैट ट्रैन को लेकर कई रोचक तथ्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि परियोजना का अधिकांश हिस्सा एलीवेटेड यानी जमीन के ऊपर खंभों पर ही होगा लेकिन ठाणे से विरार के बीच का 21 किलोमीटर हिस्सा सुरंग से गुजरेगा. इसमें भी सात किलोमीटर का हिस्सा समुद्र के नीचे से होकर जाएगा. यहां समुद्र की गहराई तकरीबन 70 मीटर है. समुद्र के तल से 30 मीटर नीचे यानी यह लाइन तकरीबन 100 मीटर नीचे से होकर गुजरेगी. भारत में यह पहला मौका होगा जब कोई रेलवे लाइन समुद्र की सतह के नीचे से होकर जाएगी. थाणे और विरार के बीच सुरंग बनाने की जरूरत इस क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण की अड़चनों के मद्देनजर महसूस की गई. यह क्षेत्र काफी हरा-भरा है और जमीन के ऊपर से लाइन ले जाने से पर्यावरण को नुकसान होने का अंदेशा था. सुरंग बनाने से इस क्षेत्र की दलदली मिट्टी से लेकर मैनग्रोव को कोई नुक्सान नहीं पहुँचेगा।

इसके निर्माण में 80 प्रतिशत कंपनियाँ भारतीय व 20 प्रतिशत जापानी कंपनियों का सहयोग रहेगा। बुलेट ट्रैन के लिए बड़ौदा में रेल्वे द्वारा एक प्रौद्योगिकी संस्थान की भी स्थापना की जाएगी जिसमें बुलेट ट्रैन से संबंधित तकनीकी व पेशेवर कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन या हाईस्पीड परियोजना 508 किलोमीटर लंबी है. 350 किलोमीटर की अधिकतम तथा 320 किलोमीटर की औसत रफ्तार के हिसाब से इस दूरी को कवर करने में बुलेट ट्रेन को तकरीबन दो घंटे लगेंगे. परियोजना पर 97,636 करोड़ रुपये की लागत आंकी गई है।

मुंबई से अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रैन के लिए 11 स्टेशन प्रस्तावित हैं, मुंबई, ठाणे, विरार, बोईसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद और अहमदाबाद हैं।

भारतीय रेल नेटवर्क के साथ स्थानान्तरण करने के लिए मौजूदा रेलवे स्टेशनों के ऊपर या उनके सामने हाई स्पीड रेल स्टेशन का निर्माण किया जाएगा।

बुलैट ट्रैन कोरिडोर के समांतर सड़क का भी निर्माण किया जाएगा ताकि किसी आपातकालीन स्थिति में सड़क मार्ग से सहायता पहुँचाई जा सके। यह सड़क आसपास के गाँवों के लोगों द्वारा सड़क के रूप में भी उपयोग में लाई जा सकेगी।

सरकार ने इस 1.08 लाख करोड़ रुपये की महत्वकांक्षी परियोजना को भारतीय स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ 15 अगस्त 2022 के मौके पर भारत की जनता को सौंपने का लक्ष्य रखा है।

यह हाई स्पीड लाइन गुजरात के अहमदाबाद से मुंबई तक चलाई जाएगी। यह लाइन दो राज्यों के बीच सात घंटे की दूरी को महज तीन घंटों में पूरा करेगी।

इस रेल लाइन पर दौड़ने वाली बुलेट ट्रेन की अधिकतम गति 217 मील प्रति घंटा यानी 350 किमी प्रति घंटा जबकि औसत गति 320 किमी प्रति घंटा होगी, जो वर्तमान में देश की सबसे तेज चलनी वाली दूसरी ट्रेनों से दो गुना से भी ज्यादा होगी।

यह बुलेट ट्रेन राजधानी दिल्ली से आगरा जाने वाली गतिमान एक्सप्रेस (100 मील प्रति घंटा) से लगभग तीन गुना ज्यादा तेजी से दौड़ेगी। यह शिंकांसेन मॉडल ट्रेन अहमदाबाद से मुंबई तक आठ घंटे के सफर को तीन घंटे और करीब 316 मील की यात्रा में कटौती करेगी।

भारत से मजबूत दोस्ती का सबूत देते हुए जापान, भारत को इस परियोजना के लिए 88,000 करोड़ रुपये 0.1 प्रतिशत के न्यूनतम ब्याज पर ऋण देगा।

इस ट्रेन के परिचालन की शुरुआत में 10 कोच होंगे जिसमें कुल 750 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। बाद में इसको बढ़ाकर 16 कोच का कर दिया जाएगा (जो कि प्रस्तावित है) जिसमें 1,250 यात्रियों की बैठने की क्षमता होगी। इस ट्रेन का किराया राजधानी एक्सप्रेस के एसी 2-टीयर की कीमत के बराबर होगा।

प्रांरभ में रेलवे करीब 35 हाई स्पीड बुलेट ट्रेन चलाएगा, जिसके लगभग 70 फेरे प्रति दिन लगाए जाने की उम्मीद है। साल 2050 तक बुलेट ट्रेनों की संख्या बढ़कर 105 तक की जा सकती है।

अनुमान है कि बुलेट ट्रेन के शुरू होने के बाद सालाना 1.6 करोड़ लोग इन ट्रेनों से यात्रा करेंगे। वहीं 2050 तक इस संख्या में भारी इजाफा होने की उम्मीद है, यह आंकड़ा उस वक्त तक बढ़कर रोजाना 1.6 लाख तक पहुंच जाएगा जो इन ट्रेनों से सफर करेंगे।

इस हाई स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना के शुरू होने से रोजगार क्षेत्र में वृद्धि होगी। परियोजना से करीब 36,000 लोगों को रोजगार मिल सकेगा।

इस 1.08 लाख करोड़ रुपये की महत्वकांक्षी परियोजना के लिए रेलवे को लगभग 825 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता होगी। जिसमें 92 फीसदी (468 किमी ऊंचा ट्रैक) जमीन से ऊंचाई पर रहेगा, छह फीसदी (सुरंग के भीतर 27 किलोमीटर) सुरंगों के माध्यम से और शेष दो फीसदी (13 किमी भूमि पर) भूमि पर बनाया जाएगा।

अहमदाबाद से मुंबई तक इस रेल लाइन मार्ग पर कुल 12 स्टेशन होंगे जहां पर ट्रेन केवल 165 सेकेंड के लिए रुकेगी। इसके साथ ही 20 घंटे के सफर के बाद चार घंटे तक इनकी सफाई की जाएगी।

रेलवे ने गति के आधार पर दो प्रकार की बुलेट ट्रेन चलाने की योजना बनाई है। पहली हाई स्पीड ट्रेन जो मुंबई और अहमदाबाद के बीच प्रस्तावित है, सभी 12 स्टेशनों पर रुकेगी, दूसरी तेज गति वाली ट्रेन केवल प्रमुख स्टेशनों पर ही रुका करेगी।

रेलवे के मुताबिक कुल 24 हाई स्पीड बुलेट ट्रेनें जापान से आयात की जाएगी और फिर बाकी की बची ट्रेनों को भारत में ही निर्मित किया जाएगा।

अगर ट्रेन चार स्टेशनों- अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, मुंबई पर रुकती है तो यह दूरी दो घंटे सात मिनट में पूरी की जा सकती है. अगर ट्रेन सभी 12 स्टेशनों पर रुकती है, तो ट्रेन को दो घंटे 58 मिनट लगेंगे.

रेल मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक बुलेट ट्रेन की परिचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, जबकि अधिकतम गति 350 किलोमीटर प्रति घंटा होगी.

भारत की यह पहली बुलेट ट्रेन एयर कंडीशन से लैस होगी. इसमें सफर को आरामदायक बनाने के लिए सभी इंतजाम किए जाएंगे.

प्रस्तावित प्लान के मुताबिक भारत की प्रस्तावित बुलेट ट्रेन में 10 से 16 कोच होंगे. हर ट्रेन में 1300 से 1600 तक लोग यात्रा कर सकेंगे.

बुलेट ट्रेन से सफर करने के लिए आपको 3,300 रुपए तक का किराया देना होगा. अहमदाबाद से मुंबई के सफर के लिए यह किराया प्रस्तावित किया है. बुलेट ट्रेन का किराया एसी ट्रेन से 1.5 गुना ज्यादा होगा.

बुलेट ट्रैन का गलियारा मुंबई में बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स के भूमिगत (अंडरग्राउंड) स्टेशन से शुरू होगा। और फिर 21 किमी भूमिगत रास्ते से होकर जाने के बाद ठाणे से पहले बाहर निकलेगा।

बुलेट ट्रैन के भूमिगत खंड के लिए 62 स्थानों सहित मिट्टी के परीक्षण के लिए पूरे मार्ग के साथ 750 स्थानों की पहचान की। अधिकारियों ने मिट्टी और चट्टानों का परीक्षण अंतरसागरीय सुरंग तनाव के लिए 70 मीटर की गहराई तक किया है। सर्वेक्षण टीम ने 100 मेगापिक्सल उच्च-रिज़ॉल्यूशन डिजिटल कैमरा, लाइट डिटेक्शन और रंगिंग (लीडर) स्कैनर, डाटा रिकॉर्डर और अन्य उपकरण के साथ एक हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया जो सर्वेक्षण को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया गया था। यह हवाई सर्वेक्षण पद्धति भूमि परिदृश्य, इमारतों और वनस्पतियों के बारे में सटीक आंकड़े प्रदान करती है। इस पध्दति से सर्वेक्षण का काम 9-10 सप्ताह के भीतर पूरा हो जाता है जबकि परंपरागत तरीके से नियमित सर्वेक्षण के लिए 6-8 महीने का समय लग जाता है। हेलीकॉप्टर ने 30 घंटे के फ्लाइंग टाइम के भीतर पूरे मार्ग का सर्वेक्षण पूरा किया गया, और शेष समय मे इसके डेटा की प्रोसेसिंग की गई।

बुलेट ट्रैन के लिए साबरमती स्टेशन अहमदाबाद में हाई-स्पीड रेल टर्मिनल के रूप में काम करेगा।

 



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