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कैंसर ज़िंदगी का अंत नहीं, इसके बाद भी जीवन है…

नई दिल्ली। मौत को मात दे चुके है और जीने का जज्बा दोगुना हो चुका है। चारों ओर खुशियां, डांस और मस्ती का माहौल है। कुछ ऐसा नज़ारा देखने को मिला आज दिल्ली के सिलेक्ट सिटीवॉक मॉल में। मौका था फरवरी माह के दूसरे शनिवार को मनाये जाने वाले ‘अन्तर्राष्ट्रीय कैंसर सर्वाइवर्स डे’ का। इण्डियन कैंसर सोसायटी के अंग ‘कैंसर सहयोग’ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ‘इन सेलीब्रेशन ऑफ लाइफ’ के अवसर पर कैंसर को मात देने वाले सर्वाईवर्स ने अपने अनुभव साझा किए और बॉलीवुड गायिका निकिता गांधी के गीतों पर झूमते थिरकते नज़र आये।

कार्यक्रम की शुरुआत पारम्परिक दीप प्रज्जवलन के माध्यम से हुई, जिसके बाद कैंसर के खिलाफ और कैंसर के बाद भी जीवन के संदेश की जागरूकता के साथ कैंसर सर्वाइवर्स एवम् वालेनटीयर्स ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किये।

इस दौरान इंडियन कैंसर सोसायटी की सचिव रेणुका प्रसाद ने उपस्थित मेहमानों एवम् अन्य को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा, फरवरी के दूसरे शनिवार को दुनिया भर में कैंसर सर्वाइवर डे के रूप में मनाया जाता है। इंडियन कैंसर सोसायटी के समूह, कैंसर सहयोग, जिसमें प्रमुख रूप से कैंसर सर्वाइवर्स शामिल हैं के माध्यम से हमारा उद्देश्य इस बात की जागरूकता फैलाना है कि कैंसर लाईलाज नहीं है, इससे बचा जा सकता है और जो इससे पीड़ित हैं वह भी जंग जीत सकते हैं।

उनके बाद कैंसर विजेता रेखा गुलाबानी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब उन्हे पता चला कि वह कैंसर से जूझ रही है तो उन्होंने हार न मानते हुए जीने का जज्बा बरकरार रखा। डॉक्टरों की गहन देखरेख और प्रबल इच्छाशक्ति की बदौलत उन्होंने कैंसर को हारने पर मजबूर कर दिया।

कार्यक्रम के अन्तर्गत निकिता गांधी ने अपने विभिन्न गीत ‘कुछ तो है तुझसे राबता..,’ ‘आओ कभी हवेली पे..’, ‘सवरने लगे..’, प्रस्तुत किये और उपस्थिति श्रोताओं को थिरकने पर मजबूर किया।

कैंसर सोसायटी के वालेनटीयर्स ने समूह गायन प्रस्तुत किया। कैंसर सर्वाइवर डे के अवसर पर सोसायटी के सर्वाइवर एवम् वालेनटीयर्स का गीत हम होंगे कामयाब विशिष्ट आकर्षण रहा।

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