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दीपावली विशेष
 

  • भाई-दूजः बहन के निश्छल प्यार का प्रतीक

    भाई दूज का पर्व दीवाली के दो दिन बाद यानि कार्तिक शुक्ल की द्वितीया को मनाया जाता है। इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। आज के दिन भाई खुद अपनी बहन के घर जाता है, बहन उसकी पूजा करती है और उसकी आरती उतारकर उसे तिलक […]

  • राम की शक्ति पूजा

    दिवाली का मतलब है अंधकार को दूर करना लेकिन इसके शाब्दिक अर्थ को ग्रहण करने की बजाय आप अपने आस-पास के अंधियारे को देखें और अनाथ आश्रमों में रहने वाले बच्चों के बीच जाकर, अपने घर के पास की झुग्गी झोपडियों में रहने वाले गरीबों के बीच जाकर या फिर अपने घर में काम करने […]

  • पूजन के लिए आवश्यक पूजा सामग्री

    धूप बत्ती (अगरबत्ती),  चंदन ,  कपूर,  केसर ,  यज्ञोपवीत 5 ,  कुंकु ,  चावल,  अबीर,  गुलाल,  अभ्रक,  हल्दी ,  सौभाग्य द्रव्य-मेहंदी,  चूड़ी, काजल, पायजेब,   बिछुड़ी आदि आभूषण। नाड़ा (लच्छा),  रुई,  रोली, सिंदूर,  सुपारी, पान के पत्त ,  पुष्पमाला,  कमलगट्टे,  निया खड़ा (बगैर पिसा हुआ) ,  सप्तमृत्तिका,  सप्तधान्य,  कुशा व दूर्वा (कुश की घांस) ,  पंच […]

  • लक्ष्मीजी की आरती

                    ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता । तुमको निसदिन सेवत हर-विष्णु-धाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता । उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता । सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता । तुम पाताल-निरंजनि, […]

  • दीपक जलाने व आतिशबाजी का कारण

    दीपावली के दिन आतिशबाजी (आकाशदीप, कंडील आदि) जलाने की प्रथा के पीछे संभवतः यह धारणा है कि दीपावली-अमावस्या से पितरों की रात आरंभ होती है। कहीं वे मार्ग से भटक न जाएँ, इसलिए उनके लिए प्रकाश की व्यवस्था इस रूप में की जाती है। इस प्रथा का बंगाल में विशेष प्रचलन है। .

  • रूप चौदस

    दीपावली के एक दिन पूर्व आने वाली चतुर्दशी को रुप चौदस या रूप चतुर्दशी या  नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है।  इसी दिन बजरंग बली हुनमान का जन्म दिवस भी माना गया है। इसे छोटी दीपावली भी कहते है। इस दिन रुप और सौंदर्य प्रदान करने वाले देवता श्री कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए […]

  • दीपावली और जुआ

    दीपावली पर कहीं-कहीं जुआ भी खेला जाता है। इसका प्रधान लक्ष्य वर्षभर के भाग्य की परीक्षा करना है। इस प्रथा के साथ भगवान शंकर तथा पार्वती के जुआ खेलने के प्रसंग को भी जोड़ा जाता है, जिसमें भगवान शंकर पराजित हो गए थे। हालाँकि यह एक दुर्गुण ही है किन्तु कुछ लोग भगवान शंकर और […]

  • वास्तु सम्मत लक्ष्मी पूजन

    कमलासना की पूजा से वैभव: गृहस्थ को हमेशा कमलासन पर विराजित लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। देवीभागवत में कहा गया है कि कमलासना लक्ष्मी की आराधना से इंद्र ने देवाधिराज होने का गौरव प्राप्त किया था। इंद्र ने लक्ष्मी की आराधना ‘ú कमलवासिन्यै नम:’ मंत्र से की थी। यह मंत्र आज भी अचूक है। दीपावली […]

  • दीवाली की पौराणिक कथा

    एक बार भगवान विष्णु माता लक्ष्मीजी सहित पृथ्वी पर घूमने आए। कुछ देर बाद भगवान विष्णु लक्ष्मीजी से बोले- मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूँ । तुम यहीं ठहरो, परंतु लक्ष्मीजी भी विष्णुजी के पीछे चल दीं। कुछ दूर चलने पर ईख (गन्ने) का खेत मिला। लक्ष्मीजी एक गन्ना तोड़कर चूसने लगीं। भगवान […]

  • खगोलीय दृष्टि से दिवाली का महत्व

    मेष एवं तुला की संक्रांति में सूर्य विषुवत रेखा (नाड़ीवृत्त) पर रहता है, जिसे देवता 6 माह तक उत्तर की ओर तथा राक्षस 6 माह तक दक्षिण की ओर खींचते हैं। मंदराचल पर्वत ही नाड़ीवृत्त है, जिसके एक भाग में मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह और कन्या राशि हैं जिन्हें देवता खींचते हैं। दूसरे भाग […]

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