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कोरिडोर कहना गुलामी का प्रतीक, हिंदी नाम रखे जाएःँ संत डॉ. अवधेश पुरी महाराज

उज्जैन। संत डॉ. अवधेशपुरी महाराज ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में स्मार्ट सिटी उज्जैन के अंतर्गत हो रहे निर्माण कार्यों के नाम हिंदी में लिखे जाएं।

अंग्रेजी में लिखे जा रहे नाम पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण एवं गुलामी की मानसिकता के प्रतीक हैं। जब भगवान महाकाल के 99 प्रतिशत भक्त हिंदी बोलते हैं तो यहां अंग्रेजी में लिखे नामों का क्या औचित्य है? यह हमारे धर्म एवं संस्कृति पर कुठाराघात है।

इतना ही नहीं इससे हमारी सनातन संस्कृति एवं पौराणिक इतिहास का भी अपमान हो रहा है। सनातन हिंदू धर्म एवं वैदिक थीम तथा महाकाल वन का सपना दिखाकर ऐसे नाम रखे जा रहे हैं जिन का अर्थ भक्तों को डिक्शनरी में खोजने पर भी मुश्किल से मिलेगा।

अवधेशपुरी महाराज ने कहा कि महाकाल टनल के स्थान पर महाकाल सुरंग, महाकाल कॉरिडोर के स्थान पर महाकाल पथ, महाकाल प्लाजा के स्थान पर महाकाल चौक आदि नाम होने चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले महाकाल के भोले भक्त स्मार्ट टिकट किओस्क का अर्थ कैसे समझेंगे? संत अवधेशपुरी ने कहा कि यह सारे के सारे षड्यंत्र व्यवस्थाओं के व्यवसायीकरण एवं भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे हैं।

महाकाल में जिन मूर्तियों का निर्माण किया जा रहा है वह केवल प्रदर्शनी के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि उज्जैन की ऐतिहासिकता एवं पौराणिकता के दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए। उज्जैन से संबंध रखने वाली महान विभूतियां जैसे महर्षि च्यवन ऋषि, राजा भर्तृहरि, आद्य शंकराचार्य, महर्षि सांदीपनि, महर्षि कालिदास, महर्षि वाल्मीकि आदि की मूर्तियां लगाई जानी चाहिए। हमारा उद्देश्य हमारे गौरवपूर्ण पौराणिक इतिहास एवं संस्कृति की रक्षा करना होना चाहिए ना कि पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण।

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