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भुले बिसरे लोग
 

  • सोवियत तानाशाह स्टालिन की बेटी ने एक भारतीय से शादी कर सबको चौंका दिया था

    सोवियत तानाशाह स्टालिन की बेटी ने एक भारतीय से शादी कर सबको चौंका दिया था

    तानाशाह स्टालिन की बेटी एक भारतीय की दीवानी थी और उससे शादी भी की थी।

  • पं. वंशीधर मिश्रः भारतीय राजनीति का एक गुमनाम सितारा

    पं. वंशीधर मिश्रः भारतीय राजनीति का एक गुमनाम सितारा

    आज भारत के चुनावी महापर्व पर मुझे कुछ पुराने समय के बेह्तरीन महापुरषों का स्मरण बरबस होता है जो मैने अपने पिता से दादा से, नाना से और मां से सुना आप सभी को बताता हूं!

  • राजनांदगाँव में मुक्तिबोध ; कुछ काव्य बिम्ब

    राजनांदगाँव में मुक्तिबोध ; कुछ काव्य बिम्ब

    हिंदी कविता के महानतम हस्ताक्षरों में से एक गजानन माधव मुक्तिबोध का छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव शहर से नाता कितना गहरा था,यह बताने की ज़रुरत शायद नहीं है। इतना याद रहे कि सन 1958 से मृत्यु पर्यन्त वे राजनांदगांव दिग्विजय कालेज में व्याख्याता रहे। यहीं उनके तत्कालीन आवास स्थल को मुक्तिबोध स्मारक के रूप में यादगार बनाकर वहां हिंदी के दो अन्य साहित्यकार पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और डॉ.बलदेव प्रसाद मिश्र की स्मृतियों को संजोते हुए सन 2005 में एक सुन्दर संग्रहालय की स्थापना भी की गई है।

  • हमारे इतिहास से गायब है मोहम्मद गज़नवी  से मुकाबला करने वाला वीर योध्दा गोगा बापा

    हमारे इतिहास से गायब है मोहम्मद गज़नवी से मुकाबला करने वाला वीर योध्दा गोगा बापा

    भारत देश के महान इतिहास में लाखों ऐसे वीर हुए हैं जिन्होंने देश,धर्म और जाति की सेवा में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। खेद है कि स्वतंत्र भारत का इतिहास आज भी परतंत्र हैं कि उसमें गौरी और गजनी के आक्रमण के विषय में तो बताया जाता हैं मगर उसका प्रतिरोध करने वाले महान वीरों पर मौन धारण कर लिया जाता हैं। ऐसे ही महान वीरों में देश धर्म की रक्षार्थ बलिदान हुए वीर गोगा बापा एवं उनका परिवार।

  • चोरी न करें झूठ न बोलें तो क्या करें, चूल्हे पे क्या उसूल पकाएंगे शाम को-अदम गोंडवी

    चोरी न करें झूठ न बोलें तो क्या करें, चूल्हे पे क्या उसूल पकाएंगे शाम को-अदम गोंडवी

    अदम गोंडवी देसी मिजाज के शायर थे और शान से देहाती अंदाज़ में ही जीते थे। वे किसी एक आम गाँव वाले की तरह धोती कुरता बंडी और गले में पंछा पहनते थे। मंच पर जब अपनी शायरी सुनाने आते तो भी उनका पहनावा यही रहता था। उनका मूल नाम रामनाथ सिंह था, उनका जन्म 22 अक्तूबर 1947, आटा ग्राम, परसपुर,गोंडा (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।

  • अमृतलाल नागर के लेखक बनने की कहानी

    अमृतलाल नागर हिंदी के अतिविशिष्ट लेखकों में से एक हैं। उनके उपन्यास हों, उनकी कहानियाँ हों या कि ‘गदर के फूल’, ‘ये कोठेवालियाँ’ जैसी विशिष्ट कृतियाँ हों जिनकी परंपरा तब तक के हिंदी संसार में नहीं ही थी, उनकी यह सभी कृतियाँ उन्हें एक ऐसा महानतम रचनाकार सिद्ध करती हैं जिसकी जड़ें अपनी जमीन, अपनी […]

  • सर्वे भवंतु सुखिनः को साकार करेगा पं. दीनदयालजी एकात्म मानवदर्शन

    परमपावन भारत भूमि अजन्मा है यह देव निर्मित है और देवताओं के द्वारा इस धरा पर  विभिन्न अवसरों पर अलग अलग प्रकार की शक्तियां अवतरित होती रहती हैं।  जो देव निर्मित भू -भाग को अपनी ऊर्जा से  समाज का मार्गदर्शन करते हैं।  ऐसे महापुरूषों की अनंत श्रृंखला भारत में विराजमान है।    श्रीकृष्ण की भूमि […]

  • मुक्तिबोध पर अशोक वाजपेयी का यादगार संस्मरण

    हिन्दी की नई कविता के सर्वमान्य कवि गजानन माधव मुक्तिबोध के रचना संसार के प्रखर प्रवक्ता तथा उनके अभिन्न रहे प्रख्यात समालोचक व संस्कृति विश्लेषक श्री अशोक वाजपेयी का यह यादगार संस्मरण हम यहां साभार प्रस्तुत कर रहे हैं। प्रस्तुतकर्ता ने मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह जी के मुख्य आतिथ्य और तत्कालीन कलेक्टर श्री गणेश शंकर मिश्रा […]

  • विस्मरण से स्मरण के सचेतक बाबा नागार्जुन

    'जनपथ' के नागार्जुन विशेषांक के अतिथि सम्पादक सुधीर सुमन ने बाबा नागार्जुन के रचना संसार को बड़ी मर्म भरी वाणी दी है। यह अंक एकबारगी एक ही बैठक में पढ़ने के बाद मुझे लगता है कि इसका रसास्वादन करने अपने पाठकों को भी आमंत्रित करूँ। तो लीजिये ये रहीं बाबा पर एकाग्र अंक की ख़ास […]

  • मानवतावादी रचनाकार विष्णु प्रभाकर

    कालजयी जीवनी आवारा मसीहा के रचियता सुप्रसिद्ध साहित्यकार विष्णु प्रभाकर कहते थे कि एक साहित्यकार को केवल यह नहीं सोचना चाहिए कि उसे क्या लिखना है, बल्कि इस पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए कि क्या नहीं लिखना है.  वह अपने लिखने के बारे में कहते थे कि प्रत्येक मनुष्य दूसरे के प्रति उत्तरदायी […]

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