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बुंदेल खंड में महिलाओं ने 100 गाँवों को पानी के मामले में आत्मनिर्भर बनाया

बुंदेलखंड के सूखे पर सियासत के बीच यहां के लोग अब खुद ही मुश्किलों से निपटने के रास्ते खोजने लगे हैं। यहां के सूखाग्रस्त गांवों को पानीदार बनाने की जिम्मेदारी यहां के महिलाओं ने अपने हाथों में ले ली है। बुंदेलखंड की महिलाओं की मेहनत से उत्तर प्रदेश में पडऩे वाले इलाके के सातों जिलों के 100 से ज्यादा गांव अब पीने और जरूरत के पानी के मामले में आत्मनिर्भर हो गए हैं।

मैगसायसाय पुरस्कार विजेता और ‘जल जोड़ों जन जोड़ो अभियान’ के संस्थापक राजेंद्र सिंह की प्रेरणा से बुंदेलखंड में जल सहेली अभियान की शुरुआत की गई है। इन अभावग्रस्त इलाकों में गांव की कम पढ़ी-लिखी, आर्थिक रुप से कमजोर महिलाओं ने जल सहेलियों के रूप में अपने गांवों को पानीदार बनाने का कार्य कर दिखाया है। अकेले जालौन और हमीरपुर जिले के दर्जनों से अधिक गांव भीषण सूखे में भी इन जल सहेलियों के प्रयासों से पानीदार बने हैं। आज बुंदेलखंड की समस्याओं व उनके निदान पर राजधानी लखनऊ में आयोजित जन सुनवाई कार्यक्रम के दौरान राजेंद्र सिंह ने बताया कि जल सहेलियां, बिना किसी आर्थिक लाभ के अपने गांवों को पानीदार बनाने की धुन में दिन-रात जुटी हुई हैं। इन जल सहेलियों ने अपने गांवों में जल साक्षरता की ऐसी बयार बहाई है कि कल तक इनका मजाक बनाने वाले पुरुष समुदाय भी आज इनके सहयोगी बन गए हैं।

सिंह ने बताया कि इन जल सहेलियों को संजय सिंह और उनकी संस्था परमार्थ का अथक सहयोग मिला है। बुंदेलखंड के एक पिछड़े जिले हमीरपुर जिले के सरीला विकास खंड के ग्राम अतरौली में महिलाएं नई क्रांति की ध्वजा वाहक बनीं।

जल सहेलियों के आपसी समन्वय और अथक प्रयासों से पंचायत सदस्यों द्वारा दबाव बनाने से प्रशासन को गांव में 5 नए हैंडपंप लगाने लगवाएं हैं। पाइप लाइन जलापूर्ति में ज्यादा से ज्यादा घर कवर हो सके इसके लिए उनके प्रयास से प्रशासन ने 200 मीटर अतिरिक्त लाइन भी बिछवा दी गई है, जिससे परिवारों को स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति होती है।

साभार- http://hindi.business-standard.com/ से

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