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क्या असम भारत का स्पोर्ट्स हब बन सकता है?

भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र ने देश को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन करने वाले खिलाड़ी दिए हैं। एम.सी. मैरी कोम ने 2012 के ओलंपिक खेलों की मुक्केबाज़ी प्रतिस्पर्धा में कांस्य पदक जीतने के अलावा मुक्केबाज़ी की चैंपियन्स ट्रॉफी में भी 5 बार पदक हासिल किए। फुटबॉल खिलाड़ी बाइचुंग भूटिया, मुक्केबाज़ एल. सरिता देवी, जयंता तालुकदार, भारोत्तोलक के. संजीता चानू जैसे खिलाड़ियों नें विश्वपटल पर पूर्वोत्तर क्षेत्र को पहचान दिलाई है। 2014 में ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ खेलों में मुक्केबाज़ सरिता देवी ने रजत रदक, जयंता तालुकगार ने स्वर्ण पदक और अर्जुन अवार्ड से पुरस्कृत के. संजीता नें स्वर्ण जीतकर इतिहास रच दिया। देश की कुल आबादी में पूर्वोत्तर क्षेत्र का हिस्सा 3.7 प्रतिशत है। यहां का युवा वर्ग खेलों की ओर विशेष झुकाव के लिए जाना जाता है।

असम और मणिपुर में हर तरह के मौसम में प्रतियोगिताओं के लिए ज़रूरी सिंथेटिक एथलैटिक ट्रैक मौजूद है। इन राज्यों को शारीरिक शिक्षा और खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए ओद्योगिक घरानों और सार्वजनिक उपक्रमों से संतोषजनक आर्थिक सहायता मिल रही है। इस क्षेत्र में युवाओं को बचपन से ही खेल गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। यहां के लोगों का मानना है कि शारीरिक शिक्षा को स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

मौजूदा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार पूर्वोत्तर राज्यों और खेलों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। तत्कालीन केंद्रीय खेल मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की मदद से भारतीय खेल प्राधिकरण ने 2015 में अपना पहला कार्यालय गुवाहटी में खोला। इसकी मदद से पूर्वोत्तर क्षेत्र के खिलाड़ी, खेलों के विकास के लिए अपनी बात आसानी से खेल मंत्रालय तक पहुंचा पा रहे हैं। भारतीय खेल प्राधिकरण के विभिन्न केंद्रों पर 4031 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है जिनमें से 901 यानि 22.3 प्रतिशत महिला खिलाड़ीं पूर्वोत्तर क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नगालैंड, सिक्किम, और त्रिपुरा की हैं। इन खिलाड़ियों को भारतीय खेल प्राधिकरण के 290 केंद्रों पर खेलों की 27 विधाओं में निरंतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

असम के मुख्यमंत्री बनने के बाद श्री सर्बानंद सोनोवाल ने राज्य को देश की खेल राजधानी बनाने का लक्ष्य तय किया है। श्री सोनोवाल ने कहा है कि “ दक्षिण एशियाई खेलों के आयोजन के साथ हमने असम को वैश्विक स्तर पर खेलों का केंद्र बनाने की शुरूआत कर दी है। राज्य में आयोजित होने वाली हर प्रतियोगिता हमें लक्ष्य के और करीब लेकर जाएगी।” उन्हें पूरा विश्वास है कि अगर खेल प्रतिभाओं को उचित प्रशिक्षण मिले तो पूर्वोत्तर क्षेत्र देश को अतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में प्रतिनिधित्व करने वाले और खिलाड़ी दे सकता है। असम और पूर्वोत्तर में कई ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें उचित पहचान नहीं मिल पाती। कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी सिर्फ ज़िला और राज्य स्तर तक ही पहुंच पाते हैं।

बड़ी संख्‍या में खेल प्रतिभाओं के होने की वजह से सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में यह क्षेत्र शामिल हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने सभी मंत्रालयों को पूर्वोत्तर क्षेत्र की विकास योजनाओं को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है क्‍योंकि पूर्वोत्तर क्षेत्र के पर्याप्‍त विकास के बिना देश प्रगति नहीं कर सकता। हिमालयन क्षेत्रीय खेलों का आयोजन पूर्वोत्तर क्षेत्र में हो इसके लिए सरकार ने तत्‍काल कदम उठाए। खेल मंत्रालय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ मिलकर शिक्षा में खेलों को जोड़ने के लिए प्रयासरत है ताकि बच्‍चों का सर्वांगीण विकास हो।

पूर्वोत्तर क्षेत्र अपने प्रतिभाशाली मुक्‍केबाजों के लिए भी जाना जाता है। यहां मैरी कोम, शिवा थापा, एल. सरिता देवी और देवेन्‍द्रो सिंह जैसे मुक्‍केबाज हुए हैं जिन्‍होंने भारत को ओलंपिक सहित अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर की मुक्‍केबाजी प्रतियोगिता में पहचान दिलाई है। गुवाहाटी फीफा अंडर-17 फुटबॉल विश्‍व कप की मेजबानों के लिए तैयार है। ये अब तक ही सबसे बड़ी प्रतियोगिता मानी जा रही है। राज्‍य सरकार ‘फीफा अंडर-17 विश्‍व कप, भारत 2017’ के आयोजन के महत्‍व को समझती है और इसे हर संभव सहयोग दे रही है क्‍योंकि यह आयोजन असम को भारत का खेल केंद्र बनाने के मुख्‍यमंत्री के लक्ष्‍य के लिहाज से भी महत्‍वपूर्ण है। हाल ही में असम में भारत, म्‍यांमार, थाईलैंड का रैली का आयोजन हुआ।

इन दिनों राज्‍य में परंपरागत खेलों और संस्‍कृति को जोड़ने वाले ब्रह्मपुत्र महोत्‍सव की तैयारियां चल रही हैं। गुवाहाटी देश की खेल राजधानी बने इस लक्ष्‍य को पूरा करने के क्रम में असम में पहली बार पुरुष राष्‍ट्रीय मुक्‍केबाजी चैंपियनशिप 2016-17 का आयोजन हुआ। यह भारतीय मुक्‍केबाजी संघ की पिछले दो वर्षों में सबसे बड़ी प्रतियोगिता थी। असम को उम्‍मीद है कि आगामी दिनों में वो बड़े स्‍तर की ऐसी ही कई प्रतियोगिताओं का आयोजन करेगा। क्षेत्र के लिए यह बड़े गर्व की बात है कि यहां के बड़े खिलाड़ी अपने समुदाय के युवा एथलीटों का मार्गदर्शन एवं मदद कर रहे हैं। मैरी कोम क्षेत्रीय मुक्‍केबाजी फांउडेशन और बाइचुंग भूटिया की फुटबॉल स्‍कूलों की श्रृंखला इसका अच्‍छा उदाहरण है।

क्षेत्र में पिछले कुछ दशकों में खेलों के क्षेत्र में तेज विकास हुआ है। यहां फुटबॉल क्‍लबों की अच्‍छी तादाद है। शिलांग लाजांग फुटबॉल क्‍लब, आइजोल फुटबॉल क्‍लब, नॉर्थ ईस्‍ट यूनाइटेड फुटबॉल क्‍लब, रॉयल वालिंगदोह फुटबॉल क्‍लब जैसे कई प्रतिष्ठित फुटबॉल क्‍लब हैं। इसके अलावा शिलांग, मणिपुर और मिजोरम में कई स्‍थानीय फुटबॉल लीग का आयोजन होता है। असम के अलावा इस क्षेत्र की अधिकतर राज्‍य सरकारें स्‍टेडियमों और अभ्‍यास स्‍थलों के आधुनिकीकरण के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। उम्‍मीद है कि भली-भांति सोच-समझकर जो कदम उठाए गए हैं वो एक दिन रंग लायेंगे और पूर्वोत्तर भारत के लोगों का खेलों और भारत के लिए विश्‍व स्‍तर के खिलाड़ी तैयार करने का सपना साकार होगा जिन पर भारत गर्व कर सके।

(लेखक गुवाहटी में रहते हैं और स्तंभकार हैं।)

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